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भारत सरकार द्धारा इंश्योरेन्श सेंटर पर लगाये गये जीएसटी के विरोध में आंदोलनात्मक पहल

ByShivlal Thakur Shivlal Thakur   {{descmodel.currdesc.readstats }}

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 भारत सरकार द्धारा इंश्योरेन्श सेंटर पर लगाये गये जीएसटी के विरोध में आंदोलनात्मक पहल करते हुये आल इंड़िया लाइफ इंश्योरेंस एजेन्ट्स एसोसियेशन से संबंद्ध वाराणसी डिजीटल काउंसिल ने किया। भारतीय जीवन बीमा निगम मंड़ल कार्यालय वाराणसी पर जबरदस्त प्रदर्शन मध्यावकाश के समय उपस्थित शहर के शाखाओं के अभिकर्ताओं को भारत के इस दमनकारी पहल का विरोध करना चाहिए। जिसकी अपील संगठन के पदाधिकारीयों द्वारा अन्य संगठनों से भी किया जायेगा। आल इंड़िया इंश्योरेंस एजेन्ट्स एसोसियेशन फेडरेशन आॅफ इंड़िया के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवी शंकर शुक्ला ने संगठन को साथ देने का आश्वासन दिया है। जिसके लिए लखनऊ उत्तर प्रदेश में बैठक होगी साथ ही आंदोलनात्मक कार्यवाही पर रणनीती तय की जायेगी। यह आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से विभिन्न चरणों में चलेगा। जिसमें लखनऊ सहित दिल्ली के होने वाले प्रदर्शनों में लाखों अभिकर्ताओं सहित पोलिसीधारकों की भाग लेने की संभावनाहै आपने कहा कि लोकतांत्रिक पहल के अंतर्गत सरकार अगर इंश्योरेंस सेक्टर से जीएसटी वापस नही लेती हैतो संगठन को न्यायालय में भी जाने से कोई परहेज नही होगा।

आपने कहा कि इंश्योरेंस किश्तों पर ऋण के ब्याज पर किसी की फीस पर चैक वापसी पर हर जगह जीएसटी कर नही बल्कि भारत सरकार द्वारा जनता की आर्थिक स्थिति कमजोर करने का प्रयास है।डिवीजनल काउंसिल अध्यक्ष त्रिलोकी राम एवं महामंत्री अरविंद ने कहा कि केन्द्रीय संगठन के निर्देशों का अनुपालन करते हुए वाराणसी डिवीजनल काउंसिल का सहयोग पूरे उत्तर मध्य क्षेत्र में प्रथम रहेगा। प्रदर्शन में मुख्यतः कोषाध्यक्ष आर के त्रिपाटी, पूर्व अध्यक्ष राकेश सिंह पूर्व अध्यक्ष ओएन सिंह, स्वर्ण सिंह, अब्दुल जब्बार आदि लोग उपस्थित थे।

 

अपने अडियल रवैया को बरकरार रखते हुये भारत सरकार ने इंश्योरेंस सेंटर पर सर्विस टैक्स 3.09 प्रतिशत लगा दिया। जिसका प्रबल विरोध करते हुये संगठन के बैनर के तहत दिनांक 9 मार्च 2015 को भारतीय जीवन बीमा निगम के मंड़ल कार्यालय पर वाराणसी से उत्तर मध्य क्षेत्र से आये हजारों अभिकर्ताओं ने पैदल जुलूस निकाल कर वाराणसी स्थित प्रधानमंत्री जनसंपंर्क कार्यालय पहुंच कर भारत सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा। जिसका कोई जबाब न आने की स्थिति में पुनः वही प्रक्रिया अभिकर्ताओं द्वारा दिनांक 10 अप्रैल 2015 को अपनायी गई। लेकिन सरकार के ऊपर कोई असर नही पडा, कारण कि संगठन ने पुनः स्मृति पत्र दिनांक 16 मई 2015 को भारत सरकार को भेजा। जिसका जबाब न आने की स्थिति में 30 दिन तक इंतजार के पश्चात् संगठन ने विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद दिनांक 22 अगस्त 2016 को सूचनस का अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत भारत सरकार के केन्द्रीय जनसूचना अधिकारी से जबाब मांगा। जिसका जबाब दिनांक 15 दिसंबर 2016 को प्रवीन कुमार सचिव सीपीआईओ द्वारा दिया गया कि फाईल कार्यवाही के अंतर्गत है। निर्णय होते ही सूचित किया जायेगा।

       सर्विस टैक्स के स्थान पर भारत सरकार द्वारा इंश्योरेंस सेक्टर पर लगाये गये जीएसटी को आल इंड़िया लाइफ इंश्योरेंस एजेन्ट्स एसोसियेशन वापस लेने की सरकार से मांग करता है। अगर ऐसा सरकार नही करती है तो दिनांक 25 सितबंर 2017 से संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगा। जो भारतीय जीवन बीमा सहित जिला प्रदेश सहित देश में प्रभावी होगा। जो पूरी तरह से लोकतांत्रिक होगा। लेकिन आंदोलन के दौरान घटित किसी भी तरह की घटना की जिम्मेदार भारत सरकार होगी।

 

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स, जिसका मतलब वस्तु एवं कर सेवा होता है, एक टैक्स संबंधी बिल है। 3 अगस्त 2016 को हमारे देश भारत में जीएसटी बिल पारित किया गया था, और सरकार ने इसे 1 जुलाई 2017 से विशेष क्षेत्रों में लागु करने का निर्णय लिया। सरकार के अनुसार जीएसटी लागु होने से टैक्स देने वालों को काफी सुविधा मिलेगी।

इसे सरल शब्दो में कहा जाए तो सभी वस्तुओं और सेवाओं में नया जीएसटी टैक्स लगाए जायेगा, साथ ही पहले जो टैक्स लगते थे वो अब नहीं लगेंगे। ळैज् बिल पास होने से पूरे देश में एक ही रेट टैक्स लगेगा, चूँकि ये सम्पूर्ण भारत में लगेगा इसलिए कोई और टैक्स भी नहीं देना होगा। जीएसटी एक प्रकार का अप्रत्यक्ष कर है, जो व्यापक पैमाने पर पूरे देश के निर्माता, व्यापारी, वस्तुओं और सेवाओं के उपभोगताओं पर लगेगा और यह टैक्स सभी टैक्सों को हटा देगा जो केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए है, वस्तुओं और सेवाओं की खरीद बिक्री के प्रत्येक चरण में लगने वाले इस टैक्स में “इनपुट टैक्स क्रेडिट मेथड” लगेगी। इस मेथड के अंतर्गत वस्तु एवं सेवा कर बिल के अधीन पंजीकृत व्यवसायों को टैक्स क्रेडिट क्लेम करने की सुविधा मिलेगी। जीएसटी बिल में शामिल मुख्य बातें - जीएसटी बिल के अंतर्गत दो भाग होंगे - केंद्र द्वारा लगाए जाने वाला, राज्यों द्वारा लागए जाने वाला। दोनों की दरे क्या होंगी इसे निर्धारित किया जाएगा जो की इनकी आय और स्वीकार्यता को ध्यान में रख कर तय किया जायेगा। जीएसटी लागु होने से कई फायदे है जैसे टैक्स चोरी में कमी आएगी, कम विकसित राज्यों में अधिक आय प्राप्त होगी, आदि।

 

 

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