Please wait...

Search by Term. Or Use the code. Met a coordinator today? Confirm the Identity by badge# number here, look for BallotboxIndia Verified Badge tag on profile.
सर्च करें या कोड का इस्तेमाल करें, क्या आज बैलटबॉक्सइंडिया कोऑर्डिनेटर से मिले? पहचान के लिए बैज नंबर डालें और BallotboxIndia Verified Badge का निशान देखें.
 Search
 Code
Searching...loading

Search Results, page {{ header.searchresult.page }} of (About {{ header.searchresult.count }} Results) Remove Filter - {{ header.searchentitytype }}

ज़िला कनेक्ट

करें अपने ज़िले को मज़बूत, जुड़ें ज़िला कनेक्ट से.
TV
Radio
News
Join Your District, get latest news, listen to podcast, Check and Submit Stories that matter, near you on the Map.
सीधे अपने ज़िले से जुड़ें, जानें, देखें क्या नया हो रहा है, ऑडियो पॉडकास्ट सुने या आपके आस पास आपसे जुड़े मुद्दों के बारे में नक़्शे पर जानें, या उन्हें सबमिट करें.

Oops! Lost, aren't we?

We can not find what you are looking for. Please check below recommendations. or Go to Home

लखीमपुर खीरी में साठा धान की खेती पर प्रतिबंध - गोमती सेवा समाज व प्रकृति संरक्षणकर्ताओं के प्रयासों को मिली सफलता

Kheri (Uttar Pradesh)

Kheri (Uttar Pradesh) Opinions & Updates

ज़िला कनेक्ट
ByMandeep Singh Mandeep Singh   {{descmodel.currdesc.readstats }}

Originally Posted by {{descmodel.currdesc.parent.user.name || descmodel.currdesc.parent.user.first_name + ' ' + descmodel.currdesc.parent.user.last_name}} {{ descmodel.currdesc.parent.user.totalreps | number}}   {{ descmodel.currdesc.parent.last_modified|date:'dd/MM/yyyy h:mma' }}

टीम गोमती समाज सेवा और गोमती संरक्षण में जुटें पर्यावरण प्रेमियों के लिए लखीमपुर खीरी से एक सुखद समाचार है, जिला प्रशासन लखीमपुर खीरी में इस वर्ष साठा धान की बुवाई पर प्रतिबंध लगा दिया है. लगातार बढ़ रहे भूगर्भीय जल के दोहन और पराली से होने वाले वायु प्रदूषण को देखते हुए लखीमपुर खीरी के डीएम श्री शैलेन्द्र कुमार सिंह ने साठा धान की खेती पर पूरे जिले में रोक लगा दी है. यदि इस वर्ष किसान साठा धान की फसल रोपेंगे तो उनपर कार्यवाही की जाएगी. 

लखीमपुर खीरी में साठा धान की खेती पर प्रतिबंध - गोमती सेवा समाज व प्रकृति संरक्षणकर्ताओं के प्रयासों

उच्चतम न्यायालय और एनजीटी के निर्देश पर जिला प्रशासन के इस कदम से जिले में गोमती के हालात में कुछ हद तक सुधार अवश्य होगा, गोमती सेवा समाज ने प्रशासन के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि गोमती नदी के संरक्षण के लिए यह बेहद अच्छी खबर है. टीम गोमती सेवा समाज सहित बहुत से पर्यावरण विशेषज्ञ साठा धान की खेती के खिलाफ याचिका दायर कर चुके हैं, जिसका अभी तक कोई खास असर नहीं दिख रहा था.      

गौरतलब है कि साठा धान, धान की एक ऐसी किस्म है जो अत्याधिक पानी की खपत करता है. चैनी यानि चाईनीज धान के नाम से भी जाने जाना वाला यह धान पर्यावरण और पानी का दुश्मन है. सामान्यत: धान की फसल में दस से पंद्रह दिन के अंतराल पर पानी दिया जाता है, वहीं साठा धान की फसल को हर तीसरे दिन पानी की जरुरत होती है. मुख्य धान की फसल से एक एकड़ के हिसाब से लगभग 20 क्विंटल धान का उत्पादन होता है और साठा धान की फसल से यही उत्पादन 38 से 40 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच जाता है. इसी लाभ को देखते हुए किसान अधिक से अधिक साठा धान बोते हैं. जिससे उत्तर प्रदेश के अधिकतर जिलों में भूजल तेजी से नीचे जा रहा है, यहां तक कि प्राकृतिक जल के स्त्रोत भी इससे सूखने लगे हैं. खासतौर से लखीमपुर खीरी, पुवैयां, पीलीभीत आदि स्थानों पर इसका सर्वाधिक असर देखने को मिल रहा है.

यदि गोमती नदी की संरचना की बात की जाये तो  भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India) के पूर्व निदेशक वीके जोशी बताते हैं कि जहां गंगा-यमुना जैसी बड़ी नदियां पहाड़ों की बर्फ पिघलने से बनी नदियां हैं तो वहीं गोमती पूर्णत: भूजल सिंचित नदी है. उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में माधोटांडा स्थित फुलहर झील से गोमती उद्गमित होती हैं, जहां आगे जाने पर बहुत से ताल बने हैं. इन्हीं से गोमती को जल मिलता है और वह आगे बढ़ती है..लेकिन पिछले कुछ सालों से बरसात के बदलते पैटर्न से ये सभी प्राकृतिक स्त्रोत भी सूख गए हैं, जिससे गोमती भी अलग अलग स्थानों पर सूखने लगी है.  

गोमती सेवा समाज के सदस्यों ने गोमती यात्रा के अंतर्गत इस मुद्दे को उठाया था कि साठा धान के खेती से कैसे जगह जगह गोमती सूख रही है, उन्होंने तस्वीरों के जरिये समाज तक यह बात पहुंचाई कि पुरैनाघाट, टेढ़ेनाथ घाट, जंगलीनाथ घाट सहित और भी बहुत से स्थानों पर गोमती की धारा टूट चुकी है, जबकि इन सभी स्थानों पर गोमती पहले अच्छे प्रवाह के साथ बहा करती थी.    

इसी वर्ष अगस्त माह में भारतीय किसान यूनियन के वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष सरदार मंजीत सिंह ने भी साठा धान लगाने के खिलाफ एनजीटी में याचिका लगायी थी और इसे रुकवाने के खिलाफ भाकियू के सदस्य लगातार क्रियाशील भी हैं. उन्होंने याचिका में बताया था कि साठा धान की उपज से भूगर्भीय जल तो तेजी से घट ही रहा है अपितु इसमें दुगनी मात्रा में डाले जाने वाले फर्टिलाइजर से जमीन जहरीली हो रही है. इस धान की फसल में नमी अत्याधिक रहती है, जिससे कीटों का हमला दुगनी गति से होता है और जाहिर सी बात है इसमें फिर दुगनी-तिगुनी मात्रा में कीटनाशक भी डाला जाता है. इन सबका हानिकारक प्रभाव जल और जमीन पर तो पड़ता ही है बल्कि हमारे और पशुओं के खाद्य पदार्थों में भी यही जहर घुल रहा है और कैंसर जैसी बीमारी बढ़ रही है, लिहाजा इस पर रोक लगनी चाहिए. 

देश के दो राज्यों पंजाब और हरियाणा में पहले से ही साठा की बुवाई पर रोक लगी हुयी है, बता दें कि पंजाब सरकार ने वर्ष 2009 में पानी एक्ट लागू किया था, जिसके अंतर्गत 10 जून से पहले धान की बुवाई नहीं की जा सकती है. इसी तरह हरियाणा में भी मई से पहले धान की फसल तैयार करने पर रोक लगी हुयी है. वहीं इसके विपरीत शासन प्रशासन के लाख प्रयासों के बावजूद भी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में साठा की बुवाई तेजी से जारी रहती है. विशेषत: यहां के तराई क्षेत्र में किसान अधिक लाभ के लिए इसे आज भी उगा रहे हैं. कृषि वैज्ञानिक चेता चुके हैं कि अगर इसी गति से साठा धान की बुवाई जारी रही तो वह दिन दूर नहीं जब भू सिंचित जल के भंडार समाप्त हो जायेंगे और जमीन पूरी तरह बंजर हो जाएगी. यही स्थितियां रही तो तराई को बुंदेलखंड बनने से कोई नहीं रोक सकता है. 

लखीमपुर खीरी जिले में साठा पर रोक लगना सराहना का विषय है और यह इससे भी अधिक स्वागत योग्य कदम माना जायेगा यदि उचित कार्यवाही के साथ इसे लागू किया जा सके. किसानों को विचारगोष्ठी, सभाओं आदि के जरिये प्रगतिशील किसान इसके दुष्प्रभावों को समझाएं. साठा के स्थान पर मिश्रित कृषि की अवधारणा को किसानों के सम्मुख लाया लाया जाये, उन्हें उन्नतशील कृषि के लिए प्रोत्साहित किया जाये, जैविक कृषि को किसानों के लिए आसान बनाने के प्रयास किये जाये और सबसे प्रमुख बात नदियों के संरक्षण के साथ ग्रामीणों व किसानों को जोड़ा जाए. पर्यावरण और नदियों के संरक्षण के लिए लोगों में जागरूकता लानी होगी. 

Attached Images

Related Videos
Related Audio
Leave a comment for the team.
Subscribe to this research.
रिसर्च को सब्सक्राइब करें

Join us on the latest researches that matter.

इस रिसर्च पर अपडेट पाने के लिए और इससे जुड़ने के लिए अपना ईमेल आईडी नीचे भरें.

Responses

{{ survey.name }}@{{ survey.senton }}
{{ survey.message }}
Reply

How It Works

ये कैसे कार्य करता है ?

start a research
Follow & Join.

With more and more following, the research starts attracting best of the coordinators and experts.

start a research
Build a Team

Coordinators build a team with experts to pick up the execution. Start building a plan.

start a research
Fix the issue.

The team works transparently and systematically fixing the issue, building the leaders of tomorrow.

start a research
जुड़ें और फॉलो करें

ज्यादा से ज्यादा जुड़े लोग, प्रतिभाशाली समन्वयकों एवं विशेषज्ञों को आकर्षित करेंगे , इस मुद्दे को एक पकड़ मिलेगी और तेज़ी से आगे बढ़ने में मदद ।

start a research
संगठित हों

हमारे समन्वयक अपने साथ विशेषज्ञों को ले कर एक कार्य समूह का गठन करेंगे, और एक योज़नाबद्ध तरीके से काम करना सुरु करेंगे

start a research
समाधान पायें

कार्य समूह पारदर्शिता एवं कुशलता के साथ समाधान की ओर क़दम बढ़ाएगा, साथ में ही समाज में से ही कुछ भविष्य के अधिनायकों को उभरने में सहायता करेगा।

How can you make a difference?

Do you care about this issue? Do You think a concrete action should be taken?Then Follow and Support this Research Action Group.Following will not only keep you updated on the latest, help voicing your opinions, and inspire our Coordinators & Experts. But will get you priority on our study tours, events, seminars, panels, courses and a lot more on the subject and beyond.

आप कैसे एक बेहतर समाज के निर्माण में अपना योगदान दे सकते हैं ?

क्या आप इस या इसी जैसे दूसरे मुद्दे से जुड़े हुए हैं, या प्रभावित हैं? क्या आपको लगता है इसपर कुछ कारगर कदम उठाने चाहिए ?तो नीचे फॉलो का बटन दबा कर समर्थन व्यक्त करें।इससे हम आपको समय पर अपडेट कर पाएंगे, और आपके विचार जान पाएंगे। ज्यादा से ज्यादा लोगों द्वारा फॉलो होने पर इस मुद्दे पर कार्यरत विशेषज्ञों एवं समन्वयकों का ना सिर्फ़ मनोबल बढ़ेगा, बल्कि हम आपको, अपने समय समय पर होने वाले शोध यात्राएं, सर्वे, सेमिनार्स, कार्यक्रम, तथा विषय एक्सपर्ट्स कोर्स इत्यादि में सम्मिलित कर पाएंगे।
Communities and Nations where citizens spend time exploring and nurturing their culture, processes, civil liberties and responsibilities. Have a well-researched voice on issues of systemic importance, are the one which flourish to become beacon of light for the world.
समाज एवं राष्ट्र, जहाँ लोग कुछ समय अपनी संस्कृति, सभ्यता, अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझने एवं सँवारने में लगाते हैं। एक सोची समझी, जानी बूझी आवाज़ और समझ रखते हैं। वही देश संसार में विशिष्टता और प्रभुत्व स्थापित कर पाते हैं।
Share it across your social networks.
अपने सोशल नेटवर्क पर शेयर करें

Every small step counts, share it across your friends and networks. You never know, the issue you care about, might find a champion.

हर छोटा बड़ा कदम मायने रखता है, अपने दोस्तों और जानकारों से ये मुद्दा साझा करें , क्या पता उन्ही में से कोई इस विषय का विशेषज्ञ निकल जाए।

Got few hours a week to do public good ?

Join the Research Action Group as a member or expert, work with right team and get funded. To know more contact a Coordinator with a little bit of details on your expertise and experiences.

क्या आपके पास कुछ समय सामजिक कार्य के लिए होता है ?

इस एक्शन ग्रुप के सहभागी बनें, एक सदस्य, विशेषज्ञ या समन्वयक की तरह जुड़ें । अधिक जानकारी के लिए समन्वयक से संपर्क करें और अपने बारे में बताएं।

Know someone who can help?
क्या आप किसी को जानते हैं, जो इस विषय पर कार्यरत हैं ?
Invite by emails.
ईमेल से आमंत्रित करें
The researches on ballotboxindia are available under restrictive Creative commons. If you have any comments or want to cite the work please drop a note to letters at ballotboxindia dot com.

Code# 5{{ descmodel.currdesc.id }}

ज़ारी शोध जिनमे आप एक भूमिका निभा सकते है. Live Action Researches that might need your help.

Follow