नाम-
मनीषा अनुरागी
पद-
विधायक(बीजेपी ), राठ(
हमीरपुर), उत्तर प्रदेश
नवप्रर्वतक कोड- 71189500

परिचय
मनीषा अनुरागी उत्तर प्रदेश के हमीरपुर ज़िले की राठ विधानसभा सीट (संख्या 229) से विधायक हैं। वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता हैं और 2017 तथा 2022—दोनों विधानसभा चुनावों में इस सीट से निर्वाचित होकर विधानसभा पहुँचीं। बुंदेलखंड क्षेत्र की राजनीति में उनकी पहचान एक ऐसी महिला नेता के रूप में बनी है,
जो संगठनात्मक पृष्ठभूमि से निकलकर जनप्रतिनिधि की भूमिका तक पहुँची हैं।
राठ विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है और यहाँ सामाजिक न्याय, बुनियादी विकास तथा पलायन जैसे मुद्दे लंबे समय से राजनीति के केंद्र में रहे हैं। इस परिप्रेक्ष्य में मनीषा अनुरागी का राजनीतिक सफ़र क्षेत्रीय राजनीति के बदलते स्वरूप को भी दर्शाता है।

प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा
मनीषा अनुरागी का जन्म उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में हुआ। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार वे एक सामान्य सामाजिक पृष्ठभूमि से आती हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय विद्यालयों में हुई और आगे की पढ़ाई भी उन्होंने उत्तर प्रदेश में ही पूरी की।
उनकी शैक्षिक योग्यता स्नातक स्तर तक बताई जाती है। राजनीति में आने से पहले उनका जीवन पारिवारिक दायित्वों और सामाजिक परिवेश से जुड़ा रहा। वे उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करती हैं, जहाँ महिला भागीदारी पारंपरिक रूप से सीमित रही है, और इसी कारण उनकी राजनीतिक उपस्थिति को क्षेत्र में प्रतीकात्मक रूप से भी देखा जाता है।

राजनीति में प्रवेश और भाजपा से जुड़ाव
मनीषा अनुरागी का राजनीति में प्रवेश भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के माध्यम से हुआ। वे पहले पार्टी की स्थानीय इकाइयों से जुड़ीं और धीरे-धीरे महिला मोर्चा तथा अन्य संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय होती गईं।
भाजपा में उनका उभार उस दौर में हुआ जब पार्टी उत्तर प्रदेश में सामाजिक समीकरणों के विस्तार और महिला नेतृत्व को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही थी। बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र में, जहाँ विकास और सामाजिक न्याय के मुद्दे प्रमुख रहे हैं, मनीषा अनुरागी को एक ऐसे चेहरे के रूप में आगे बढ़ाया गया, जो स्थानीय समाज से जुड़ा हुआ था।

2017 विधानसभा चुनाव: पहली जीत
2017 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव राज्य की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। भाजपा ने भारी बहुमत के साथ सरकार बनाई और कई नई सीटों पर जीत दर्ज की। राठ विधानसभा सीट से मनीषा अनुरागी को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया।
चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की। यह जीत केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि बुंदेलखंड क्षेत्र में भाजपा की राजनीतिक पकड़ के विस्तार के रूप में भी देखी गई। पहली बार विधायक बनने के साथ ही मनीषा अनुरागी विधानसभा पहुँचीं और उन्होंने क्षेत्र के प्रतिनिधि के रूप में अपनी भूमिका निभानी शुरू की।

विधायक के रूप में पहला कार्यकाल (2017–2022)
पहले कार्यकाल में मनीषा अनुरागी का फोकस मुख्य रूप से बुनियादी विकास और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर रहा। राठ और आसपास के क्षेत्रों में प्रमुख समस्याएँ सड़क, पानी, स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी रही हैं।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों और सरकारी कार्यक्रमों के अनुसार, उनके कार्यकाल में:
ग्रामीण सड़कों के निर्माण और मरम्मत
पेयजल योजनाओं के विस्तार
उज्ज्वला योजना, आवास योजना और शौचालय निर्माण जैसे कार्यक्रमों का क्रियान्वयन
महिला स्वयं सहायता समूहों और सामाजिक योजनाओं को बढ़ावा
जैसे विषयों पर काम किया गया। हालांकि, बुंदेलखंड की भौगोलिक और आर्थिक चुनौतियों के कारण विकास की गति को लेकर आलोचनाएँ भी सामने आती रहीं।

2022 विधानसभा चुनाव और पुनः निर्वाचित होना
2022 के विधानसभा चुनाव में मनीषा अनुरागी ने एक बार फिर भाजपा के टिकट पर राठ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में मुकाबला अपेक्षाकृत कड़ा माना गया, लेकिन वे पुनः जीत दर्ज करने में सफल रहीं।
लगातार दूसरी बार विधायक चुने जाने को राजनीतिक विश्लेषकों ने व्यक्तिगत पहचान, पार्टी संगठन और केंद्र-राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभाव का संयुक्त परिणाम बताया। यह जीत उन्हें बुंदेलखंड क्षेत्र में भाजपा के स्थायी चेहरों में शामिल करती है।

दूसरा कार्यकाल: प्राथमिकताएँ और भूमिका
दूसरे कार्यकाल में मनीषा अनुरागी की भूमिका अपेक्षाकृत अधिक अनुभवजन्य रही है। इस चरण में उन्होंने:
पेयजल संकट
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की कमी
शिक्षा और छात्रवृत्ति योजनाओं
पलायन और रोजगार के अवसर
जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की बात कही। वे विधानसभा में प्रश्न पूछने और अपने क्षेत्र से जुड़े मामलों को सरकार के संज्ञान में लाने का प्रयास करती रही हैं।

राजनीतिक छवि और जनधारणा
मनीषा अनुरागी की छवि एक संगठन से निकली, अपेक्षाकृत शांत और अनुशासित नेता की रही है। वे बड़े विवादों से दूर रहती हैं और पार्टी लाइन के भीतर काम करने वाली नेता मानी जाती हैं।
समर्थकों का कहना है कि वे क्षेत्र में सरकारी योजनाओं की पहुँच बढ़ाने में सक्रिय रही हैं, जबकि आलोचक यह तर्क देते हैं कि बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्र में अपेक्षित बड़े बदलाव अभी भी नहीं दिखते। यह बहस स्थानीय राजनीति का हिस्सा बनी रहती है।

समग्र राजनीतिक आकलन
मनीषा अनुरागी का राजनीतिक सफ़र एक संगठनात्मक कार्यकर्ता से दो बार की विधायक बनने तक का है। यह यात्रा उत्तर प्रदेश की उस राजनीति को दर्शाती है,
जहाँ सामाजिक प्रतिनिधित्व, महिला नेतृत्व और संगठनात्मक मजबूती को महत्व दिया जा रहा है।
उनकी सबसे बड़ी ताकत पार्टी संगठन का समर्थन और क्षेत्रीय पहचान है, जबकि सबसे बड़ी चुनौती बुंदेलखंड की जटिल सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का समाधान है।

निष्कर्ष
राठ विधानसभा से विधायक मनीषा अनुरागी उत्तर प्रदेश की समकालीन राजनीति में एक स्थिर लेकिन अपेक्षाकृत कम प्रोफ़ाइल वाली नेता के रूप में जानी जाती हैं। उनका योगदान मुख्य रूप से क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और योजनाओं के क्रियान्वयन तक केंद्रित रहा है।
आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वे बुंदेलखंड क्षेत्र की पुरानी समस्याओं—जैसे पानी, रोजगार और पलायन—पर किस तरह प्रभावी हस्तक्षेप कर पाती हैं और अपने राजनीतिक अनुभव को किस दिशा में आगे बढ़ाती हैं।
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