Mobassir Ahmad
B.T.P.P(Begusarai-Begusarai-851116)नाम : मोबस्सीर अहमद पद : राष्ट्रीय परिषद सदस्य, भाकपा (माले), (बेगुसराय) नवप्रवर्तक कोड : 71185298 परिचय - साहेबपुर कमाल विधानसभा क्षेत्र के बरौनी गांव में राजनीतिक तौर पर सक्रिय मोबस्सीर अहमद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) से जुड़
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Parties and institutions Mobassir Ahmad is linked to. Estimated from public activity.
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Biography & background — self/editorially authored, may be outdated
नाम : मोबस्सीर अहमद
पद : राष्ट्रीय परिषद सदस्य, भाकपा (माले), (बेगुसराय)
नवप्रवर्तक कोड : 71185298
परिचय -
साहेबपुर कमाल विधानसभा क्षेत्र के बरौनी गांव में राजनीतिक तौर पर सक्रिय मोबस्सीर अहमद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) से जुड़ें एक युवा नेता हैं, जो बेबाकी से अपने विचार रखने के लिए जाने जाते हैं। एक साधारण परिवार से आने वाले मोबस्सीर अहमद शोषितों, वंचितों, मजदूरों और दबे-कुचले वर्ग का उत्थान करने के उद्देश्य से राजनीति का हिस्सा बनें।

वह भाकपा (माले) का सक्रिय हिस्सा होने के साथ साथ बेगूसराय जिले से इंकलाबी नौजवान सभा के जिला संयोजक भी हैं और क्रांतिकारी यूथ एसोसिएशन में सदस्य के तौर पर अपनी सक्रियता बनाए हुए हैं। मोबस्सीर अहमद ने 2015 में साहेबपुर कमाल विधानसभा में विधायक प्रत्याशी के तौर पर अपनी उम्मीदवारी भी पेश की थी और मौजूदा वक्त में वह अन्याय-अनाचार के खिलाफ आवाज उठाते हुए संघर्षरत रहते हैं।

राजनीति में आगमन और भावी विज़न -
राजनीति में मोबस्सीर अहमद ने 2015 में विधानसभा चुनावों के जरिए प्रवेश किया, उस समय उन्हें परिवार का विरोध भी झेलना पड़ा, लेकिन उन्होंने इसके बाद से अपने कदम पीछे नहीं हटाए। उनके दादा जी स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे थे, उनके भाई भी कम्युनिस्ट रहे, इसलिए उन्होंने भी राजनीति के जरिए सामाजिक कुरीतियों और भेदभाव को खत्म करने का निश्चय किया और भाकपा (माले) का हिस्सा बनते हुए शहीद भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और निर्भय क्रांतिकारी अशफ़ाक उल्ला खान के पदचिन्हों पर चलना तय किया।

चुनावों में शिरकत के साथ साथ उन्होंने बहुत से सामाजिक मुद्दों पर भी आंदोलन किए और गरीब-मजलूमों की आवाज बनें। पद और धन के दुरुपयोग से शोषितों, गरीबों और वंचितों के अधिकारों का हनन करने वाले बाहुबलियों के खिलाफ उन्होंने हमेशा आवाज बुलंद की, चाहे वह गरीब लोगों की मॉब लिंचिंग का मामला हो, या छात्रों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा। इसके लिए मोबस्सीर अहमद को बहुत बार जान से मारने की धमकियाँ भी दी गई लेकिन उन्होंने निडर होकर हालातों का सामना किया और आज भी अत्याचार के खिलाफ उनका आंदोलन जारी है।

भावी विज़न -
राजनीति में शामिल होकर मोबस्सीर अहमद स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के मुद्दों को प्रमुखता से आगे रखना चाहते हैं। उनका मानना है कि यदि यह मूलभूत समस्याएं ही नहीं होंगी तो राष्ट्र अपने आप तरक्की की ओर जाएगा। उनके अनुसार यह बेहद अफसोस की बात है कि हर सरकार चुनाव से पहले वादे तो बड़े बड़े करती है लेकिन सत्ता मिलते ही सभी वादों को भूल जाती है।

इसके साथ ही उनका कहना है कि आजकल राजनीति में इतनी अधिक भ्रष्टाचारी है कि दबे-कुचले लोगों की आवाज पंचायत स्तर पर भी दबा दी जाती है तो सोचने वली बात है कि विधायक या सांसदों तक तो कभी वंचित लोगों के मुद्दे पहुँच ही नहीं पाते होंगे। इसी व्यवस्था के खिलाफ लड़ने के लिए उन्होंने राजनीति का रुख किया है और इसे भावी विज़न के तौर पर रखते हुए वह हाशिये पर खड़े लोगों की आवाज बने हुए हैं।

मोबस्सीर अहमद ने युवाओं को रोजगार मामले पर झूठे सरकारी दावों के खिलाफ विधानसभा के घेराव की तैयारी भी युवा साथियों के साथ ही थी लेकिन उन्हें बीच में सरकार की जनविरोधी नीति के चलते रोक लिया गया और उनका स्वागत आंसू गैस, पानी की बौछारों और लाठी चार्ज के साथ किया गया। उनका कहना है कि वह रुकेंगे नहीं बल्कि हर उस मुद्दे पर खड़े होंगे, जहां अन्याय किया जा रहा है।

स्थानीय समस्याएं/विशेषताएं -
मोबस्सीर अहमद बताते हैं कि उनका क्षेत्र औद्योगिक इलाका है और यहां छोटे-बड़े बहुत से कारखाने स्थापित हैं, जिनमें रिफाईनरी से लेकर कार्बन फैक्ट्री, ऑक्सीजन कारखाना, सुई फैक्ट्री इत्यादि मौजूद हैं और यह इस क्षेत्र की सबसे बड़ी खूबी भी है।

लेकिन इसके ठीक विपरीत इतने उद्योगों के होने के बावजूद भी यहां की स्थानीय जनता को रोजगार के लिए अन्य क्षेत्रों में पलायन करना पड़ता है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। यहां दलाली इतनी अधिक है कि बाहर की लोगों को यहां रोजगार मिल जाता है लेकिन क्षेत्र के लोगों को दरकिनार कर दिया जाता है।

इसके साथ साथ बरौनी क्षेत्र में स्थित सरकारी विद्यालयों, आंगनवाड़ी आदि में शिक्षकों की कमी है, यहां बच्चों को दाल/खिचड़ी तो दे दी जाती है पर शिक्षा नहीं। मोबस्सीर अहमद का कहना है कि यही हाल उच्च शिक्षा के लिए स्थापित की गई यूनिवर्सिटीस का है, जहां प्रोफेसर ही नहीं हैं। सरकारी सुविधाओं के नाम पर यहां जनता को कुछ भी नहीं दिया जाता है। मोबस्सीर अहमद इस फेल सिस्टम के खिलाफ कहते हैं कि जरूरी नहीं कि सरकार बच्चों को खिचड़ी या छात्रवृति के नाम पर भीख दें, आज जरूरत है कि बच्चों को उचित शिक्षा और अच्छे अध्यापक मिले ताकि उनका भविष्य संवर सके।
स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए मोबस्सीर अहमद कहते हैं कि हाल में जिस तरह कोरोना काल चल रहा है, यहां के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में उसे लेकर किसी प्रकार की सुविधा नहीं है। यहां सदर में स्थापित सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में कोरोना जांच किट नहीं है, वैक्सीनैशन की सुविधा नहीं है, यहां तक कि दवाइयाँ, इन्जेक्शन और ऑक्सीजन तक का यहां अभाव है, जबकि बिहार सरकार दावे कर रही है कि बिहार में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है।
युवाओं को संदेश -
मोबस्सीर अहमद देश के युवाओं को संदेश देते हुए कहते हैं कि हमारे संविधान निर्माता बाबा साहब अंबेडकर ने सभी को समान अधिकार दिए हुए हैं लेकिन वर्तमान समय में सरकार इन सभी अधिकारों का हनन करने का मन बना चुकी है। इसलिए आज के समय में संविधान को बचाना प्राथमिकता बन चुकी है और देश के युवा वर्ग को इस दिशा में जरूर आगे आना चाहिए।

आज सरकार युवाओं से किए गए वादों में हर मोर्चे पर विफल हुई है, न ही रोजगार है, न ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा। कोरोना के समय में भी आज सरकार की असफलता देखी जा सकती है। मोबस्सीर अहमद कम्युनिस्ट विचारधारा के साथ कहते हैं कि आज समय है कि सरकार को जनता की खासकर युवाओं की ताकत का अहसास कराया जाए और इसके लिए जरूरी है कि विपक्ष मजबूत हो। अब लोगों को खुद ही अपने अधिकारों के लिए जागरूक होकर एकजुटता के साथ आगे बढ़ना होगा।
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