नाम-
बीरेंद्र सिंह राणा
पद- विधायक (भाजपा), सिकंदर राव (हाथरस)
नवप्रर्वतक कोड- 71189517
परिचय
बिरेन्द्र सिंह राणा उत्तर प्रदेश के सिकंदराराऊ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र (नं. 80) से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक हैं। वे विधानसभा अध्यक्ष के रूप में विधायकी का कार्य संभाल रहे हैं तथा स्थानीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

प्रारंभिक
जीवन और पृष्ठभूमि
बिरेन्द्र सिंह राणा का जन्म 1 नवंबर 1958 को उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के बिसाना गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम रोशन सिंह है। सार्वजनिक स्रोतों के अनुसार उन्होंने प्रारंभिक जीवन ग़रीबी और आर्थिक कठिनाइयों के बीच व्यतीत किया, और शिक्षा को पूरा करने के बजाय परिवार का सहयोग करने के लिये कम उम्र में ही कार्य किया था। उनकी शिक्षा बारहवीं कक्षा तक है। राणा की प्रमुख व्यवसायिक पहचान कृषि क्षेत्र और व्यवसाय से है, और वे अपने गांव बिसाना में रहते हैं।

राजनीतिक
करियर की शुरुआत
बिरेंद्र सिंह राणा का राजनीतिक सफ़र
बहुत वर्षों से पार्टी संगठन स्तर पर शुरू हुआ। वे 1980 के दशक में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और कई दशकों तक पार्टी के लिए
एक सक्रिय कार्यकर्ता (कर्मी) के रूप में काम किया। यूपी भाजपा में उनकी भूमिका स्थानीय
स्तर पर मजबूत रही और इसने उन्हें पार्टी के भीतर महत्वपूर्ण संगठनात्मक
जिम्मेदारियाँ दिलाईं।
2013 में उन्हें ब्रज क्षेत्र के क्षेत्रीय समन्वयक के रूप में नियुक्त किया गया, और 2014 में उन्हें जनपद अध्यक्ष के रूप में उत्तर प्रदेश भाजपा के भीतर उत्तरदायित्व दिया गया। 1 जुलाई 2016 को उन्हें उत्तर प्रदेश भाजपा राज्य कार्यकारिणी समिति का सदस्य नियुक्त किया गया, जो उनके राजनीतिक कद को और ऊँचा करने वाला कदम माना गया। इस प्रकार पार्टी संगठन से जुड़ने के वर्षों बाद, वे पहली बार 2017 में भाजपा के टिकट पर सिकंदराराऊ से विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे।
विधायकी
और विधानसभा कार्यकाल
बिरेंद्र सिंह राणा ने 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में सिकंदराराऊ से भाजपा का प्रतिनिधित्व करते हुए जीत हासिल की। इसके बाद फरवरी–मार्च 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी के रूप में दोबारा भाग लिया और जीत दर्ज की। वे उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य (MLA) हैं और पार्टी को राज्य स्तर पर संगठनात्मक समर्थन प्रदान कर रहे हैं।

सामाजिक
और सार्वजनिक गतिविधियाँ
एक विधायक के रूप में बिरेन्द्र सिंह राणा स्थानीय कार्यक्रमों, धार्मिक आयोजन और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेते रहे हैं। उदाहरण के लिये, हाथरस के सिकंदराराऊ में बाल्मीकि शोभायात्रा जैसे स्थानीय कार्यक्रमों में वे उपस्थित रहे हैं और शुभारंभ किया है। इसके अलावा वे सावन के दौरान शिवभक्तों के लिये विश्राम कैंप का उद्घाटन करते हुए भी देखे गए हैं, जहां उन्होंने स्थानीय सेवा कार्यों में भाग लिया। ये गतिविधियाँ यह दर्शाती हैं कि विधायक स्थानीय सांस्कृतिक व सामाजिक आयोजनों में भागीदारी को महत्व देते हैं, और चुनाव क्षेत्र के लोगों के साथ संवाद स्थापित करने की कोशिश करते हैं।

विकास
कार्य और स्थानीय पहलें
बिरेन्द्र सिंह राणा ने अपने निर्वाचन
क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और विकास से जुड़े कई प्रोजेक्टों का हवाला
सार्वजनिक तौर पर दिया है। उनके
कार्यकाल में इंटरलॉकिंग सड़कों का निर्माण, विद्यालयों
और प्राविधिक शिक्षा केंद्रों का विकास, और
सामाजिक आधारभूत सुविधाओं पर विशेष फोकस रहा है।
इन विकास पहलों को लेकर जनता और
समर्थकों के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया मिलती है — कुछ लोग इसे सकारात्मक बदलाव
मानते हैं, जबकि अन्य स्थानीय मुद्दों जैसे सड़क
की गुणवत्ता, पानी, शिक्षा संसाधन आदि पर और कार्य की अपेक्षा करते हैं।
राजनीतिक
छवि और पार्टी में भूमिका
राजनीतिक विश्लेषण यह बताता है कि सिकंदराराऊ विधानसभा सीट पर 1991 से लेकर वर्तमान तक लगातार विधायक बदलते रहे हैं, कोई पार्टी दोबारा लगातार वही जीत नहीं पाई है। इस अतार्मिक राजनीतिक माहौल में बिरेन्द्र सिंह राणा की जीत को भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जाता है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में रहते हुए उन्होंने संगठनात्मक भूमिका भी निभाई है, और प्रदेश स्तर पर भाजपा के निर्णयों तथा आयोजन में भाग लिया है।

समग्र
राजनीतिक आकलन
बिरेन्द्र सिंह राणा की राजनीतिक यात्रा लंबे संगठनात्मक संघर्ष से लेकर सफल विधायक पद तक की कहानी कहती है। एक स्थानीय किसान-व्यवसायी से उठकर वे उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनकी मजबूत पार्टी संगठना, स्थानीय सहभागिता, और विकास पहलें उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र में प्रमुख नेता के रूप में स्थापित करती हैं। विकास, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों पर और काम की मांग रहती है, जनता की उम्मीदें और गठबंधन की राजनीति आगामी चुनावों में उनके लिये नई चुनौतियाँ पेश कर सकती हैं।
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