नाम-
विशम्भर सिंह
पद-
विधायक (सपा),बबेरू (बांदा),
उत्तर प्रदेश
नवप्रर्वतक कोड- 71188326
परिचय
विशंभर सिंह यादव भारत के उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित राजनीतिक नेता हैं, जो समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ प्रतिनिधि हैं। वे उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य के रूप में बबेरू (233) विधानसभा क्षेत्र, जिला-बांदा से तीन बार चुनाव जीत चुके हैं और स्थानीय स्तर पर गहरी सामाजिक एवं राजनीतिक पहचान रखते हैं।
प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा
विशंभर
सिंह यादव का जन्म 1 जनवरी 1955 को पप्रेंदा गाँव, बांदा, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनके पिता का नाम स्व. महेश्वरी सिंह यादव था। जातिगत रूप से वे यादव समाज से संबंध रखते हैं, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख सामाजिक समूह है।
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा पोस्ट-ग्रैजुएट और एलएलबी (स्नातकोत्तर एवं विधि स्नातक) की डिग्री प्राप्त की। शिक्षा के दौरान ही वे छात्र राजनीति में सक्रिय रहे और यूनिवर्सिटी एवं कॉलेज स्तर पर नेतृत्व भूमिकाओं में रहे। उनकी पत्नी का नाम रमा यादव है, और उनके तीन पुत्र हैं — जिनमें से एक गौरव यादव की असमय मृत्यु की ख़बर भी मीडिया में आई थी।

राजनीतिक करियर की शुरुआत
विशंभर
सिंह यादव का राजनीतिक सफर छात्र जीवन से शुरू हुआ। उन्होंने 1980 में डीएवी इंटर कॉलेज, कानपुर में छात्र संघ अध्यक्ष के रूप में नेतृत्व भूमिका निभाई और 1981 में कानपुर विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष के तौर पर चुने गए। इस दौरान वे युवा राजनीति के बीच सक्रिय रहे और समाजवादी विचारधारा से जुड़े।
1980 के दशक में उन्होंने युवा लोकदल के राष्ट्रीय सचिव, तथा समाजवादी जनता पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री जैसे संगठित राजनीतिक दायित्व निभाए। इस तरह उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक मंचों पर खुद को स्थापित किया और आगे चलकर सपा से जुड़कर स्थिर नेतृत्व का मार्ग प्रशस्त किया।

विधान सभा प्रतिनिधित्व और चुनावों का सफर
विशंभर सिंह यादव ने अपने विधान सभा प्रतिनिधित्व की शुरुआत 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से की, जब वे पहली बार बबेरू क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। उसी प्रतिष्ठा को दोहराते हुए उन्होंने 2012 में भी यह सीट जीतकर लगातार दूसरी बार विधायक के रूप में प्रतिनिधित्व किया। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें तीसरे स्थान पर रहना पड़ा, लेकिन 2022 के चुनाव में उन्होंने फिर जीत हासिल की, जिसमें उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी अजय कुमार पटेल को लगभग 7393 मतों के अंतर से पराजित किया। बबेरू विधानसभा सीट के चुनावी परिवेश में उनकी यह जीत सपा के लिए महत्वपूर्ण रही, क्योंकि यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से प्रतिस्पर्धात्मक रहा है और यहां पर विभिन्न राजनीतिक दलों का प्रभाव रहा है।

वर्तमान पद एवं ज़िम्मेदारियाँ
विशंभर
सिंह यादव वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य हैं और बबेरू (233) निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्हें समाजवादी पार्टी की तरफ से टिकट मिला और उन्होंने स्थानीय स्तर पर विकास और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई है।
एक विधायक के रूप में उनकी ज़िम्मेदारियाँ क्षेत्र के विकास, विधायक निधि के उपयोग, स्थानीय प्रशासन के साथ योजना-क्रियान्वयन तथा जनता के दैनिक मुद्दों को विधानसभा में उठाने तक विस्तृत हैं। हालांकि सार्वजनिक रिकॉर्ड में उनके द्वारा संभाले गए सभी समिति कार्य या विभागीय ज़िम्मेदारियों का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है, यह ज्ञात है कि वे स्थानीय स्तर पर सक्रिय भूमिका रखते हैं।

विकास कार्य, पहलें और सार्वजनिक दावे
विशंभर
सिंह यादव ने अपने क्षेत्र में कालींजर दुर्ग और पर्यटन विकास जैसे विषयों पर पहल की है। उदाहरण के तौर पर उन्होंने बताया कि उन्होंने इस क्षेत्र को विकसित करने हेतु प्रशासन को 5 बीघा भूमि दान की, जिससे पर्यटक सुलभता तथा स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित हों।
उनका यह कदम क्षेत्रीय विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयासों का हिस्सा माना गया है, जिसे स्थानीय मीडिया में सकारात्मक रूप से रिपोर्ट किया गया है। वे सामाजिक मुद्दों, शिक्षा के महत्व और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर भी सार्वजनिक तौर पर विचार रखते हैं, जो उनके चुनावी अभियान के दौरान उद्धृत किये गए हैं।
निष्कर्ष – समग्र राजनीतिक आकलन
विशंभर
सिंह यादव उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के एक अनुभवी और पुरातन राजनीतिक नेता रहे हैं, जिनका राजनीति में लंबे समय से सक्रिय भूमिका रहा है। छात्र राजनीति से लेकर विधानसभा तक का उनका सफर स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि राजनीति में निरंतरता, समाजवादी विचारधारा के प्रति निष्ठा और स्थानीय स्तर पर जनता के मुद्दों को उठाने की क्षमता उनके राजनीतिक व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएं हैं।
उन्होंने
अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकासात्मक पहलों, सामाजिक संदेशों और स्थानीय कार्यों के माध्यम से अपनी पहचान बनाई है,
जबकि विवादों और कानूनी मामलों ने भी उनके सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बनाया है।
राजनीतिक
यात्रा अभी भी जारी है,
और आगामी चुनाव तथा विधान सभा कार्यपालिका में उनकी सक्रियता यह निर्धारित करेगी कि जनता और पार्टी के परिप्रेक्ष्य में उनका प्रभाव किस दिशा में बढ़ता है।
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