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मामौर झील, कैराना – कायाकल्प की तैयारी

कृष्णी नदी बेसिन में तितलियों की विविधता  और संरक्षण: जारी  शोध

कृष्णी नदी बेसिन में तितलियों की विविधता और संरक्षण: जारी शोध मामौर झील, कैराना

ByMrinalini Sharma Mrinalini Sharma   Contributors Swarntabh Kumar Swarntabh Kumar 80

  ‘मामौर’  झील जो कि कैराना क्षेत्र व वहां के लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं थी, वह आज उनके लिए

  

‘मामौर’  झील जो कि कैराना क्षेत्र व वहां के लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं थी, वह आज उनके लिए चिंता का विषय बनी हुई है. निर्मल हिंडन कार्यक्रम के तहत उत्तर- प्रदेश के शामली जनपद के कैराना क्षेत्र में स्थित मामौर झील का प्रशासन द्वारा कायाकल्प करने का निर्णय लिया गया है. यह झील गंदे, दूषित जल व ओवरफ्लो के कारण पिछले कई वर्षों से ग्रामवासियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है, मामौर झील का जलस्तर बढ़ने से अक्सर किसानों के खेत जलमग्न हो जातें हैं व फसलें भी नष्ट हो जातीं हैं, जिस कारण क्षेत्र के किसानों को अक्सर नुकसान की मार झेलनी पड़ती है. उन्होंने इस समस्या से कई बार प्रशासन को अवगत कराया किन्तु प्रशासन द्वारा इसका कोई हल नहीं निकाला गया. 

जिसके बाद भारत सरकार के ‘राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन’ के समन्वयक व ‘ग्रीन इंडियन कोर्पोरेशन’ के निदेशक प्रोफेसर उमर सैफ ने मामौर झील को स्वच्छ व प्रदूषण मुक्त बनाने की पहल की तथा इसके लिए उन्होंने एक प्रोजेक्ट भी बनाया तथा शामली के जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह के समक्ष इससे सम्बंधित प्रस्ताव रखा. जिसके अंतर्गत झील पर एक वाटर प्लांट अथवा बायोडायवर्सिटी पार्क (बटर फ्लाई पार्क) का निर्माण हो, जिसकी स्थापना के लिए पूर्व सांसद स्व. हुकुम सिंह ने भी काफी प्रयास किया था व इस मुद्दे को देश की संसद में भी उठाया था. इसके पश्चात जिलाधिकारी ने 22 फरवरी, 2018 को न सिर्फ मामौर झील का निरीक्षण किया बल्कि झील के कायाकल्प के लिए वाटर प्लांट की स्थापना का आदेश भी दे दिया. 

 

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जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह के अनुसार, जनपद के नगरपालिका, कस्बों व गांवों में समरसेविल की बढ़ती संख्या से जल का लगातार दोहन हो रहा है, जिससे झील में पानी भर जाता है, इसके बाद बरसात में जल स्तर और अधिक बढ़ने से फसलें बर्बाद हो जातीं हैं. इस समस्या का हल निकालने के लिए उन्होंने एक वाटर प्लांट की स्थापना का आदेश दिया है, जिसके अंतर्गत झील से खेतों के बीच पाइपलाइनों की व्यवस्था की जायेगी तथा पाइपलाइन के द्वारा ही खेतों की सिंचाई की जायेगी. जिससे झील का अतिरिक्त जल सिंचाई में समुचित रूप से प्रयोग किया जा सकेगा तथा इससे न सिर्फ वर्षा के जल को संरक्षित करने में सरलता होगी व किसानों की फसल की लागत भी कम हो जायेगी. इसके अलावा जिलाधिकारी ने गांवों की बंजर जमीन का प्रयोग बायोडायवर्सिटी पार्क, वेटलैंड व जल निकासी व जल के सही उपचार के लिए प्रयोग करने का आदेश भी दिया. 

इसके बाद लेखपालों ने तत्काल ही ऐसी जमीन चिन्हित की जहां पर वाटर प्लांट व बटर फ्लाई (तितली) पार्क का निर्माण किया जा सके. डॉ.उमर सैफ के अनुसार यह प्रोजेक्ट जीव-जन्तुओं व पर्यावरण की बेहतरी तथा किसानों के कल्याण में सहायक होगा. इसके अतिरिक्त उन्होंने इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिलने के बाद क्षेत्र के किसानों को समझाया कि यदि वह अपनी जमीन का एक छोटा सा हिस्सा जल निकासी से सम्बंधित योजना के लिए देंगे तो इससे उनकी कई बीघा जमीन को जल-भराव से तथा फसलों को नष्ट होने से बचाया जा सकता है. जिसके बाद वहां पर अमेरिका व नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने पहुँच कर झील के ओवरफ्लो को रोकने की व झील की गंदगी से बिजली, गैस व खाद बनाने से सम्बंधित प्रोजेक्ट लगाने की योजना बनाई. क्षेत्र के किसान जो कि पिछले 15-20 वर्षों से खेतों में जल-भराव के संकट को झेल रहें हैं वह इस प्रोजेक्ट से अत्यंत खुश व पूर्णता संतुष्ट हैं तथा इस संकट से मुक्ति पाने की आशा में वह इस प्रोजेक्ट की स्थापना में प्रशासन का पूर्ण समर्थन कर रहें हैं. 

 

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  ‘मामौर’  झील जो कि कैराना क्षेत्र व वहां के लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं थी, वह आज उनके लिए

 

मामौर झील के सुन्दरीकरण व इसके जल को दूषित होने से बचाने के लिए प्रशासन द्वारा अप्रैल में ही इस पर ‘बटर फ्लाई पार्क’ के निर्माण का कार्य शुरू करवा दिया गया है. इस प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए प्रशासन को भारी मात्रा ने आर्थिक जनसहभागिता मिल रही है. इसके अलावा क्षेत्र की नगर पालिकाएं व नगर पंचायतें भी अपने निजी संसाधन नि:शुल्क प्रदान कर इस पार्क के निर्माण में आवश्यक सहयोग प्रदान कर रहीं हैं. डॉ उमर सैफ के अनुसार इस प्रोजेक्ट के पहले चरण में 15 बीघा भूमि पर निर्माण कार्य किया जाएगा. आशा है कि शीघ्र ही इस ‘बटर फ्लाई पार्क’ के निर्माण का कार्य पूरा हो जाएगा जिससे कि मामौर झील के जल का समुचित प्रयोग हो व क्षेत्र के किसानों को भविष्य में इस झील के कारण किसी भी प्रकार की समस्या न झेलनी पड़े.                       

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