नाम- संजीव अग्रवाल
पद- विधायक(भाजपा),बरेली कैंट विधानसभा,(उ.प्र)
नवप्रर्वतक कोड- 71189085
परिचय
संजीव अग्रवाल उत्तर प्रदेश की (बरेली कैंट) विधानसभा सीट से विधायक हैं। वे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता के रूप में क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे 2017 और 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में इस सीट से निर्वाचित हुए। बरेली शहर के प्रमुख व्यावसायिक और शहरी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के कारण उनकी राजनीतिक भूमिका को शहरी विकास, आधारभूत संरचना और नागरिक सुविधाओं से जोड़कर देखा जाता है। उनकी सार्वजनिक छवि एक संगठनात्मक रूप से सक्रिय और क्षेत्रीय मुद्दों को उठाने वाले जनप्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत की जाती है।
प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा
संजीव अग्रवाल का जन्म बरेली जनपद में एक व्यवसायिक परिवार में हुआ। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध चुनावी शपथपत्रों के अनुसार, उन्होंने स्नातक स्तर तक शिक्षा प्राप्त की है राजनीति में सक्रिय होने से पूर्व वे व्यापार और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहे।
स्थानीय व्यापारिक संगठनों और सामाजिक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी का उल्लेख क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्टों में मिलता है। उनका सामाजिक आधार मुख्यतः शहरी मतदाताओं, व्यापारी वर्ग और मध्यमवर्गीय परिवारों के बीच विकसित हुआ बताया जाता है।

राजनीतिक करियर की शुरुआत
संजीव अग्रवाल का राजनीतिक सफर भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे से जुड़ा रहा। उन्होंने प्रारंभिक दौर में पार्टी के स्थानीय कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई। बरेली नगर क्षेत्र में भाजपा के विस्तार के दौरान वे संगठनात्मक गतिविधियों में प्रमुख रूप से देखे गए। समय के साथ उनकी पहचान एक प्रभावशाली स्थानीय नेता के रूप में उभरती नज़र आई।
2017 विधानसभा चुनाव
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017
में भाजपा ने उन्हें बरेली कैंट सीट से उम्मीदवार बनाया। उस चुनाव में भाजपा ने प्रदेश में व्यापक बहुमत प्राप्त किया और संजीव अग्रवाल ने भी उल्लेखनीय मतों के अंतर से जीत दर्ज की।
2022 विधानसभा चुनाव
2022
के विधानसभा चुनाव में उन्होंने पुनः इसी सीट से जीत हासिल की। आधिकारिक परिणामों के अनुसार, उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को महत्वपूर्ण अंतर से पराजित किया। सटीक मत प्रतिशत और जीत का अंतर निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है। उनकी लगातार दूसरी जीत को क्षेत्र में संगठनात्मक पकड़ और शहरी मतदाताओं के समर्थन से जोड़कर देखा गया।

वर्तमान पद एवं ज़िम्मेदारियाँ
संजीव अग्रवाल वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य हैं। वे Uttar Pradesh Legislative Assembly के सदस्य के रूप में विधानसभा सत्रों में भाग लेते हैं और क्षेत्रीय मुद्दों को सदन में उठाते हैं।
एक विधायक के रूप में उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हैं:
क्षेत्र की आधारभूत संरचना से जुड़े मुद्दों को उठाना, विधायक निधि के माध्यम से विकास कार्यों की अनुशंसा, स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी विधानसभा की विभिन्न समितियों में उनकी सदस्यता संबंधी जानकारी समय-समय पर आधिकारिक पोर्टल पर अद्यतन की जाती है।

विकास कार्य, पहलें और सार्वजनिक दावे
बरेली कैंट एक शहरी एवं व्यावसायिक क्षेत्र है, इसलिए यहां सड़क, जल निकासी, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और यातायात प्रबंधन जैसे मुद्दे प्रमुख रहते हैं। संजीव अग्रवाल की ओर से दावा किया गया है कि उनके कार्यकाल में सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों को गति दी गई। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कई आंतरिक मार्गों के चौड़ीकरण और नवीनीकरण की परियोजनाएं शुरू की गईं।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार विधायक निधि के अंतर्गत विभिन्न सामुदायिक भवनों, पार्कों और सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण को स्वीकृति दी गई। इसके अतिरिक्त, स्मार्ट सिटी परियोजना (यदि लागू क्षेत्र में) और नगर निगम की योजनाओं के समन्वय में भी उनकी भूमिका बताई जाती है। हालांकि, विपक्षी दलों द्वारा समय-समय पर विकास कार्यों की गति और गुणवत्ता को लेकर सवाल भी उठाए गए हैं। इन आरोपों के संबंध में भाजपा की ओर से विकास कार्यों के आंकड़े प्रस्तुत किए जाते रहे हैं।

आलोचनाएँ, विवाद और सार्वजनिक प्रतिक्रियाएँ
बरेली की स्थानीय राजनीति में चुनावी प्रतिस्पर्धा के दौरान विपक्षी दलों द्वारा विभिन्न मुद्दों पर आलोचना की जाती रही है। कुछ रिपोर्टों में शहरी समस्याओं जैसे ट्रैफिक जाम, जलभराव और अव्यवस्थित विकास को लेकर सवाल उठाए गए।
हालांकि, उनके नाम से जुड़ा कोई बड़ा राष्ट्रीय स्तर का विवाद व्यापक रूप से दर्ज नहीं पाया गया। जहाँ आलोचनाएँ सामने आईं, वहाँ भाजपा की ओर से विकास कार्यों और बजट आवंटन के आंकड़ों का हवाला देकर जवाब दिया गया।

निष्कर्ष – समग्र राजनीतिक आकलन
संजीव अग्रवाल का राजनीतिक करियर बरेली कैंट जैसे शहरी निर्वाचन क्षेत्र पर केंद्रित रहा है। लगातार दो बार विधायक चुने जाने से उनकी संगठनात्मक क्षमता और क्षेत्रीय समर्थन का संकेत मिलता है।
उनकी प्राथमिकताएँ शहरी विकास, आधारभूत संरचना और नागरिक सुविधाओं पर केंद्रित दिखाई देती हैं। हालांकि, किसी भी जनप्रतिनिधि की तरह उनके कार्यों का मूल्यांकन समय के साथ विकास परियोजनाओं के वास्तविक प्रभाव के आधार पर किया जाएगा। आगामी वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वे तेजी से बढ़ते शहरी दबाव और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों का किस प्रकार समाधान प्रस्तुत करते हैं।
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