नाम-
गौरी
शंकर वर्मा
पद-
विधायक(भाजपा), ओरई(जालौन), उत्तरप्रदेश
नवप्रर्वतक कोड- 71189482
परिचय
गौरी शंकर वर्मा उत्तर प्रदेश के जालौन ज़िले की ओरई विधानसभा सीट (221) से भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। वे 2017 से 2022 तक उत्तरप्रदेश विधान सभा के सदस्य (MLA)
रहे। ओरई विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है और बुंदेलखंड क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक राजनीति में इसका विशेष महत्व रहा है।
विधायक के रूप में गौरी शंकर वर्मा की पहचान एक ऐसे जनप्रतिनिधि के तौर पर बनी, जिनका राजनीतिक आधार स्थानीय संगठन, बूथ-स्तर की पकड़ और भाजपा के पारंपरिक मतदाता वर्ग पर केंद्रित रहा। उनका कार्यकाल राज्य में भाजपा सरकार के पहले पूर्ण बहुमत वाले शासनकाल के साथ जुड़ा रहा, जिससे उनकी भूमिका प्रशासनिक-राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा
गौरी शंकर वर्मा का जन्म 1 जुलाई 1964 को जालौन ज़िले के कोंच क्षेत्र में हुआ था। वे एक साधारण सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं, जहाँ स्थानीय स्तर पर मेहनत और सामाजिक जुड़ाव को महत्व दिया जाता रहा है।
उनके पिता का नाम हरिचरण वर्मा बताया जाता है। पारिवारिक जीवन में वे विवाहित हैं और उनकी पत्नी का नाम कृष्णा देवी वर्मा है। सार्वजनिक दस्तावेज़ों के अनुसार, गौरी शंकर वर्मा की औपचारिक शिक्षा कक्षा 10वीं तक रही है। शिक्षा सीमित होने के बावजूद, स्थानीय सामाजिक संपर्क, व्यावहारिक अनुभव और क्षेत्रीय मुद्दों की समझ उनके राजनीतिक जीवन की प्रमुख पूंजी मानी जाती रही है।

राजनीति में प्रवेश और शुरुआती सफर
गौरी शंकर वर्मा का राजनीति में प्रवेश किसी बड़े राजनीतिक परिवार या विरासत से नहीं, बल्कि स्थानीय संगठन और सामाजिक सक्रियता के माध्यम से हुआ। शुरुआती वर्षों में वे क्षेत्रीय समस्याओं, सामाजिक कार्यक्रमों और स्थानीय स्तर पर भाजपा की गतिविधियों से जुड़े रहे।
भाजपा संगठन में उनकी सक्रियता धीरे-धीरे बढ़ी और वे पार्टी के भरोसेमंद जमीनी कार्यकर्ता के रूप में पहचाने जाने लगे। इसी संगठनात्मक पृष्ठभूमि के चलते पार्टी नेतृत्व ने उन्हें ओरई जैसी महत्वपूर्ण और आरक्षित सीट से चुनावी राजनीति में उतारने का निर्णय लिया।
2017 विधानसभा चुनाव और विधायक बनना
2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव गौरी शंकर वर्मा के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुए। भाजपा ने उन्हें ओरई विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया। यह चुनाव राज्य की राजनीति में ऐतिहासिक माना जाता है,
क्योंकि भाजपा ने लंबे अंतराल के बाद पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई।
गौरी शंकर वर्मा ने इस चुनाव में अपने प्रतिद्वंद्वियों को हराकर जीत दर्ज की और पहली बार विधायक बने। उनकी जीत को कई विश्लेषकों ने भाजपा की संगठनात्मक ताकत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चले अभियान और स्थानीय स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं की सक्रियता से जोड़कर देखा।

विधायक के रूप में कार्यकाल (2017–2022)
विधायक बनने के बाद गौरी शंकर वर्मा ने उत्तर प्रदेश की 17वीं विधानसभा में ओरई क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। उनके कार्यकाल को मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं में देखा जाता है:
विधानसभा भूमिका
विधानसभा सत्रों में भागीदारी
क्षेत्रीय समस्याओं से जुड़े सवाल और ज्ञापन
सरकार की नीतियों के समर्थन में मतदान
हालाँकि वे राज्य स्तर पर किसी बड़े मंत्री पद या प्रमुख विधानसभा समिति के अध्यक्ष के रूप में सामने नहीं आए, लेकिन क्षेत्रीय विधायक के रूप में उनकी भूमिका सक्रिय रही।

विकास कार्य और क्षेत्रीय प्राथमिकताएँ
ओरई और आसपास का इलाका बुंदेलखंड क्षेत्र का हिस्सा है,
जहाँ पानी की कमी, कृषि संकट और रोजगार की समस्या लंबे समय से बनी रही है। गौरी शंकर वर्मा के कार्यकाल में जिन मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया, उनमें शामिल हैं:
सड़क और बुनियादी ढांचा:
स्थानीय सड़कों, संपर्क मार्गों और नगरीय सुविधाओं में सुधार की कोशिशें।
सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन:
प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, शौचालय निर्माण और बिजली कनेक्शन जैसी योजनाओं के स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन पर जोर।
सामाजिक कार्यक्रम:
दलित और वंचित वर्गों से जुड़े कार्यक्रमों में भागीदारी और प्रशासन से समन्वय।
इन कार्यों को लेकर समर्थकों का दावा रहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ क्षेत्र तक पहुँचाने में उन्होंने भूमिका निभाई, जबकि आलोचकों का मत रहा कि बुंदेलखंड की संरचनात्मक समस्याएँ अब भी बनी हुई हैं।

2022 चुनाव और इसके बाद
2022 के विधानसभा चुनाव में गौरी शंकर वर्मा को ओरई सीट से टिकट नहीं मिला या वे विजयी नहीं हो सके। इसके बाद यह सीट भाजपा के ही एक अन्य प्रत्याशी के पास चली गई। इसके साथ ही उनका विधायक कार्यकाल समाप्त हो गया।
हालांकि, चुनाव हारने या टिकट न मिलने के बाद भी वे पूरी तरह राजनीति से अलग नहीं हुए। स्थानीय स्तर पर उन्हें अब भी भाजपा के एक अनुभवी नेता और पूर्व विधायक के रूप में जाना जाता है।

सार्वजनिक छवि और राजनीतिक मूल्यांकन
गौरी शंकर वर्मा की सार्वजनिक छवि एक जमीनी, संगठन-आधारित नेता की रही है। वे न तो आक्रामक वक्तव्यों के लिए जाने गए और न ही मीडिया-केंद्रित राजनीति के लिए। उनका राजनीतिक प्रभाव मुख्यतः स्थानीय स्तर तक सीमित रहा।
समर्थकों के अनुसार, उन्होंने पार्टी और सरकार की नीतियों को ईमानदारी से क्षेत्र में लागू करने का प्रयास किया। वहीं आलोचकों का मानना है कि उनका कार्यकाल बुंदेलखंड जैसे कठिन क्षेत्र की समस्याओं के अनुपात में अपेक्षाकृत साधारण रहा।

निष्कर्ष – समग्र राजनीतिक आकलन
गौरी शंकर वर्मा का राजनीतिक जीवन उत्तर प्रदेश की उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है,
जो संगठन, स्थानीय पकड़ और पार्टी अनुशासन के बल पर राजनीति में आगे बढ़ी। ओरई से विधायक के रूप में उनका कार्यकाल भाजपा के सत्ता में सुदृढ़ होने के दौर से जुड़ा रहा।
भविष्य की राजनीति में उनकी भूमिका किस रूप में होगी, यह पार्टी की रणनीति और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। लेकिन इसमें संदेह नहीं कि ओरई विधानसभा के राजनीतिक इतिहास में उनका नाम एक पूर्व विधायक के रूप में दर्ज रहेगा।
tag on profile.





