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अप्रैल स्वास्थ्य विशेषांक – ऋतु परिवर्तन के सूचक माह में पाएं निरोगी तन-मन

भारतीय त्यौहार एवं संस्कृति.

भारतीय त्यौहार एवं संस्कृति. Opinions & Updates

ByKavita Chaudhary Kavita Chaudhary   Contributors Deepika Chaudhary Deepika Chaudhary {{descmodel.currdesc.readstats }}

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अप्रैल स्वास्थ्य विशेषांक – ऋतु परिवर्तन के सूचक माह में पाएं निरोगी तन-मन-

अप्रैल माह वैश्विक रूप से विविधता और नवऊर्जा का प्रतीक महीना है. मुख्यत: अप्रैल का नाम ग्रीक गॉडेस, एफ़्रोडाइट के नाम पर रखा गया है. रोमन कैलेंडर के अंतर्गत चौथे महीने को पहले अप्रिलिस लिखा जाता था, जिसका अर्थ है "खुल जाना." उत्तरी गोलार्द्ध के अंतर्गत इस माह को बसंत ऋतू का प्रतीक माना जाता है, जिसमें वृक्ष फलों और फूलों से लद जाते हैं और इसी विशिष्टता के चलते इस माह को अप्रैल नाम दिया गया.

इस तरह नवसृजन का सूचक माना जाने वाला अप्रैल माह मात्र उत्तरी गोलार्द्ध के अंतर्गत ही नहीं बल्कि विश्व भर में सृजनात्मकता, आध्यात्मिकता और रचनात्मकता से भरपूर माह है. गौर करें तो हम पाएंगे कि जहां भारत के लिहाज से अप्रैल यानि चैत्र माह को हिन्दू नववर्ष का आरंभिक माह मानते हुए देश भर में गुडी पडवा, उगादी पर्व, चित्रैय तिरूविजा इत्यादि के नाम से उल्लासपूर्ण तरीके से मनाया जाता है, वहीं विश्व भर में यह माह “नेशनल पोएट्री मंथ” के लिहाज से कृतित्व, ज्ञान और साहित्य को समर्पित है.

चैत्रे मासि जगद् ब्रह्मा ससर्ज प्रथमे अहनि। शुक्ल पक्षे समग्रेतु तदा सूर्योदये सति।।

अर्थात ब्रह्मा पुराण के अनुसार ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना चैत्र मास के प्रथम दिन, प्रथम सूर्योदय होने पर की थी.

भारत की सनातनी पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्म देव ने इसी माह से सृष्टि की रचना आरम्भ की थी और तभी से चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नव संवत्सर की संज्ञा से अंकित किया जाता है. इस माह से गर्मियां भी दस्तक देने लगती है और धीरे धीरे सूर्य किरणों की प्रखरता असहनीय होने लगती है, जिसमें स्वास्थ्य पर ध्यान देना विशेष रूप से आवश्यक हो जाता है.

गर्माते मौसम से शरीर की आंतरिक संरचना में परिवर्तन आना स्वाभाविक है, इन्हीं सब तथ्यों को ध्यान में रखते हुए बैलटबॉक्सइंडिया स्वास्थ्य सीरीज की इस श्रृंखला में प्रस्तुत करता है “अप्रैल स्वास्थ्य विशेषांक”, ताकि आप पूरी तरह स्वस्थ रहते हुए मौसमी बदलाव का आनंद ले सकें.

1. अप्रैल में जलवायु परिवर्तन –

अप्रैल स्वास्थ्य विशेषांक – ऋतु परिवर्तन के सूचक माह में पाएं निरोगी तन-मन-

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मार्च से ही ग्रीष्म ऋतु का आगमन हो जाता है और उत्तर भारत के अधिकतर राज्यों में मार्च से ही सूर्य की कर्क रेखा की ओर बढ़त के साथ ही तापमान में भी वृद्धि होने लगती है. सामान्यत: अप्रैल माह में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर ही रहता है, जिसमें बढ़त निरंतर जारी रहती है, वहीं दक्षिणी भारत में हालांकि तापमान तो अधिक रहता है, परन्तु प्रायद्वीपीय स्थिति के चलते मौसम मृदु बना रहता है.

वहीँ परंपरागत रूप से छ: ऋतुओं में विभाजित भारतीय मौसम चक्र के अंतर्गत चैत्र माह को बसंत ऋतु का ही अंतिम माह माना जाता है. चरक संहिता के कथनानुसार शिशिर ऋतु को उत्तम बलवाली, बसंत ऋतु को मध्यम बलवाली और ग्रीष्म ऋतु को दौर्बल्य वाली ऋतु माना गया है.

चूंकि अप्रैल में तापमान अधिकता से बढ़ता है, इसलिए इसे ग्रीष्म ऋतू के अंतर्गत ही सम्मिलित किया जा सकता है. ग्रीष्म ऋतु में गरम जलवायु शरीर में पित्त एकत्र करती है और प्रकृति में होने वाले परिवर्तन शरीर को प्रभावित करने लगते हैं.

गर्मी के बढ़ने से शरीर की धातुएं भी क्षीण होने लगती है, सूर्य की प्रखर किरणें शारीरिक ऊर्जा को सोखने का कार्य करती हैं, जिससे थकान और कमजोरी महसूस होना सामान्य है. अप्रैल माह में विशेष रूप से गर्मी बढ़ने के साथ साथ ही धूल भरी आंधी भी चलने लगती है, मौसम में होने वाले इस बदलाव से होने वाले प्रभाव इस प्रकार हैं..

1. मौसम बदलने के साथ ही वातावरण में वायरस सक्रिय हो जाते हैं.

2. वायु में बैक्टीरिया के कण बड़ी मात्रा में उत्पन्न होते हैं, जो तेज हवा चलने से धूल के अन्य कणों के साथ ही शरीर में प्रवेश करने लगते हैं.

3. तापमान बढ़ने से शरीर में पित्त की मात्रा भी बढती है, जो प्रतिरोधक क्षमता को धीमा कर देती है और वायरल इन्फेक्शन होने की आशंका बढ़ जाती है.

2. मौसमी फल एवं सब्जियां -

अप्रैल स्वास्थ्य विशेषांक – ऋतु परिवर्तन के सूचक माह में पाएं निरोगी तन-मन-

जिस प्रकार मौसम में परिवर्तन होता है उसी प्रकार हमें भी अपनी जीवनशैली व खानपान में परिवर्तन करना पड़ता है. सर्दियों के मौसम के बाद गर्मियों का आरंभ होने लगता है. इसी कारण शरीर में पोषक तत्वों का अभाव होने लगता है, जिससे शरीर से जल की मात्रा भी कम होने लगती है तो इसी लिहाज से गर्मियों में जलतत्व से भरपूर सब्जियों व ठंडे तासीर वाले फलों को अपने डायट चार्ट में शामिल किया जाता है. जिससे शरीर में जल की आपूर्ति भी होती रहे और साथ ही आवश्यक पोषक तत्व भी शरीर को प्राप्त होते रहें.

कुछ इस प्रकार की सब्जियां व फल अपने खाने में प्रयोग कर आप गर्मियों में स्वस्थ रह सकते हैं :

करेला - विभिन्न पोषक तत्वों से भरपूर करेला सम्पूर्ण भारत में सब्जी व अचार के रूप में प्रयोग में लाया जाता है. करेला स्वाद में बेहद कड़वा होता है परन्तु यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है.

अप्रैल स्वास्थ्य विशेषांक – ऋतु परिवर्तन के सूचक माह में पाएं निरोगी तन-मन-

लौकी/घीया – भरपूर मात्रा में जलतत्त्व से परिपूर्ण लौकी ज्यादातर लोगों को खाने में पसंद होती है. गर्मियों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होने वाली लौकी से लोग विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाते हैं, जैसे लौकी की भाजी, लौकी का रायता, नवरात्रि व्रत में खाई जाने वाली लौकी की खीर व बर्फी इत्यादि.

अप्रैल स्वास्थ्य विशेषांक – ऋतु परिवर्तन के सूचक माह में पाएं निरोगी तन-मन-

खीरा - शरीर की आन्तरिक तपन को शांत करने में खीरा सर्वाधिक सहायक होता है. जिसे केवल भारत में ही नही अपितु सम्पूर्ण विश्व में लोग प्राय: 12 महीने सलाद के रूप में प्रयोग करते हैं, परन्तु अप्रैल माह से यह ताजा व सरल रूप से बाज़ार में उपलब्ध होता है.

अप्रैल स्वास्थ्य विशेषांक – ऋतु परिवर्तन के सूचक माह में पाएं निरोगी तन-मन-

कद्दू/सीताफल – गर्मियों के दिनों में सर्वाधिक रूप से प्रयोग में लाया जाने वाले कद्दू में पोटेशियम व फाइबर की मात्रा प्रचुर रूप से होती है. भारत में लोग प्राय: कद्दू को सब्जी बनाने के साथ-साथ, सूप आदि के रूप में भी सेवन करते है.

अप्रैल स्वास्थ्य विशेषांक – ऋतु परिवर्तन के सूचक माह में पाएं निरोगी तन-मन-

तोरई – तोरई जिसे ‘तुरई’ व ‘तुरूई’ के नाम से भी जाना जाता है. यह सर्वत्र भारतवर्ष में सब्जी के रूप में प्रयोग की जाती है. आयुर्वेद के अनुसार यह पित्त व कफ़ दोष को समाप्त करती है. तराई को सब्जी, सूप, चटनी अथवा रायते के रूप में प्रयोग में लाया जाता है.   .

अप्रैल स्वास्थ्य विशेषांक – ऋतु परिवर्तन के सूचक माह में पाएं निरोगी तन-मन-

शरीर को शीतलता प्रदान करते कुछ फल

बेल -  बेल अथार्त वुड एप्पल आध्यात्मिक दृष्टि से पूजनीय होने के साथ-साथ औषधीय गुणों से भी भरपूर है. कफनाशक प्रवृति होने के कारण बेल पेट के लिए पूर्ण रूप से औषधि का कार्य करता है. बेल का जूस गर्मियों में शरीर को तरोताजा बनाये रखने में बेहद लाभप्रद है.  

अप्रैल स्वास्थ्य विशेषांक – ऋतु परिवर्तन के सूचक माह में पाएं निरोगी तन-मन-

संतरा – स्वास्थवर्धक गुणों से भरपूर संतरे में विटामिन सी की प्रचुर मात्रा होती है. रक्तशोधक व शक्तिवर्धक संतरे का लोग फल के रूप में तो सेवन करते ही हैं साथ ही इसे जूस, स्मूदी के तौर पर भी गर्मियों में शरीर को शीतलता देने में प्रयोग किया जा सकता है.

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आम – फलों के राजा का ताज सर पर पहने आम में निहित पोषक तत्त्व हमारे शरीर के लिए बेहद उपयोगी होते हैं. आम एक ऐसा फल है, जिसकी भारत में विभिन्न किस्में उपलब्ध होती है. केवल भारत में ही नही यह फल सम्पूर्ण विश्व में अपने स्वाद के लिए प्रसिद्ध है. आम केवल फल के ही रूप में नही अपितु आमरस, लस्सी, शेक, एवं आम पापड़ के लिए भी लोगों के मध्य लोकप्रिय है.

अप्रैल स्वास्थ्य विशेषांक – ऋतु परिवर्तन के सूचक माह में पाएं निरोगी तन-मन-

अंगूर – अपने खट्टे-मीठे स्वाद से लोगों के बीच प्रसिद्ध अंगूर मात्र फल ही नही अपितु एक आयुर्वेदिक औषधि के रूप में भी जाना जाता है. इसके सेवन से शरीर गर्मियों में भी तरोताजा बना रहता है.

अप्रैल स्वास्थ्य विशेषांक – ऋतु परिवर्तन के सूचक माह में पाएं निरोगी तन-मन-

3. योगासनों द्वारा पाएं आन्तरिक शीतलता

अप्रैल स्वास्थ्य विशेषांक – ऋतु परिवर्तन के सूचक माह में पाएं निरोगी तन-मन-

चैत्र माह से तापमान में तपिश होने लगती है, इसलिए प्राणायाम व कुछ योगासनों से शरीर को आन्तरिक ठंडक प्रदान की जा सकती है. व्यायाम हमारी जीवनशैली का महत्वपूर्ण अंग माना गया है और योगाभ्यास द्वारा शरीर की इम्युनिटी में भी वृद्धि की जाती है, जिससे शरीर विभिन्न रोगों से लड़ने में सक्षम हो सके. इसी दृष्टिकोण से हमें स्वस्थ शरीर व गर्मी से राहत पाने के लिए ऋतुचर्या के अनुसार प्राणायाम व आसनों को उपयोग में लाना चाहिए :

शीतली प्राणायाम

शीतली प्राणायाम अर्थात शरीर को शीतलता प्रदान करना. इसके लाभ इस प्रकार हैं..

1. इस प्राणायाम के माध्यम से व्यक्ति तनावमुक्त होता है.

2. शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने के लिए यह बेहद उपयोगी होता है.  

3. यह प्राणायाम त्वचा एवं नेत्र सम्बन्धी रोगों के लिए भी लाभदायक है.

अप्रैल स्वास्थ्य विशेषांक – ऋतु परिवर्तन के सूचक माह में पाएं निरोगी तन-मन-

भ्रामरी प्राणायाम

भ्रमर की भांति स्वर निकाल कर करने वाले प्राणायाम को भ्रामरी प्राणायाम की संज्ञा दी गयी है.

1. इसके नियमित रूप से अभ्यास करने से व्यक्ति तनाव मुक्त होता है.

2. इसके द्वारा स्वच्छ वायु का शरीर में प्रवेश होता है.

3. मस्तिष्क में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ने से शरीर को स्वाभाविक शीतलता प्राप्त होती है.

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अनुलोम विलोम प्राणायाम   

श्वासों को साधने के लिए किया जाने वाले इस प्राणायाम के अनगिनत लाभ हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार है..

1. इस प्राणायाम के द्वारा व्यक्ति अपने शरीर की ऊर्जा प्रणाली को सुचारू रूप से संचालित करने में सहायक होता है.

2. इसके अभ्यास से कुछ ही समय में व्यक्ति का मन स्थिर व शांत होता है.

3. अनुलोम विलोम प्राणायाम से तनाव व थकान से भी राहत मिलती है.

4. यह शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में भी कारगर सिद्ध होता है.

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शीतकारी प्राणायाम

मुख से “ओ” का आकार बनाकर साँस लेने से जीभ के द्वारा शीतल वायु शरीर के अंदर प्रवेश करती है, इसी प्रक्रिया को शीतकारी प्राणायाम कहा जाता है.

1. इस प्राणायाम के माध्यम से व्यक्ति को गर्मी से राहत मिलती है.

2. मुंह को खोलकर तथा जीभ को बाहर निकाल कर मुंह के द्वारा गहरी साँस लेने से ठंडी हवा का शरीर में समाहित होती है, जो गर्मी के लिए बेहद उपयोगी होता है.

अप्रैल स्वास्थ्य विशेषांक – ऋतु परिवर्तन के सूचक माह में पाएं निरोगी तन-मन-

सर्वांगासन

चैत्र के दिनों में शरीर के तापमान में बेहद वृद्धि हो जाती है जिसे नियंत्रित करने में सर्वांगासन बेहद उपयोगी होता है.

1. इस आसन के द्वारा रक्त प्रवाह मस्तिष्क की ओर हो जाता है, जो शरीर के प्रत्येक अंग के लिए लाभकारी होता है.

2. इस आसन के नियमित अभ्यास से व्यक्ति के सभी रोग समाप्त होने लगते हैं.

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विशेष नोट - उच्च रक्तचाप व सर्वाइकल के रोगियों को इसे न करने की सलाह दी जाती है.

4. स्वास्थ्य सिद्धि का आध्यात्मिक पक्ष – चैत्र नवरात्र

अप्रैल स्वास्थ्य विशेषांक – ऋतु परिवर्तन के सूचक माह में पाएं निरोगी तन-मन-

ऋतु परिवर्तन अथार्त वर्ष की प्रथम गर्मी में शरीर को शुद्ध रखने हेतु की जाने वाली प्रक्रिया नवरात्रि के नाम से सर्वविख्यात है. नवरात्रि केवल आध्यात्मिक मंथन का ही प्रतीक नहीं है अपितु शारीरिक स्वास्थ्य एवं मानसिक पवित्रता का भी द्योतक माना जाता है. वैभव व सौभाग्य की अधिष्ठात्री, जगत जननी माँ दुर्गा की आराधना के महापर्व माने जाने वाले नवरात्रि के अवसर पर लोग नौ दिन का उपवास रखते है. इन नौ दिनों के उपवास के दौरान केवल सात्विक आहारचर्या का ही पालन किया जाता है. इसलिए यह बेहद आवश्यक होता है कि व्यक्ति चैत्र नवरात्रि के व्रत में समाहित धार्मिक व अध्यात्मिक महत्व के साथ-साथ इसके वैज्ञानिक तथ्य को भी अवश्य जानें.

नवरात्रि से जुड़ें कुछ वैज्ञानिक तथ्य :

1. ऋतु परिवर्तन के इस माह में शरीर में वात, पित्त और कफ दोष के बढ़ने से हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में कमी आती है.

2. प्रतिरोधक क्षमता के घटने के साथ-साथ हमारे पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली क्षीण रहती है, जो केवल हल्का व सुपाच्य आहार ही पचाने में सक्षम होती है.

3. हमारे ऋषि मुनियों के समय से चली आ रही मान्यता हमें संधिकाल की इस बेला में हमें गरिष्ठ भोजन त्याग कर अल्पाहार की ओर केन्द्रित करती है. इसी कारण नवरात्रि के नौ दिन उपवास रखने से पाचन तंत्र बेहतर होता है.

4. नवरात्रि के दौरान उचित प्रकार से उपवास रखने से हमारा शरीर वर्ष भर तक रोगों से दूर रहता है.

5. संधिकाल के अंतर्गत संक्रामक रोगों (जिन्हें वैदिक काल में आसुरी शक्तियों की संज्ञा दी जाती थी) का प्रकोप अत्याधिक होता है. इसी कारण हमारे ऋषि मुनियों के द्वारा नवरात्रि यानि नौ रात्रि तक विभिन्न जड़ी-बूटियों एवं वनस्पतियों के प्रयोग से हवन पूजन इत्यादि करके वातावरण शुद्धि की प्रक्रिया अमल में लाई जाती थी.

अप्रैल स्वास्थ्य विशेषांक – ऋतु परिवर्तन के सूचक माह में पाएं निरोगी तन-मन-

5. गर्मी के आरंभ में संक्रमित रोग एवं उनका आयुर्वेदिक समाधान

अप्रैल स्वास्थ्य विशेषांक – ऋतु परिवर्तन के सूचक माह में पाएं निरोगी तन-मन-

धीरे-धीरे जिस प्रकार गर्मियों का आरम्भ होने लगता है, उसी प्रकार शरीर में भी ऋतु परिवर्तन का असर दिखाई देने लगता है. वातावरण में तपिश के कारण विभिन्न संक्रामक बीमारियां भी फैलने लगती हैं. शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर भी इस मौसम में काफी प्रभाव पड़ता है. अप्रैल माह में होने वाली मुख्य बीमारियों को नजरंदाज न कर के उपयुक्त चिकित्सीय सलाह व आयुर्वेद के माध्यम से उनका निदान करना बेहद आवश्यक है.

सूर्य की असहनीय किरणों से आँखों में इन्फेक्शन 

सर्दियों में मीठी लगने वाली धूप गर्मियों में शरीर को बेहद प्रभावित करती है. तेज धूप के कारण हमारी आंखे भी संक्रमित होती है. आँखों का संक्रमण किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति को हो सकता है. यदि इस से भी निदान नही मिलता तो चिकित्सकीय परामर्श लेने में कोताही न बरतें.

अप्रैल स्वास्थ्य विशेषांक – ऋतु परिवर्तन के सूचक माह में पाएं निरोगी तन-मन-

डिहाइड्रेशन से स्वयं का बचाव

गर्मी के मौसम में जिन व्यक्तियों को अत्यधिक पसीना आता है, उन्हें डिहाइड्रेशन की समस्या का खतरा अत्यधिक होता है. शरीर से आवश्यक खनिज व तरल पदार्थ की हानि को डिहाइड्रेशन कहा जाता है. इसके कारण व्यक्ति के शरीर में जल की कमी होने लगती है.

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चिकन पॉक्स वायरस

मौसम परिवर्तन के कारण चैत्र के इस माह में संक्रामक रोगों का खतरा सर्वाधिक होता है. जिनमे प्रमुख है – ‘चिकनपॉक्स’. आमतौर पर यह रोग किसी भी व्यक्ति को संक्रमित व्यक्ति से लगता है और इसे ठीक होने में 10-15 दिन का समय लग जाता है. इस बीमारी में पूरे शरीर में लाल चकते व छाले पड़ जाते है तथा यह पूरे शरीर में फ़ैल जाते है. साथ ही रोगी को तेज बुखार और सर दर्द का भी सामना करना पड़ता है.

अप्रैल स्वास्थ्य विशेषांक – ऋतु परिवर्तन के सूचक माह में पाएं निरोगी तन-मन-

संधिकाल के प्रतीक अप्रैल माह में स्वास्थ्य के प्रति बरती गयी थोड़ी सी भी लापरवाही आपको वर्षभर के लिए विभिन्न रोग दे सकती है, इसलिए अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं करते हुए ऋतुकाल के अनुसार आहारचर्या एवं दिनचर्या का अनुसरण करें और अनुपम स्वास्थ्य से अपने तन-मन की शुद्धि को बरक़रार रखें.

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