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सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 - मणिपुर सूचना आयोग ने आरटीआई आवेदन ऑनलाइन करने के सुझाव का किया स्वागत बावजूद अब तक आपने इसे ऑनलाइन नहीं किया, आपको डाउन

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सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 - मणिपुर सूचना आयोग ने आरटीआई आवेदन ऑनलाइन करने के सुझाव का किया स्वागत बावजूद अब तक आपने इसे ऑनलाइन नहीं किया, आपको डाउनग्रेड किया जाता है

आरटीआई में दम तो है

आज से कुछ साल पहले हमारे पास कोई भी ऐसा तंत्र नहीं था कि हम जान सके की सरकार इस प्रोजेक्ट में कितना पैसा लगा रही है. हमारे पास कोई अधिकार नहीं था कि हम जान सके इस इस कार्य में इतनी देरी क्यों हो रही है. कुछ वर्ष पहले कौन सोच सकता था कि किसी नियुक्ति को लेकर हुई धांधली का पता बस एक रेवेन्यू टिकट लगाकर और बस आपके द्वारा मांगी गई जानकारी से हो जायेगा. विश्वविद्यालयों में छात्रों के गलत दाखिले पर आज आप दूध का दूध, पानी का पानी यानि सारी सच्चाई बस एक आरटीआई के मदद से बहार ला सकते हैं. हमारे नेता सरकारी यानी जनता के धन का उपयोग कर कहा करोड़ों खर्च करते हैं इसका पता बस आपको एक आरटीआई से मिल जाता है. ये आरटीआई से हुए खुलासे का ही कमाल है कि बड़े-बड़े हजारों करोड़ के घोटाले हमारे सामने आ पाए. आरटीआई एक प्रभावशाली तंत्र है मगर जरुरत है इसे और भी पारदर्शी बनाया जाए जिसके लिए BallotBoxIndia की टीम तत्पर है उम्मीद है मणिपुर से भी हमें कुछ ऐसे लोगों का साथ मिलेगा जो हमारे साथ इस दिशा में आगे बढ़ेंगे.

जब ऑनलाइन टिकट बुक हो सकता है तो ऑनलाइन आरटीआई क्यों नहीं किया जा सकता?

आरटीआई के जरिये बस एक प्रश्न पूछने के लिए डाकखाना जाना, लंबी कतार में खड़े हो इंतज़ार करना कहां तक तर्कसंगत है? बावजूद उसके आपको अपने जवाब के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, बस यहीं नहीं कोई कमी हो गई तो आपको फिर से उसी प्रक्रिया को फिर से दोहराने की जरुरत होगी. यहीं नहीं विभागों को जवाब नहीं देना हो तो उसकी भी अपनी पेचीदगी है. आज हम डिजिटल युग में जी रहे हैं आज अगर आपको ट्रेन की टिकट लेनी हो तो उसके लिए आपको कहीं जाने की जरुरत नहीं है घर बैठे आप ऑनलाइन इसे बुक कर सकते हो, यहीं नहीं घर के सामान से लेकर सब्जी तक सभी आपको एक क्लिक में बैठे-बैठे आपके घर पर मिल जाता है. ऐसे में अपने अधिकार को लेकर सरकारी महकमे में जानकारी लेने के लिए हमें भागने की जरुरत क्यों पड़ती है? जिस राज्य में आरटीआई के इतने लंबित मामले पड़े हैं वहां के सूचना आयोग का  इतना ढीला रवैया बेहद शर्मिंदगी भरा है.

मणिपुर की अच्छी पहल - सूचना का अधिकार सप्ताह 

यह एक अच्छी पहल और बेहतर कोशिश है कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 को लोकप्रिय बनाने के लिए और हितधारकों के बीच बड़े पैमाने पर जागरूकता फैलाने के लिए मणिपुर सूचना आयोग 5 से 10 अक्टूबर 2016 तक सूचना का अधिकार सप्ताह माना रही है जहां सूचना का अधिकार को लेकर राज्य स्तरीय कार्यशाला भी रखी गई है. राज्य मुख्य सूचना आयुक्त ने राज्य के सभी सरकारी कर्मचारी, आरटीआई एक्टिविस्ट, सूचना आयुक्त, गैर सरकारी संगठन, विद्यार्थियों आदि को इसमें शरीक होने के लिए निमंत्रित किया है. मगर जरुरत है कि एक सप्ताह चलने वाले कार्यक्रम की प्रासंगिकता हमेशा बनी रहे. सूचना का अधिकार के प्रति लोगों को हरदम जागरूक किया जाए और साथ ही सरकारी महकमा भी इस अपेक्षित कानून को लेकर और ईमानदार बने

सुझाव का स्वागत किया मगर अमल क्यों नहीं?

मणिपुर सूचना आयोग द्वारा सूचना का अधिकार सप्ताह मनाया जाना स्वागत योग्य कदम है मगर काश आप हमारे सुझाव का भी बस स्वागत भर नहीं करते बल्कि इसे लागू भी कर पाते. जहां एक ओर केंद्र सरकार का बेहद जोर ‘डिजिटल इंडिया’ यानि पूरे भारत को डिजिटल करने का है तो वहीं राज्य सरकारें कहीं ना कहीं इससे चूक रही हैं. आपकी नज़र में डिजिटल डेमोक्रेसी का क्या? क्या हर राज्य का अपना खुद का ऑनलाइन आरटीआई वेबसाइट नहीं होना चाहिए, जहां कोई भी बिना किसी झमेले के इक्छुक जानकारी हासिल कर सके? क्या पारदर्शी व्यवस्था का हक़ लोगों को नहीं मिलना चाहिए? 2005 में जिस अपेक्षा से आरटीआई कानून लागू किया गया था आज उसकी इतनी उपेक्षा क्यों? सवाल गंभीर है, उम्मीद है आप जल्द इस दिशा में भी ठोस कदम उठाएंगे.

मणिपुर सूचना आयोग शायद आप अपना वादा भूल गए

मणिपुर सूचना आयोग ने जिस प्रकार से सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की गंभीरता को समझते हुए आरटीआई पर हमारे सुझाव का स्वागत किया काश उसी गंभीरता के साथ वह हमारे आवेदन पर भी ध्यान दे पाते. यह दुर्भाग्य ही है कि जिस आयोग के हमारे आवेदन का त्वरित और सकारात्मक जवाब दिया और जिसके  गंभीरता के हम कायल हुए उन्हीं ने हमें बेहद निराश किया. हमारे द्वारा पूछे गए प्रश्न की क्या आपके पास आरटीआई फाइल करने की ऑनलाइन व्यवस्था है? का जवाब तुरंत आया और संतुष्टि भरा. आपने आरटीआई फाइल करने की ऑनलाइन प्रक्रिया को लेकर हमारा स्वागत किया था. साथ ही आपने इसे जल्द से जल्द ऑनलाइन करने का आश्वासन भी दिया था. जिसके लिए हम तहे दिल से आपके शुक्रगुजार है पर पता नहीं आप आरटीआई को ऑनलाइन करने की किस प्रक्रिया में उलझ गए कि एक वर्ष से भी अधिक अवधि के बीत जाने के बाद भी मणिपुर सूचना आयोग अब तक आरटीआई की ऑनलाइन व्यवस्था नहीं दे पाया है. हम दुखी मन से  मणिपुर सूचना आयोग को डाउनग्रेड करते हैं. मगर उम्मीद है आप अब भी अपने दिए वचन के प्रति गंभीर होंगे और इस दिशा में जल्द ही कोई ठोस कदम उठाएंगे.

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 - मणिपुर सूचना आयोग ने आरटीआई आवेदन ऑनलाइन करने के सुझाव का किया स्वागत

क्या चाहते हैं हम?

एक ऐसा भारत जहां हर राज्य के पास एक ऐसी उन्नत व्यवस्था हो जिससे सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की शक्ति को और भी बल मिल सके. हर राज्य के पास खुद की आरटीआई फाइल करने की ऑनलाइन व्यवस्था होनी चाहिए जिससे इसे और भी सुचारू तरीके से चलाया जा सके. जब केंद्र सरकार आरटीआई फाइल करने की ऑनलाइन व्यवस्था प्रदान कर सकती है तब दूसरे राज्य उसका अनुसरण क्यों नहीं कर सकते? जब भारत एक है तो #OnenationOneRTI क्यों नहीं हो सकता?

अगर आप आरटीआई विशेषज्ञ हैं या आरटीआई कार्यकर्ता जो वास्तव में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की बेहतरी के लिए हमारे साथ काम करना चाहते हैं तो अपना विवरण हमें coordinators@ballotboxindia.com पर भेजें.

आप किसी को जानते हैं, जो इस मामले का जानकार है, एक बदलाव लाने का इच्छुक हो. तो आप हमें coordinators@ballotboxindia.com पर लिख सकते हैं या इस पेज पर नीचे दिए "Contact a coordinator" पर क्लिक कर उनकी या अपनी जानकारी दे सकते हैं.

अगर आप अपने समुदाय की बेहतरी के लिए थोड़ा समय दे सकते हैं तो हमें बताये और समन्वयक के तौर हमसे जुड़ें.

क्या आपके प्रयासों को वित्त पोषित किया जाएगा? हाँ, अगर आपके पास थोड़ा समय,कौशल और योग्यता है तो BallotBoxIndia आपके लिए सही मंच है. अपनी जानकारी coordinators@ballotboxindia.com पर हमसे साझा करें.

धन्यवाद

Coordinators @ballotboxindia.com 

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