समाज सेवक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रजनीकान्त दुबे पेशे से अधिवक्ता हैं और वर्तमान में लखनऊ कैंट विधानसभा से बतौर प्रत्याशी चुनावों में खड़े हुए हैं। मूलत: मऊ, उत्तर प्रदेश के भैरोपुर गांव के रहने वाले रजनीकान्त दुबे ने लखनऊ जनपद के बप्पा श्री नारायण डिग्री कॉलेज से 1992 में राजनीति शास्त्र से स्नातक किया और 1996 में जयनारायण डिग्री कॉलेज से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की है।
छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहते हुए उन्होंने लोक सेवा निहितार्थ कार्य किया। उन्होंने समाज सेवक पार्टी की स्थापना सभी वर्गों को समान अधिकार दिलाने के उद्देश्य से की है। बैलटबॉक्सइंडिया को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी की विचारधारा व अन्य दलों की भूमिका से जुड़े बहुत से मुद्दों पर चर्चा की।
अपने सामाजिक जीवन एवं राजनीति से जुड़े अनुभवों के बारे में हमें बताएं।
रजनीकान्त दुबे - 1989-90 में के के वी डिग्री कॉलेज से छात्र राजनीति की शुरुआत की। एक अधिवक्ता के साथ साथ दुबे कंस्ट्रक्शन के नॉर्थरन रेलवे की ठेकेदारी का व्यवसाय उस दौरान किया है। उसी समय से लोगों की सेवा वकालत के जरिए करनी शुरू की। लखनऊ बार एसोसिएशन से कार्यकारिणी सदस्य और वरिष्ठ मंत्री के पद की जिम्मेदारी हमने संभाली है।
आज भी अधिवक्ताओं व छात्रों का प्यार एवं स्नेह मेरे साथ बना हुआ है। पिताजी एक बेहद साधारण समाज सेवक थे, उत्तर रेलवे मजदूर यूनियन के केंद्रीय उपाध्यक्ष थे, उनसे मैंने गरीबों की सहायता करना एवं मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ना सीखा। मैंने 2004 में स्नातक विधान परिषद का चुनाव लड़ा, जिसे मैं हारा लेकिन समाज सेवा से कभी कदम पीछे नहीं हटाए। 2017 मैं मैंने अपने अनुभवों के आधार पर समाज सेवक पार्टी का निर्माण करते हुए लखनऊ कैंट से चुनावों में शिरकत की, भले ही उसमे पराजय मिली हो लेकिन आज पार्टी लखनऊ में मजबूती से चुनावों में खड़ी है।
आपकी समाज सेवक पार्टी की क्या विचारधारा है, उत्तर प्रदेश चुनाव 2022 के लिए आपका मेनीफेस्टो क्या है?
रजनीकान्त दुबे - देखिए आज जातिवाद और धर्मवाद बहुत गंभीर मुद्दे हैं, जिससे देश की रीढ़ कमजोर हो रही है। आज देश में तमाम दल जातिवाद-धर्मवाद पर चल रहे हैं, जिससे आपसी वैमनस्य बढ़ रहा है, देश टूट रहा है। चूंकि मेरा पेशा अधिवक्ता का है, इसलिए मैं संविधान के प्रत्येक अनुच्छेद से भली-भांति वाकिफ हूं, इसलिए मैंने सभी समाजसेवक पार्टी का निर्माण किया।
जनता के आर्थिक उत्थान, आर्थिक व सामाजिक विकास के लिए पार्टी कार्य कर रही है। पार्टी का दृष्टिकोण लोकतांत्रिक व धर्मनिरपेक्ष है, सांप्रदायिक ताकतों और आतंकवाद के खिलाफ पार्टी सदैव खड़ी हैं। पार्टी का कोई चुनावी मेनीफेस्टो नहीं है क्योंकि जिस प्रकार जनता की समस्याएं होंगी, उसी प्रकार पार्टी काम करेगी। हमारी पार्टी का संविधान ही हमारा मेनीफेस्टो है।
आपके विधानसभा क्षेत्र में ऐसे कौन से ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर आप आने वाले समय में काम होते देखना चाहते हैं?
रजनीकान्त दुबे - समस्त लखनऊ की नौ विधानसभाओं की सबसे बड़ी समस्या यही है कि सरकार ने लखनऊ को सीवर मुक्त कराने के चक्कर में समस्त सड़कों को गड्ढायुक्त कर दिया है। पिछले छह महीने से सड़कें इसी प्रकार टूटी-फूटी पड़ी हुई हैं।
इसके अतिरिक्त लखनऊ में भाजपा सरकार ने सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था नहीं की है, जिससे आमजन को परेशानी होती है। समाज सेवक पार्टी यदि भविष्य में आती है तो विधानसभा क्षेत्र में उचित दूरी पर सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण करके इस समस्या को दूर करने का प्रयास करेगी।
कैंट विधानसभा क्षेत्र में इसके साथ ही जल निकासी, स्वच्छता समस्या है। क्षेत्र में एक विशेष समस्या यह भी है कि सरकार ने कदम कदम पर रेड लाइट लगाई है, जो आपातकालीन रोगियों के लिए बड़ा खतरा है। पार्टी जीतने पर क्षेत्र में इस समस्या पर काम करेगी और विधानसभा क्षेत्र में बड़े अस्पतालों का भी निर्माण कराएगी।
आपके अनुसार देश में कौन से ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर सरकार को विशेष ध्यान देना चाहिए?
रजनीकान्त दुबे - आज सबसे बड़ी समस्या देश में रोटी, कपड़ा और मकान की है। कभी हमारा देश सोने की चिड़िया कहलाता था, लेकिन आज हमने वर्ल्ड बैंक से इतना अधिक कर्जा ले लिया है कि उसे वापस करना मुश्किल हो रहा है। जनता से बेतहाशा टैक्स लेकर सरकार राजनीतिज्ञों को तो सुविधा दे रही है लेकिन आम जनता के पास कोई सुख सुविधा नहीं है।
आप बैलटबॉक्सइंडिया के मंच के माध्यम से जनता को क्या संदेश देना चाहेंगे?
रजनीकान्त दुबे - मैं उत्तर प्रदेश की जनता से करबद्ध निवेदन करता हूं कि आज तक आपने तमाम पार्टियों को अवसर दिया है, एक बार आप समाज सेवक पार्टी को भी मौका दें। भले ही हम चार विधानसभा यानि कैंट, पूर्वी लखनऊ, मध्य लखनऊ और मोहनलालगंज विधानसभा से ही चुनावों में खड़े हों लेकिन आप हमें केवल एक बार अवसर दें। एक बार चारों विधायकों को विजयी बनाकर उनकी योग्यता को परखें और यदि वास्तव में जीत के बाद इन क्षेत्रों में विकास नहीं होता तो मेरा वायदा है कि पार्टी कभी जनता के दरवाजे पर वोट नहीं मांगेगी।