इस दौर-ए-सियासत का,
इतना-सा फ़साना है
बस्ती भी जलानी है,
मातम भी मनाना है
-वसीम बरेलवी

आज की राजनीति समाज के लिए चुनौती
दिन प्रतिदिन राजनीति का गिरता स्तर भारतीय राजनीति, भारतीय समाज और हमारे लोकतंत्र के लिए बेहद चिंता का विषय बनता जा रहा है. ऐसे में यह हमारे पूरे समाज के लिए चुनौती है कि हम कैसे इस भद्दी होती राजनीति में बदलाव ला पाएं. वोट की जो ताकत मतदाताओं को प्रदान की गई है आज वास्तविक अर्थों में उसे ताकत में बदलने की आवश्यकता है. हमें आज अपने अधिकारों के प्रति जवाबदेह होने की जरूरत है. चुनकर आए जनता के प्रतिनिधियों का एक दूसरे पर आरोप लगाना, भद्दी भाषा का इस्तेमाल करना, एक दूसरे से हाथापाई करना कई सवाल खड़े करता है और इसका जवाब भी हमें ही ढूंढना होगा.
आरोपों में घिरे केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उन्हीं के मंत्रिमंडल में कभी शामिल रहे कपिल मिश्रा विवाद भारतीय राजनीति में उत्पन्न शर्मशार करने वाली घटना है. इस विवाद को शुरू हुए लगभग एक महीना हो चुका है बावजूद इसके अभी तक हमने कोई ठोस कार्रवाई होते नहीं देखा. यह विवाद दिन-प्रतिदिन आरोपों के रूप में बढ़ता ही जा रहा है. ऐसे में इसके साथ कई अध्याय और भी जुड़ चुके हैं उनमें से एक लोकतंत्र का मंदिर माने जाने वाले लोकसभा और विधानसभा से जुड़ा मामला है.
कपिल मिश्रा पर चले लात और घूंसे
जीएसटी पर चर्चा को लेकर दिल्ली सरकार द्वारा बुलाई गई विधानसभा का विशेष सत्र कुछ और ही कहानी कहने को तैयार था. सत्र की शुरुआत होते ही अपनी मांगों का एक पोस्टर लेकर कपिल मिश्रा पहुंच गए. जिस पर विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें बैठने को कहा नहीं माने जाने पर अध्यक्ष ने विधानसभा से मार्शलों के द्वारा उन्हें बाहर किए जाने का निर्देश दिया. बाद में कपिल मिश्रा ने कहां कि उन्होंने पहले विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर बोलने के लिए 5 मिनट का वक्त मांगा था, मुख्यमंत्री से जुड़े घोटाले पर रामलीला मैदान में खुला विशेष सत्र बुलाने की मांग की थी. इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा में कुछ विधायकों ने मिलकर उनकी पिटाई की. मार्शलों द्वारा बाहर ले जाने के दौरान पीछे से कुछ विधायकों ने उन्हें लातों से भी मारा. उन्होंने इसके साथ यह भी आरोप लगाया कि उनकी पिटाई मनीष सिसोदिया के इशारे पर हुई इस दौरान केजरीवाल हंस रहे थे. इस मामले से जुड़े विजुअल्स को देखकर कपिल मिश्रा की बात बहुत हद तक सही भी लग रही है और ऐसा शायद पहली बार हुआ हो जब सदन के भीतर कुछ विधायक मिलकर किसी एक विधायक को पीटने में लगे हो. क्या इस तरह की घटना हमारे सविंधान की पवित्रता को कम नहीं करती?
कपिल का दावा दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में हुआ घोटाला
कपिल मिश्रा द्वारा अरविंद केजरीवाल पर लगाए गए आरोपों की फेहरिस्त में कुछ और नए आरोप भी जुड़े हैं मगर केजरीवाल की चुप्पी किसी मुख्यमंत्री पर इतने आरोप लगने के बाद भी हतप्रभ करता है. कपिल मिश्रा के नये आरोपों का एक और बम केजरीवाल पर फोड़ा है. उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में एंबुलेंस खरीद और दवा खरीद घोटाले के साथ-साथ ट्रांसफर और पोस्टिंग के घोटाले का आरोप भी लगाया है. कपिल मिश्रा के अनुसार दवाइयों की खरीद में 300 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है. इतने मूल्य की दवाइयां खरीदी जा चुकी है मगर अस्पतालों में नहीं पहुंच सकी. अस्पतालों द्वारा नहीं मांगे जाने के बावजूद कुछ दवाइयां एडवांस में खरीदी गई. इसके तहत एंटी करप्शन ब्यूरो ने दिल्ली सरकार की दवा खरीद में लग रहे आरोपों की जांच के लिए आदेश दे दिए हैं. एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम दिल्ली में कई जगहों पर छापेमारी कर रही है.

तो वही एंबुलेंस घोटाले के बारे में बात करते हुए कपिल मिश्रा ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में जो एंबुलेंस खरीदी गई है उसमें प्रत्येक की कीमत 23 लाख रुपए थी जबकि बाजार में दूसरी कंपनियां यही एंबुलेंस 10 लाख रुपए में दे रही हैं ऐसे में सरकार ने महंगी डील क्यों कि? दिल्ली सरकार का दावा था कि यह सभी एंबुलेंस फायर प्रूफ हैं. मगर अब तक इनमें से चार जल चुकी है. उन्होंने ट्रांसफर और पोस्टिंग घोटाले पर बात करते हुए कहां कि यहां नियमों कायदों को ताक पर रख दिया गया, जूनियर लोगों को एमएस बना दिया गया. उन्होंने दावा किया कि 30 एमएस की नियुक्तियों में गड़बड़ी हुई है. आपको बता दें कि दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन हैं.
कपिल का एक और आरोप गाड़ियों में लगाई गई नकली सीएनजी किट
कपिल मिश्रा सीएनजी गाड़ियों को भी लेकर दिल्ली सरकार को कटघरे में खड़ा किया है. उन्होंने नये आरोप लगाते हुए कहा कि 10 हजार गाड़ियों में नकली सीएनजी किट्स लगाई गई है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि यह किट चीन की बनी है मगर इसे कनाडा का बता कर बेचा जाता है. जो कंपनी किट लगाने का काम करती है उसे दिल्ली सरकार द्वारा इजाजत प्राप्त है.
हवाला में लिप्त सत्येंद्र जैन के रिश्तेदार

राजनीति के इस काले दौर में आम आदमी पार्टी पर कपिल मिश्रा का एक और हमला हुआ है. इस बार फिर से आरोप सत्येंद्र जैन के ऊपर लगा, मगर उसकी आंच उनके रिश्तेदारों के ऊपर भी पड़ी है. कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया कि सत्येंद्र जैन के रिश्तेदारों की 56 कंपनियां है जो हवाला कारोबार से जुड़ी हैं. कपिल मिश्रा का कहना था कि लैंड पुलिंग स्कीम इन्हीं कंपनियों के पैसे से जमीन खरीदने के लिए बनाई गई थी. उन्होंने कहा कि इन सभी कंपनियों में सत्येंद्र जैन के ही रिश्तेदार ऊंची पोस्ट पर हैं. कोलकाता में इन कंपनियों द्वारा हवाला कारोबारी के पास पैसा पहुंचाया गया. कपिल यही नहीं रुके उन्होंने सत्येंद्र जैन पर यह भी आरोप लगाया क्यों उनके पास दो वोटर आई कार्ड है इन में से एक फर्जी है.
जनता दरबार में फरियादी का आना मना
आज तक अरविंद केजरीवाल जिस तरह की राजनीति करते आए हैं उन्हीं के सानिध्य में राजनीति सीखने वाले कपिल मिश्रा उन पर उसी तरीके से लगातार हमला कर रहे हैं. इस बार कपिल ने ट्विटर पर उन्हें घेरने की कोशिश की. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि वह केजरीवाल के घर जनता दरबार में जाएंगे.

पहले से की गई घोषणा के मुताबिक कपिल उनके आवास पर जनता दरबार में शामिल होने गए भी मगर पहले ही उन्हें पुलिस द्वारा रोक लिया गया. कपिल का कहना था की जनता दरबार में जाने से जब किसी जनता को रोका जाए तो इसकी कोई अहमियत ही नहीं रह जाती. जनता दरबार का क्या मतलब जब एक फरियादी से केजरीवाल ना मिलें. मीडिया के बीच अपनी बात रखते हुए कपिल ने कहा कि वह केजरीवाल और जैन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप के सिलसिले में अपनी फरियाद जनता दरबार में लेकर गए थे. वह दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र राम लीला मैदान में आयोजित किए जाने की मांग को लेकर आए थे. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के इतने गंभीर आरोप लगने के बाद मुख्यमंत्री को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं.

राह भटक गई आम आदमी पार्टी
वाकई क्या आपको नहीं लगता कि कपिल मिश्रा की मांग जायज है? किसी राज्य के मुख्यमंत्री पर जिस तरह के गंभीर आरोप लग रहे हैं वैसे में एक मुख्यमंत्री का दायित्व और नैतिक जिम्मेदारी बनती थी कि वह अपने पद से त्यागपत्र दे दें और आरोपों के जवाब में सामने आए मगर ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा. बड़े बड़े वादे, साफ सुथरी राजनीति और एक अलग राजनीति का उदाहरण प्रस्तुत करने आई आम आदमी पार्टी लगता है आज अपना रास्ता भटक चुकी है. आम आदमी पार्टी को जिस तरह की अद्भुत और ऐतिहासिक जीत प्राप्त हुई थी, लोगों का भारी जनादेश मिला था वह आज कहीं निराश होंगे. आज पार्टी कहीं बिखर सी गई है. मतदाताओं का विश्वास हिला है. बावजूद इन सबके आज अरविंद केजरीवाल और पार्टी की खामोशी मतदाताओं को, उनके चाहने वालों को उनसे दूर ही ले जाएगा. आज राजनीतिक पार्टियों की नैतिकता समाप्त होते जा रही है और चलन बना है कि आरोपों पर खामोश रहकर धीरे-धीरे माहौल की गर्माहट को शांत कर दिया जाए. वाकई इस तरह की बनती परिपाटी के कारण हमारा लोकतंत्र कमजोर हो रहा है. जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है. मगर तब भी कुछ अलग नहीं हो रहा.
कपिल-केजरीवाल विवाद में उलझी दिल्ली
वहीं दूसरी तरफ हो सकता है कपिल मिश्रा द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद और गलत हो मगर इस दशा में भी जरूरत यह थी कि मुख्यमंत्री सामने आकर इन आरोपों का जवाब देते. आज दिल्ली कपिल-केजरीवाल विवाद में उलझ कर रह गई है. अरविंद केजरीवाल पर नए-नए आरोप लग रहे हैं मगर केजरीवाल के पास इन आरोपों का जवाब देने का समय ही नहीं. ऐसे में आज जरूरत है कि हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने के लिए कुछ कड़े कदम उठाए जाएं. इन आरोपों की जांच जल्द से जल्द और आवश्यक रूप से करवाई जानी चाहिए. आरोप गलत पाए जाने पर या आरोप अगर सही साबित होते हैं तो दोनों ही स्थिति में सख्त सजा का प्रावधान किया जाना चाहिए जो आगे एक मिसाल बन सके.
-स्वर्णताभ
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Swarntabh Kumar 81
आज की राजनीति समाज के लिए चुनौती
दिन प्रतिदिन राजनीति का गिरता स्तर भारतीय राजनीति, भारतीय समाज और हमारे लोकतंत्र के लिए बेहद चिंता का विषय बनता जा रहा है. ऐसे में यह हमारे पूरे समाज के लिए चुनौती है कि हम कैसे इस भद्दी होती राजनीति में बदलाव ला पाएं. वोट की जो ताकत मतदाताओं को प्रदान की गई है आज वास्तविक अर्थों में उसे ताकत में बदलने की आवश्यकता है. हमें आज अपने अधिकारों के प्रति जवाबदेह होने की जरूरत है. चुनकर आए जनता के प्रतिनिधियों का एक दूसरे पर आरोप लगाना, भद्दी भाषा का इस्तेमाल करना, एक दूसरे से हाथापाई करना कई सवाल खड़े करता है और इसका जवाब भी हमें ही ढूंढना होगा.
आरोपों में घिरे केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उन्हीं के मंत्रिमंडल में कभी शामिल रहे कपिल मिश्रा विवाद भारतीय राजनीति में उत्पन्न शर्मशार करने वाली घटना है. इस विवाद को शुरू हुए लगभग एक महीना हो चुका है बावजूद इसके अभी तक हमने कोई ठोस कार्रवाई होते नहीं देखा. यह विवाद दिन-प्रतिदिन आरोपों के रूप में बढ़ता ही जा रहा है. ऐसे में इसके साथ कई अध्याय और भी जुड़ चुके हैं उनमें से एक लोकतंत्र का मंदिर माने जाने वाले लोकसभा और विधानसभा से जुड़ा मामला है.
कपिल मिश्रा पर चले लात और घूंसे
जीएसटी पर चर्चा को लेकर दिल्ली सरकार द्वारा बुलाई गई विधानसभा का विशेष सत्र कुछ और ही कहानी कहने को तैयार था. सत्र की शुरुआत होते ही अपनी मांगों का एक पोस्टर लेकर कपिल मिश्रा पहुंच गए. जिस पर विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें बैठने को कहा नहीं माने जाने पर अध्यक्ष ने विधानसभा से मार्शलों के द्वारा उन्हें बाहर किए जाने का निर्देश दिया. बाद में कपिल मिश्रा ने कहां कि उन्होंने पहले विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर बोलने के लिए 5 मिनट का वक्त मांगा था, मुख्यमंत्री से जुड़े घोटाले पर रामलीला मैदान में खुला विशेष सत्र बुलाने की मांग की थी. इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा में कुछ विधायकों ने मिलकर उनकी पिटाई की. मार्शलों द्वारा बाहर ले जाने के दौरान पीछे से कुछ विधायकों ने उन्हें लातों से भी मारा. उन्होंने इसके साथ यह भी आरोप लगाया कि उनकी पिटाई मनीष सिसोदिया के इशारे पर हुई इस दौरान केजरीवाल हंस रहे थे. इस मामले से जुड़े विजुअल्स को देखकर कपिल मिश्रा की बात बहुत हद तक सही भी लग रही है और ऐसा शायद पहली बार हुआ हो जब सदन के भीतर कुछ विधायक मिलकर किसी एक विधायक को पीटने में लगे हो. क्या इस तरह की घटना हमारे सविंधान की पवित्रता को कम नहीं करती?
कपिल का दावा दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में हुआ घोटाला
कपिल मिश्रा द्वारा अरविंद केजरीवाल पर लगाए गए आरोपों की फेहरिस्त में कुछ और नए आरोप भी जुड़े हैं मगर केजरीवाल की चुप्पी किसी मुख्यमंत्री पर इतने आरोप लगने के बाद भी हतप्रभ करता है. कपिल मिश्रा के नये आरोपों का एक और बम केजरीवाल पर फोड़ा है. उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में एंबुलेंस खरीद और दवा खरीद घोटाले के साथ-साथ ट्रांसफर और पोस्टिंग के घोटाले का आरोप भी लगाया है. कपिल मिश्रा के अनुसार दवाइयों की खरीद में 300 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है. इतने मूल्य की दवाइयां खरीदी जा चुकी है मगर अस्पतालों में नहीं पहुंच सकी. अस्पतालों द्वारा नहीं मांगे जाने के बावजूद कुछ दवाइयां एडवांस में खरीदी गई. इसके तहत एंटी करप्शन ब्यूरो ने दिल्ली सरकार की दवा खरीद में लग रहे आरोपों की जांच के लिए आदेश दे दिए हैं. एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम दिल्ली में कई जगहों पर छापेमारी कर रही है.
तो वही एंबुलेंस घोटाले के बारे में बात करते हुए कपिल मिश्रा ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में जो एंबुलेंस खरीदी गई है उसमें प्रत्येक की कीमत 23 लाख रुपए थी जबकि बाजार में दूसरी कंपनियां यही एंबुलेंस 10 लाख रुपए में दे रही हैं ऐसे में सरकार ने महंगी डील क्यों कि? दिल्ली सरकार का दावा था कि यह सभी एंबुलेंस फायर प्रूफ हैं. मगर अब तक इनमें से चार जल चुकी है. उन्होंने ट्रांसफर और पोस्टिंग घोटाले पर बात करते हुए कहां कि यहां नियमों कायदों को ताक पर रख दिया गया, जूनियर लोगों को एमएस बना दिया गया. उन्होंने दावा किया कि 30 एमएस की नियुक्तियों में गड़बड़ी हुई है. आपको बता दें कि दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन हैं.
कपिल का एक और आरोप गाड़ियों में लगाई गई नकली सीएनजी किट
कपिल मिश्रा सीएनजी गाड़ियों को भी लेकर दिल्ली सरकार को कटघरे में खड़ा किया है. उन्होंने नये आरोप लगाते हुए कहा कि 10 हजार गाड़ियों में नकली सीएनजी किट्स लगाई गई है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि यह किट चीन की बनी है मगर इसे कनाडा का बता कर बेचा जाता है. जो कंपनी किट लगाने का काम करती है उसे दिल्ली सरकार द्वारा इजाजत प्राप्त है.
हवाला में लिप्त सत्येंद्र जैन के रिश्तेदार
राजनीति के इस काले दौर में आम आदमी पार्टी पर कपिल मिश्रा का एक और हमला हुआ है. इस बार फिर से आरोप सत्येंद्र जैन के ऊपर लगा, मगर उसकी आंच उनके रिश्तेदारों के ऊपर भी पड़ी है. कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया कि सत्येंद्र जैन के रिश्तेदारों की 56 कंपनियां है जो हवाला कारोबार से जुड़ी हैं. कपिल मिश्रा का कहना था कि लैंड पुलिंग स्कीम इन्हीं कंपनियों के पैसे से जमीन खरीदने के लिए बनाई गई थी. उन्होंने कहा कि इन सभी कंपनियों में सत्येंद्र जैन के ही रिश्तेदार ऊंची पोस्ट पर हैं. कोलकाता में इन कंपनियों द्वारा हवाला कारोबारी के पास पैसा पहुंचाया गया. कपिल यही नहीं रुके उन्होंने सत्येंद्र जैन पर यह भी आरोप लगाया क्यों उनके पास दो वोटर आई कार्ड है इन में से एक फर्जी है.
जनता दरबार में फरियादी का आना मना
आज तक अरविंद केजरीवाल जिस तरह की राजनीति करते आए हैं उन्हीं के सानिध्य में राजनीति सीखने वाले कपिल मिश्रा उन पर उसी तरीके से लगातार हमला कर रहे हैं. इस बार कपिल ने ट्विटर पर उन्हें घेरने की कोशिश की. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि वह केजरीवाल के घर जनता दरबार में जाएंगे.
पहले से की गई घोषणा के मुताबिक कपिल उनके आवास पर जनता दरबार में शामिल होने गए भी मगर पहले ही उन्हें पुलिस द्वारा रोक लिया गया. कपिल का कहना था की जनता दरबार में जाने से जब किसी जनता को रोका जाए तो इसकी कोई अहमियत ही नहीं रह जाती. जनता दरबार का क्या मतलब जब एक फरियादी से केजरीवाल ना मिलें. मीडिया के बीच अपनी बात रखते हुए कपिल ने कहा कि वह केजरीवाल और जैन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप के सिलसिले में अपनी फरियाद जनता दरबार में लेकर गए थे. वह दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र राम लीला मैदान में आयोजित किए जाने की मांग को लेकर आए थे. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के इतने गंभीर आरोप लगने के बाद मुख्यमंत्री को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं.
राह भटक गई आम आदमी पार्टी
वाकई क्या आपको नहीं लगता कि कपिल मिश्रा की मांग जायज है? किसी राज्य के मुख्यमंत्री पर जिस तरह के गंभीर आरोप लग रहे हैं वैसे में एक मुख्यमंत्री का दायित्व और नैतिक जिम्मेदारी बनती थी कि वह अपने पद से त्यागपत्र दे दें और आरोपों के जवाब में सामने आए मगर ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा. बड़े बड़े वादे, साफ सुथरी राजनीति और एक अलग राजनीति का उदाहरण प्रस्तुत करने आई आम आदमी पार्टी लगता है आज अपना रास्ता भटक चुकी है. आम आदमी पार्टी को जिस तरह की अद्भुत और ऐतिहासिक जीत प्राप्त हुई थी, लोगों का भारी जनादेश मिला था वह आज कहीं निराश होंगे. आज पार्टी कहीं बिखर सी गई है. मतदाताओं का विश्वास हिला है. बावजूद इन सबके आज अरविंद केजरीवाल और पार्टी की खामोशी मतदाताओं को, उनके चाहने वालों को उनसे दूर ही ले जाएगा. आज राजनीतिक पार्टियों की नैतिकता समाप्त होते जा रही है और चलन बना है कि आरोपों पर खामोश रहकर धीरे-धीरे माहौल की गर्माहट को शांत कर दिया जाए. वाकई इस तरह की बनती परिपाटी के कारण हमारा लोकतंत्र कमजोर हो रहा है. जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है. मगर तब भी कुछ अलग नहीं हो रहा.
कपिल-केजरीवाल विवाद में उलझी दिल्ली
वहीं दूसरी तरफ हो सकता है कपिल मिश्रा द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद और गलत हो मगर इस दशा में भी जरूरत यह थी कि मुख्यमंत्री सामने आकर इन आरोपों का जवाब देते. आज दिल्ली कपिल-केजरीवाल विवाद में उलझ कर रह गई है. अरविंद केजरीवाल पर नए-नए आरोप लग रहे हैं मगर केजरीवाल के पास इन आरोपों का जवाब देने का समय ही नहीं. ऐसे में आज जरूरत है कि हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने के लिए कुछ कड़े कदम उठाए जाएं. इन आरोपों की जांच जल्द से जल्द और आवश्यक रूप से करवाई जानी चाहिए. आरोप गलत पाए जाने पर या आरोप अगर सही साबित होते हैं तो दोनों ही स्थिति में सख्त सजा का प्रावधान किया जाना चाहिए जो आगे एक मिसाल बन सके.
-स्वर्णताभ