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27 मार्च, से 4 अप्रैल, 2011 एक संक्षिप्त रिपोर्टयात्रा एक दृष्टि में :लोकभारती उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित लगभग 25 सदस्यों द्वारा जिनमें वैज्ञानिक, इंज

Gomti River and Gomti Riverfront Lucknow - Analysis on Restoration and Development

Gomti River and Gomti Riverfront Lucknow - Analysis on Restoration and Development Gomti Ganga Yatra

ज़िला कनेक्ट
ByRakesh Prasad Rakesh Prasad   {{descmodel.currdesc.readstats }}

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27 मार्च, से 4 अप्रैल, 2011 एक संक्षिप्त रिपोर्ट

यात्रा एक दृष्टि में :


लोकभारती उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित लगभग 25 सदस्यों द्वारा जिनमें वैज्ञानिक, इंजीनियर्स, पर्यावरणविद, विविध विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार, छायाकार एवं एक दर्जन से अधिक सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं के सहयोग से गोमती-गंगा यात्रा 27 मार्च, 2011 को प्रातः माधौ टाण्डा पीलीभीत से आरंभ होकर शाहजहांपुर, लखीमपुर, हरदोई सीतापुर, बाराबंकी, सुल्तानपुर जौनपुर आदि 13 जिलों से होते हुए 960 कि.मी. की यात्रा के बाद वाराणसी के पास कैथी घाट में मार्कंडेश्वर महादेव आश्रम के निकट गोमती-गंगा संगम पर 3 अप्रैल को सम्पन्न हुई। यात्रा के दौरान गोमती व गोमती में मिलने वाली 22 से अधिक नदियों व धाराओं के संगमों पर विशेष रूप से सघन संपर्क विविध पहलुओं के अध्ययन व जागरुकता के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनके माध्यम से 250 से अधिक गाँवों के लगभग 10,000 जागरूक नागरिकों, इंजीनियरों, शिक्षकों, महिलाओं एवं महाविद्यालयीन छात्रों ने बड़े उत्साह से भाग लिया, जिसमें 45 से अधिक स्थानों पर श्रमदान, सभाएं एवं गोष्ठियां आयोजित कर स्थानीय लोगों के सहयोग से 30 गोमती मित्र मंडलों का गठन किया गया। इनमें 350 से अधिक लोगों ने स्वेच्छा से अपने सहयोग द्वारा गोमती पुनरुद्धार का संकल्प लिया। 

यात्रा के दौरान देखने में आया कि पीलीभीत जिले के लगभग 25 कि.मी. क्षेत्र में गोमती का प्रवाह अनेक स्थानों पर खेतों में विलीन होकर अंतर-भूधारा के रूप में बह रहा है। पीलीभीत के एकोत्तरनाथ से गोमती की धारा में जहां निरंतरता आती है, वहां भी गोमती धारा के निकटवर्ती जंगल समाप्त हो रहे हैं तथा उसके किनारे तक धान और गन्ने की अधिक पानी वाली खेती हो रही है व अत्यधिक जल दोहन के कारण भूजल स्तर 20 से 30 फुट तक गिर गया है, जिससे गोमती जल के मूल स्रोत सूखने लगे हैं या उनका जल प्