Gautam Buddha Nagar
गौतमबुद्ध नगर की स्थापना 1997 में बुलंदशहर और गाजियाबाद शहर के ग्रामीण इलाकों को हटा कर की गई. गौतमबुद्ध नगर के अंतर्गत दादरी, बिसरख ब्लॉक और गाजियाबाद से सटे कुछ इलाके आते हैं. 1442 किमी तक फैले इस इलाके में तकरीबन 423 गांव हैं.इतिहासइस जिले का एक बहुत ही स्वर्णिम इतिहास रहा है. ऐसा माना जाता है कि त्रेतायुग यानि रामायण काल में रावण के पिता विसेस्वा ऋषि का जन्म बिसरख में हुआ था. दनकौर की इस पावन भूमि में द्वापर युग यानि महाभारत काल में द्रोणा
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Reference data & background — source: Census 2011 & editorial notes, may be outdated
गौतमबुद्ध नगर की स्थापना 1997 में बुलंदशहर और गाजियाबाद शहर के
ग्रामीण इलाकों को हटा कर की गई. गौतमबुद्ध नगर के अंतर्गत दादरी, बिसरख ब्लॉक और गाजियाबाद से सटे कुछ इलाके आते हैं. 1442 किमी तक फैले इस इलाके में तकरीबन 423 गांव हैं.
इतिहास
इस जिले का एक बहुत ही स्वर्णिम इतिहास रहा है. ऐसा माना जाता है कि त्रेतायुग यानि
रामायण काल में रावण के पिता विसेस्वा ऋषि का जन्म बिसरख में हुआ था. दनकौर की इस
पावन भूमि में द्वापर युग यानि महाभारत काल में द्रोणाचार्य का आश्रम था, जहां पर कौरवों और पांडवों ने अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा प्राप्त की थी. एकलव्य, जो
कि द्रोणाचार्य के शिष्य थे उनका संबंध भी इसी स्थान से था.
इस भूमि से बहुत से लोग राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम से सक्रिय रूप से जुड़े
हुए थे. श्री गोपी चंद, श्री राम नाथ, श्री हरशरण सिंह आदि कुछ नाम इसमें
शामिल हैं. यहां तक कि भगत सिंह, सुख देव, एन राजगुरु ने स्वतंत्रता संग्राम के
दौरान छुपने के लिए नोएडा-ग्रेटर और नोएडा एक्सप्रेस वे का सहारा लिया था और बाद
में यहीं से उन्होंने विधानसभा पर बम हमले की योजना बनाई.
जनसांख्यिकीय
उत्तर प्रदेश के जनगणना संचालन निदेशालय द्वारा गौतम बुद्ध नगर का आधिकारिक
जनगणना विवरण जारी किया गया, जिसके अनुसार साल 2011 में गौतम बुद्ध नगर की जनसंख्या 1,648,115 थी. जिनमें से पुरुषों की आबादी 890,214 और महिलाओं की संख्या 757,901 बतायी गयी.इससे पहले 2001 की जनगणना में गौतम बुद्ध नगर की
आबादी 1,202,030 थी, जिनमें पुरुषों की संख्या 652,819 और महिलाओं की संख्या 549,211 थी. इससे स्पष्ट होता है कि 2001 की जनगणना के बाद जिले की जनसंख्या
में करीब 4 लाख 46 हजार का इजाफा हुआ. आंकड़े को प्रतिशत
में देखें तो 2001 की तुलना में साल 2011 में 37.11 प्रतिशत जनसंख्या वृद्धि हुयी. वहीं एक नजर डालें वर्ष 1991 की जनसंख्या पर तो लगभग 43.36 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.
कृषि एवं सिंचाई
इस जिले में आजिविका का मुख्य स्रोत कृषि माना जाता है. गौतमबुद्ध नगर का
विस्तार 1997 में हुआ. राजधानी दिल्ली के पास होने के बावजूद यहां कृषि अधिक मात्रा में की
जाती है. प्रमुख फसलों में गेहूं, चावल और गन्ना आते हैं तो वहीं कुछ
क्षेत्रों में बाजरा भी लगाया जाता है. हालांकि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में
जीविकोपार्जन हेतु औद्योगिक श्रमिक, तकनीकी, इंजीनियरिंग और प्रबंधन आदि सेवाएं भी
उपलब्ध है.
भौगोलिक ढांचा
जिला गौतम बुद्ध नगर उत्तर प्रदेश के पश्चिम में दिल्ली और गाजियाबाद के पास
स्थित है. गौतमबुद्धनगर भारत की दो मुख्य नदियों गंगा और यमुना के बीच बसा है.
जिले की उत्तर दिशा में गाजियाबाद और दिल्ली की सीमाएँ, दक्षिण में अलीगढ़, पूर्व में बुलंदशहर और हरियाणा राज्य से पश्चिमी सीमा मिलती है. रेतीली और
बालू मिट्टी के कारण यहां की मुख्य फसलें गेहूं, चावल और गन्ना हैं तथा जिले का कुल
क्षेत्रफल 1442 वर्ग किमी है.
प्रशासनिक ढांचा
नोएडा एनसीआर, गौतमबुद्ध नगर के अंतर्गत आता है. नोएडा और ग्रेटर नोएडा को
भारत में बड़े औद्योगिक हब के रूप में देखा जाता है. देवू मोटर, सीएल, बीपीएल, एलजी, एचसीएल आदि कंपनियों के कारण
औद्योगीकरण जिले के अन्य क्षेत्रों में भी हो रहा है. आर्थिक संरचना की दृष्टि से
जिला केवल राज्य स्तर पर ही नहीं अपितु राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण है. उत्तर
प्रदेश के कुल राजस्व का 25% गौतमबुद्ध नगर से प्राप्त किया जाता
है.
गौतमबुद्ध नगर के अंतर्गत 3 तहसीलें आती हैं- दादरी, गौतमबुद्ध नगर व जेवर. तहसीलों को विकासखंडों में विभाजित किया गया है. दनकौर
सदर विकास खंड के अंतर्गत आता है. बिसरख और दादरी विकासखण्ड दादरी तहसील के
अंतर्गत ही आते हैं. जेवर का विकास खंड स्वत: जेवर तहसील में ही है.
जल प्रणाली व्यवस्था
गौतमबुद्ध नगर में जल निकासी मुख्य रूप से यमुना व यमुना की सहायक नदियों -
हिंडन और भूरीया नदी की सहायता से होता है. इन सभी नदियों का बहाव दक्षिणावृति
होता है. सामान्यतः ये धाराएँ घुमावदार रूप से एक संकीर्ण बाढ़कृत मैदान की ओर
प्रवाहित हो जाती हैं.
गौतमबुद्ध नगर में मुख्य रूप से लघु सिंचाई होती है. जिनमें मुख्य तौर पर
ट्यूबवेल, कुएं आदि का प्रयोग सिंचाई के रूप में होता है. इसके साथ ही भूमिगत जल सिंचाई
प्रणाली अथार्त नहरों का भी पर्याप्त मात्रा में उपयोग किया जा रहा है. जिले के
सांख्यिकीय रिकॉर्ड के अनुसार, कुल सिंचित क्षेत्र के 10.1% क्षेत्र में 9141 हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई नहरों
द्वारा की जाती है, जबकि 89.9% क्षेत्रफल वाले कुल 81484.0 हेक्टेयर क्षेत्र में लघु सिंचाई संरचनाओं द्वारा सिंचाई की जाती है.
जलवायु एवं तापमान
जिले की जलवायु उप-आर्द्र है, जिसमें विशेष रूप से गर्म और ठंडी जलवायु पाई जाती है. फरवरी के बाद मई तक तापमान में निरंतर वृद्धि होती है, और तापमान अधिकतम 48 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है. मई-जून के महीनों को आमतौर पर सर्वाधिक गर्म माना जाता है.
सिकंदराबाद के पास वर्षा मापक स्टेशन के अनुसार जिले का वार्षिक वर्षा दर 700.6 मिमी (1901-1970) अनुमानित किया गया है. अधिकतम वर्षा दर मानसून अवधि के दौरान यानी जून से सितंबर में 600 मिमी होती है, जो वार्षिक वर्षा का 85.7% है तथा अगस्त माह में सर्वाधिक वर्षा होती है, जिसका दर लगभग 205.8 मिमी है.
शिक्षा-
मीडिया एवं मनोरंजन-
गौतमबुद्ध नगर में कई बड़े भारतीय सीरियल बन चुके हैं. फिल्मों की बात करें तो ये भारतीय सिनेमा के लिहाज से भी उचित स्थान रहा है. मीडिया हब के रूप में आगे बढ़ते इस शहर में न्यूज नेटवर्क18, ज़ी न्यूज, टीवी टुडे, इंडिया टीवी, न्यूज एक्स आदि के भी ऑफिस हैं.
धार्मिक स्थल-
ऐतिहासिक एवं पौराणिकता का जीवित उदाहरण इस
जिले में मौजूद है. यह खासियत ही इस शहर को आकर्षण का केन्द्र बनाता है. इनमें से
एक है नोएडा का इस्कॉन मंदिर. भगवान श्री कृष्ण का यह भव्य मंदिर विश्व भर में
भगवान कृष्ण की आस्था का प्रतीक है. जुलाई 1966
में भक्तिवेदांत स्वामी सरिला
प्रभुपदा ने इसकी शुरूआत की थी. परिवार के साथ छुट्टियां मनाने का यह बेहतर स्थान
है. आराम एवं लोगों की सुविधा के लिए बेहतर इंतजामों के साथ मंदिर का प्रांगण
भाव-विभोर करने वाला है. मंदिर करीब 500
मिलियन लोगों को सेवा और 110 शुद्ध शाकाहारी रेस्ट्रां को भी सहयोग कर चुका है. इस्कॉन मंदिर का वातावरण मन
को शांति प्रदान करता है. यह मंदिर शाकाहारी भोजन को प्रोत्साहन देने के साथ 54 शिक्षा संस्थान एवं 65 गांवों का भी प्राकृतिक संरक्षण कर रहा है.
शहर में इस्कॉन के अलावा और भी मंदिर हैं, जो पौराणिकताओं के अनुसार लगभग 1000 वर्ष पुराने हैं. यहां स्थित 100 साल पुराने स्वयंभू शिवलिंग की मान्यता है कि यहां रावण और उनके पिता जी पूजन करते थे. यह शिवलिंग ढाई फीट ऊपर तक उभरी है. बिसरख गांव में मौजूद यह मंदिर भी आस्था का केन्द्र बनता है. यहां रावण का मंदिर भी 2 करोड़ की लागत के साथ बन रहा है. 42 फीट की ऊंचाई तक बना यह मंदिर भी आकर्षण का केन्द्र बनता है.
प्रमुख पर्यटन स्थल
गौतमबुद्ध नगर के प्रमुख स्थलों में पार्क और सेंचुरी आती हैं. जहां प्रकृति
से जुड़ा महसूस कर सकते हैं. गौतमबुद्ध नगर नोएडा के पास स्थित है, इस कारण से यहां के पर्यटन स्थल नोएडा और गाजियाबाद के पास ही हैं.
सिटी पार्क
सिटी पार्क यहां घूमने के लिए सबसे अच्छा स्थान है जहां परिवार के साथ जाकर अच्छा और यादगार समय बिताया जा सकता है और हरियाली की दृष्टि से
भी यह पार्क मन को शान्ति की अनुभूति कराता है।
स्टेलर चिल्ड्रन म्यूज़ियम
स्टेलर चिल्ड्रन्स म्यूज़ियम एक इंटरेक्टिव प्ले-आधारित म्यूज़ियम है, जिसे शिकागो के विशेषज्ञों द्वारा डिज़ाइन किया गया है. इस म्यूज़ियम में
बच्चों के लिए खेलों के आधार पर काफी सारी प्रदर्शनियां लगाई गयी हैं, जिससे
बच्चें खेल-खेल में ही बहुत कुछ सीख पाएं. यह म्युजियम कल्पनाशील व्यक्तित्व को
उभारता है.
वंडर वाटर पार्क
वर्ल्ड ऑफ वंडर नोएडा के सबसे बेहतरीन पार्कों में से एक है. परिवार के साथ
घूमने या बच्चों के जन्मदिन पार्टी के लिए यह अपने आप में ही एक परिपूर्ण स्थान है,
जहाँ पर तरह तरह के झूले व फूड कोर्ट मौजूद हैं. वाटर पार्क होने के कारण यह
विशेषत: गर्मियों के मौसम में लोगों के मध्य अत्याधिक लोकप्रिय है.
स्तूप 18 आर्ट गैलरी
स्तूप आर्ट गैलरी भारतीय कलाकारों की कुछ महान कलाकृतियों को प्रदर्शित करती
है. यदि आप एक कला प्रेमी हैं, तो यह आपके लिए सबसे उपयुक्त स्थान
है. यहां पर दूर-दूर से आए लोग कलाकृतियों की सराहना तो करते ही हैं साथ ही कोई
कलाकृति पसंद आ जाये तो उसे खरीद भी लेते हैं.
वनस्पति उद्यान
बॉटनिकल गार्डन में देश में सबसे विशिष्ट पौधों की ढेरों संख्या है. यह उद्यान
पूरी तरह से शांत प्रकृति, पौधों और फूलों की दुर्लभ प्रजातियों
के साथ मनोरम दृश्य को प्रस्तुत करता है. यहां 'कैक्टस हाउस' नाम का एक छोटा ग्रीनहाउस है, जिसमें विभिन्न प्रकार के कैक्टस की प्रजाति मौजूद हैं.
ओखला अभयारण्य
ओखला पक्षी अभयारण्य यमुना नदी के बैराज में एक पक्षी अभयारण्य है. यह
गौतमबुद्ध नगर में दिल्ली-उत्तर प्रदेश राज्य की सीमा पर स्थित है. यहां 300 से अधिक पक्षियों की प्रजाति के जलपक्षी पाए जाते हैं. 1990 में यमुना नदी पर 3.5 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को वन्यजीव
संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक
पक्षी अभयारण्य के रूप में चिन्हित किया गया था. यह स्थल उस बिंदु पर केन्द्रित है, जहां नदी उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती है
संदर्भ
https://www.census2011.co.in/data/district/512-gautam-buddha-nagar-uttar-pradesh.html
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