Vikrant Tongad
Tilapta Karanwas(Gautam Buddha Nagar-Dadri-201306)परिचयविक्रांत तोंगड़ पर्यावरण संरक्षणवादी हैं. यह एक ऐसे प्रकृति प्रेमी या कह लीजिये जुनूनी शख्स हैं जो ना सिर्फ पर्यावरण को बचाने के लिए काम कर रहे हैं बल्कि अपना पूरा वक्त ही प्रकृति के लिए समर्पित किया हुआ है. विक्रांत सोशल एक्शन फॉर फारेस्ट एंड ए
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परिचय
विक्रांत तोंगड़ पर्यावरण संरक्षणवादी हैं. यह एक ऐसे प्रकृति प्रेमी या कह लीजिये जुनूनी शख्स हैं जो ना सिर्फ पर्यावरण को बचाने के लिए काम कर रहे हैं बल्कि अपना पूरा वक्त ही प्रकृति के लिए समर्पित किया हुआ है. विक्रांत सोशल एक्शन फॉर फारेस्ट एंड एनवायरनमेंट नामक गैर सरकारी संगठन के अध्यक्ष हैं. सीसीएस विश्वविद्यालय, मेरठ और दिल्ली यूनिवर्सिटी से से पढ़ें विक्रांत अपने शिक्षा के दिनों से ही समाज सेवा के कार्य के प्रति गंभीर रहे हैं. पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं के प्रति इनकी अथाह जिज्ञासा ने इन्हें पर्यावरणीय विश्लेषक के रूप में कार्य करने के लिए प्रेरित किया. 2010 से ही विभिन्न वातावरणीय मुद्दों से जुडकर समाज सेवा के लिए तत्परता से कार्य कर रहे हैं.
एनजीओ सोशल एक्शन फॉर फारेस्ट एंड एनवायरनमेंट (SAFE) के माध्यम से विभिन्न मुद्दों को उठाया
वर्ष 2013 में विक्रांत के द्वारा एनजीओ SAFE (Social Action for Forest & Environment ) की नींव रखी गई, जिसके माध्यम से इन्होंने बहुत सी मुहिम चलाई. जिला गौतम बुद्ध नगर में बिल्डर्स द्वारा भूजल का अवैध दोहन रुकवाने में SAFE का योगदान अतुलनीय रहा, जिसके तहत NGT के समक्ष याचिका दायर की गयी कि निर्माण कार्य के दौरान भूजल का दोहन न किया जाए. इसी याचिका के कारण 2013 में NGT ने भूजल दोहन पर रोक लगा कर बिल्डर्स को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का जल निर्माण कार्यों में उपयोग करने की अनुमति दी. SAFE के अंतर्गत दिल्ली एनसीआर के विभिन्न गावों व विद्यालयों में अबतक 100 से अधिक जल चौपाल कार्यक्रमों का आयोजन किया जा चुका है. इसके साथ ही संस्था द्वारा निर्मित वाटर डॉक्यूमेंट्री भी विशेष तौर पर सराही गयी. भूजल सेना के सदस्य के रूप में भी विक्रांत जिला गौतम बुद्ध नगर में 2017 से कार्यरत हैं.
वायु प्रदूषण मुद्दे के अंतर्गत स्ट्रा बर्निंग विषय पर गहन शोध
शीतकालीन ऋतु में उत्तर भारत में फैलने वाले वायु प्रदूषण के मुख्य कारण किसानों द्वारा पराली जलाना है और इस विषय पर विक्रांत ने गहन रिसर्च के माध्यम से न केवल कारणों का पता लगाया बल्कि इससे जुड़े उपायों पर भी ध्यान केन्द्रित करने का प्रयास किया. उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को दी गयी गलत सूचना, सरकारी लापरवाही व मशीनों के अत्यधिक प्रयोग को पराली जलाने का प्रमुख कारण मानते हुए सरकार से अनुरोध किया कि वे किसानों को अन्य विकल्प प्रदान करने की ओर अग्रसर हों तथा किसानों को समझाया कि पराली को रिसोर्स की भांति उपयोग में लायें. इसके साथ ही उन्होंने बताया की स्ट्रा बर्निंग से भूमि की उर्वरकता बढ़ती नहीं अपितु घटती है. उनके अति प्रयासों के कारण ही NGT ने वर्ष 2015 से परली जलाने पर रोक लगा रखी है.
हिंडन नदी के नवीनीकरण में सहयोग
नदियों को जीवन मानते हुए विक्रांत अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर हिंडन नदी के किनारों पर अवैध निर्माणकार्य को लेकर कई याचिकाएं डाल चुके हैं, इन्होंने गौतम बुद्ध नगर के किसानों को प्रेरित किया कि वे हिंडन के किनारे आर्गेनिक खेती को बढ़ावा दे और वृक्षारोपण के माध्यम से हिंडन भूजल रिचार्ज पर भी जोर दिया. हिंडन के नवीनीकरण से जुड़ी विशेष कमिटी के सदस्य के रूप में विक्रांत द्वारा नदी किनारों की साफ़ सफाई, अतिक्रमण पर रोक, सीवेज के नदी में गिरने पर रोक आदि की मांग की गयी. इसके अतिरिक्त हिंडन से जुड़े तालाबों को पुनर्जीवन देने की भी पुरजोर कोशिश उनके द्वारा जारी है.
निर्मल भारत अभियान को नवदिशा प्रदान की
एक प्राइवेट कंपनी की सहायता से विक्रांत ने गांवों में बहुत सी टॉयलेट्स का निर्माण करवा कर स्वच्छ भारत अभियान के नारे को व्यवहारिकता प्रदान की. इसके साथ ही स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर वृक्षारोपण के कार्य को पूर्ण किया, वृक्षों की अवैध कटाई को लेकर भी वे बेहद गंभीर हैं, और इसके लिए अन्य कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर NGT, सुप्रीम कोर्ट आदि में याचिकाएं दायर करते रहते हैं. सूरजपुर, दादरी, धनौरी आदि प्रदेशों की सुरक्षा के लिए भी विक्रांत विभिन्न स्तरों पर कार्य कर रहे हैं.खेती व स्वास्थ्य सम्बंधी मुद्दों को महत्व देकर वे एक विकसित देश के निर्माण के लिए उत्सुक हैं.
गंगा जल संरक्षण के प्रति गंभीर रुझान
गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए अन्य पर्यावरणविदों के साथ मिलकर विक्रांत द्वारा वर्ष 2014 में सिंभावली शुगर मिल पर कोर्ट द्वारा 5 करोड़ का जुर्माना लगवाया गया. ज्ञात हो कि हापुड़ की इस कथित मिल द्वारा गंगा नदी में प्रत्यक्ष गंदगी छोड़ी जा रही थी, जो गंगा डॉलफिन के लिए भी खतरा बन चुकी थी और यह क्षेत्र गंगा की इको सेंसिटिव जोन के अंतर्गत भी नामांकित था. इसके अतिरिक्त ऋषिकेश में गंगा किनारे अवैध कैम्पिंग तथा अवैध रिवर राफ्टिंग पर भी रोक लगाने की मुहिम विक्रांत द्वारा अन्य सामाजिक विश्लेषकों के साथ मिलकर चलाई गयी.
केवल गंगा ही नहीं अपितु देश भर में विक्रांत द्वारा जल संरक्षण के प्रति अभियान चलाये जाते रहें हैं, इनका पहला सामाजिक कार्य ही जल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना था. विक्रांत का जुझारू व्यक्तित्व ही था कि अपने गाँव की एक छोटी सी जल रैली से शुरुआत करके आज वे देश भर में लोगो को जागरूक करने का जिम्मा उठाए हुए हैं. जल संकट से ग्रस्त राज्यों में वे गहन शोध के माध्यम से कारणों का पता लगाते हैं और इससे जुड़े उपायों की पहल करते हैं.इनका मानना है कि भूजल संरक्षण के प्रति सरकारी योजनाओं में बढ़ोतरी होनी अति आवश्यक है.
वर्तमान में SAFE के संस्थापक के रूप में केवल स्थानीय निवासियों की सहायता से विक्रांत पर्यावरण सम्बंधी अनगिनत मुद्दों पर कार्य करते हुए निरंतर आगे बढ रहे हैं और समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए जागरूक युवा की मिसाल बनकर देश को विकसित बनाने की और अग्रसर हैं.
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