नाम-
देवेन्द्र सिंह राजपूत
पद-
विधायक(बीजेपी),कासगंज,(उत्तरप्रदेश)
नवप्रर्वतक कोड- 71189431

देवेंद्र सिंह राजपूत — उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक मजबूत आवाज़
देवेंद्र सिंह राजपूत उत्तर प्रदेश के कासगंज विधानसभा क्षेत्र के अनुभवी और प्रभावशाली नेता हैं, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रतिनिधि के रूप में जनता की आवाज़ बने हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा संघर्ष, सामाजिक जुड़ाव और स्थानीय समस्याओं के समाधान के प्रयासों से भरी हुई है,
जिसने उन्हें क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है।
प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि
देवेंद्र सिंह राजपूत का जन्म 15 जनवरी 1971 को उत्तर प्रदेश के एटा जिले के गाँव नगला भँडारी, बहादुरपुर में हुआ। उनका परिवार एक कृषक पृष्ठभूमि से आता था,
जिसमें पारंपरिक मूल्यों, मेहनत और समुदाय के प्रति सेवा की भावना ऐसी शिक्षा दी गई कि उसने बचपन से ही उनके अंदर सामाजिक प्रतिबद्धता का बीज़ बोया।
उनकी प्रारंभिक शिक्षा गाँव के ही स्थानीय स्कूल से हुई और उन्होंने इंटरमीडिएट (12वीं) तक पढ़ाई पूरी की। औपचारिक शिक्षा सीमित रहने के बावजूद, उन्होंने कृषि, व्यवसाय और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण जीवन की बारीकियों को समझा और सार्वजनिक जीवन के लिए तैयार होने लगे। शिक्षा के साथ-साथ उनके जीवन में परिवार और समाज का योगदान उनके राजनीतिक दृष्टिकोण को मजबूत करता रहा।

वैवाहिक जीवन और पारिवारिक समर्थन
देवेंद्र सिंह राजपूत ने 20 जनवरी 1992 को कमलेश राजपूत से विवाह किया। इस दंपति के तीन बच्चे हैं —
एक पुत्र और दो पुत्रियाँ —
जो उनके निजी जीवन में स्थिरता और सहयोग का स्रोत रहे हैं। उनका परिवार हमेशा उनके राजनीतिक और सामाजिक योगदान का समर्थन करता रहा है,
जो उनके सार्वजनिक जीवन को निरंतर मजबूती प्रदान करता है।

व्यवसाय और सामाजिक जुड़ाव
राजपूत का पेशा कृषि, व्यापार और स्थानीय व्यवसायों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने न सिर्फ अपने खेतों में काम किया बल्कि गाँव-समाज के उत्थान के लिए स्थानीय आर्थिक गतिविधियों, छोटे व्यवसायों और कृषि सहयोग के माध्यम से लोगों को रोजगार और अवसर प्रदान करने का प्रयास किया। उनका यह कृषि-व्यवसाय और सामाजिक जुड़ाव उन्हें उनके क्षेत्र में जनप्रिय बनाता है।

राजनीतिक यात्रा — शुरुआत से विधायक तक
देवेंद्र सिंह राजपूत का राजनीतिक सफ़र भाजपा से जुड़कर शुरू हुआ। उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में अपने क्षेत्र में संगठन को मजबूत करने और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए काम करना शुरू किया। ग्रामीण और शहरी दोनों स्तरों पर लोगों से जुड़कर उन्होंने भाजपा की विचारधारा को जनता तक पहुँचाया और संगठनात्मक रूप से पार्टी की मजबूती में योगदान दिया।
उनके प्रयासों का प्रतिफल तब मिला जब उन्होंने 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में कासगंज विधानसभा क्षेत्र से भाजपा का टिकट प्राप्त किया और मतदाताओं का विश्वास जीतते हुए विजयी हुए। उसके बाद उन्होंने लगातार अपने क्षेत्र में सक्रियता दिखाई, स्थानीय मुद्दों को विधानसभा में उठाया और जनता से मिलने-समझने का काम जारी रखा।
2022
में भी उन्होंने भाजपा की ओर से कासगंज विधानसभा चुनाव में भाग लिया और अपने प्रतिद्वंद्वियों को बढ़त से हराया। उनकी इस झोली में जीत उनकी निरंतर जनता-सेवा की प्रतिबद्धता का परिणाम मानी गई।

विधायक के रूप में योगदान
विधायकी के दौरान राजपूत ने कई स्थानीय विकास परियोजनाओं की दिशा में काम किया। उन्होंने अपने क्षेत्र के गाँवों में सड़कों, पानी-बिजली सुविधाओं, कृषि संबंधी सुविधाओं और कच्चे मार्गों के सुधार के लिए आवाज़ उठाई। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यक्रम और शिक्षा-स्वास्थ्य सेवा के विस्तार को हमेशा प्राथमिकता दी।
उनका मानना है कि एक विधायक का मूल दायित्व जनता की समस्याओं को न सिर्फ सुनना है,
बल्कि उन समस्याओं का स्थायी समाधान ढूँढना भी है —
चाहे वह पानी की कमी, खराब सड़कों, बिजली संकट या कृषि संबंधी मुद्दों का सामना कर रहा हो।

सुरक्षा, नीतियाँ और राजनीतिक दृष्टिकोण
राजपूत सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक मुद्दों पर स्पष्ट नीति रखते हैं। उनका मानना है कि विकास की दिशा में प्रगति तभी संभव है जब शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और नागरिक सुविधाओं में संतुलन हो। उन्होंने युवा शक्ति को सशक्त बनाने के लिए तकनीकी शिक्षा और कौशल-प्रशिक्षण पर भी जोर दिया है।
आलोचनाएँ और कानूनी मुद्दे
राजपूत के राजनीतिक जीवन में आलोचनाओं और विवादों से भी अनभिज्ञ नहीं रहे। चुनावी घोषणा-पत्र में उन्होंने स्वयं स्वीकार किया है कि उनके खिलाफ दो आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनका सामना वे कानूनी प्रक्रिया में कर रहे हैं। यह राजनीतिक जीवन में प्रचलित एक आम चुनौती है,
जिसमें राजनीतिक अभिनेता अक्सर स्थानीय विवादों, जमीन-संपत्ति या सामाजिक मतभेदों के कारण कानूनी संघर्षों में उलझते हैं। हालांकि राजपूत ने इन मामलों का सामना कानून के तहत किया है और न्यायिक प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।

स्थानीय जनता के साथ संबंध
उनके निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता उन्हें एक मिलनसार, सुनी-समझी और उपलब्ध रहने वाले प्रतिनिधि के रूप में देखते हैं। चाहे वह गाँव में पंचायत बैठक हो,
सार्वजनिक सभा या स्थानीय कार्यक्रम, राजपूत जनता से सीधे संवाद करने और समस्याओं को समझने को प्राथमिकता देते हैं। इस कारण से उनकी पार्टी के प्रति निष्ठा और जनता के साथ जुड़ाव ने उन्हें दो बार विधायक बनवाया है।

निष्कर्ष: एक सशक्त प्रतिनिधि
देवेंद्र सिंह राजपूत उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक मजबूत और सक्रिय नेता के रूप में उभरे हैं। किसान-व्यवसायी पृष्ठभूमि से उठकर उन्होंने स्थानीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई है और जनता के अधिकारों, सुविधाओं तथा विकास के मुद्दों को उठाया है। उनके जीवन का संघर्ष, राजनीतिक अनुभव और जनता के प्रति प्रतिबद्धता इस बात का प्रमाण हैं कि लोकतांत्रिक राजनीति में जनसेवा की भावना किस तरह कार्य करती है।
राजपूत की यात्रा यह दिखाती है कि आज़ के समय में एक लोकप्रतिनिधि का काम केवल सत्ता तक पहुँचना नहीं है,
बल्कि जनता की वास्तविक समस्याओं को समझकर उन तक स्थायी समाधान पहुँचाना है। उनके जीवन का यह दृष्टिकोण उन्हें न केवल कासगंज में बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में एक सक्रिय और जिम्मेदार नेता के रूप में प्रतिष्ठित करता है।
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