नाम : जय प्रकाश
पद : उपाध्यक्ष, दिल्ली बीजेपी
नवप्रवर्तक कोड़ : 71182900
जय प्रकाश यानी जेपी भाई एक राजनीतिक नाम है. जय प्रकाश जी दिल्ली बीजेपी का जाना पहचाना चेहरा हैं. फिलहाल वह दिल्ली बीजेपी के उपाध्यक्ष हैं तो वहीं सदर बाजार से निगम पार्षद भी.
उन्होंने दिल्ली मैं हुए पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान भी अपनी किस्मत आजमाई थी मगर आम आदमी पार्टी की जबरदस्त हवा के बावजूद वह महज सात सौ वोटों से चुनाव हार गए.
जय प्रकाश जी का जन्म बेहद ही साधारण परिवार में हुआ. उनके माता-पिता मजदूरी करते थे और साथ ही दूध बेच कर जीवन यापन किया करते थे. जय प्रकाश का परिवार बहुत ही बड़ा है वह कुल सात भाई और पांच बहने हैं और सभी एक ही साथ रहते हैं. उनके पिताजी भी पांच भाई थे और वह सभी भाई भी एक साथ ही रहा करते थे. खत्म होती संयुक्त परिवार की संरचना को आज भी जयप्रकाश जी का परिवार बखूबी साथ लेकर चल रहा है, उसे निभा रहा है. आज भी सभी भाई मिलकर घर का फैसला लेते हैं. इस तरह का परिवारिक प्रेम अब शायद ही देखने को मिलता हो.

सदर बाजार दिल्ली का वह इलाका है जिसे लोग असली दिल्ली यानी पुरानी दिल्ली के तौर पर पहचानते हैं. अगर आप भारतीय फिल्मों के शौकीन हैं तो आपको कुछ वर्ष पहले आई फिल्म दिल्ली-6 याद होगी. जी हां सदर बाजार दिल्ली का वही इलाका है जिसे दिल्ली-6 के नाम से जाना जाता है. पुरानी दिल्ली के सदर बाजार का इलाका पूरी दिल्ली के साथ साथ पूरे भारत में सबसे बड़े होलसेल मार्केट के तौर पर जाना जाता है. जयप्रकाश जी सदर बाजार में ही पले-बढ़े और अपनी प्राथमिक शिक्षा उन्होंने वहीं बगल के क्षेत्र पहाड़गंज से की. उन्होंने आगे चलकर अपना स्नातक दिल्ली विश्वविद्यालय के अरविंदो कॉलेज से पूर्ण की. राजनीति में मंझे और सामाजिक तौर पर बेहद सक्रिय जय प्रकाश जी अपने छात्र जीवन से ही राजनीति प्रारंभ कर दी थी. वह एबीवीपी यानी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सक्रिय सदस्य रहे हैं. उन्होंने स्नातक के दौरान छात्रसंघ चुनाव दो भांगड़ा और जिनमें उन्होंने दोनों ही बार जीत हासिल की वह छात्रों में बेहद लोकप्रिय थे क्योंकि उन्हें छात्रों की समस्याओं को लेकर काम करना बेहद ही पसंद था और इसीलिए काफी लोग उनसे आस लगाए रहते थे.

बाल्यकाल से ही जय प्रकाश जी स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए थे और अपने राजनीतिक जीवन के साथ-साथ खुद के जीवन में भी संघ का बहुत बड़ा योगदान वह मानते हैं. वह बताते हैं कि सामाजिक तौर पर या लोगों के प्रति काम करने की भावना और जो संस्कार प्राप्त हुए वह उन्हें स्वयंसेवक संघ के द्वारा ही मिला. संघ के कारण ही उन्हें टीम के साथ कार्य करना, विपरीत परिस्थितियों में काम करना, निस्वार्थ होकर सेवा भावना से काम करना संघ की शाखा जाकर ही वह इन सभी चीजों को सीख पायें. जय प्रकाश जी बताते हैं कि संगठन के कारण ही उनमें विश्वास पैदा हुआ. उनके अनुसार दिल्ली विधानसभा का चुनाव वह महज सात सौ वोटों से हार गए मगर संघ ने उन्हें हमेशा सिखाया की हिम्मत कभी भी मत हारों, दृढ़ इच्छाशक्ति से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहो. खुद के लिए नहीं लोगों के लिए काम करो. यही वजह है कि बचपन से लेकर अब तक वह सामाजिक, राजनीतिक और परिवारिक जीवन में सभी के लिए काम कर रहे हैं और सामंजस्य बैठा कर आगे बढ़ रहे हैं. जय प्रकाश कहते हैं कि निसंदेह संघ के कारण हे मेरे जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आया है.

जय प्रकाश जी बताते हैं कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और साथ ही भारत में यह परंपरा रही है और लोग इसे मानते रहे हैं कि नर सेवा का मतलब नारायण सेवा है और इसीलिए अपने बुजुर्गों से उन्होंने जो सीखा उसे वह राजनीति में आकर बेहतर ढंग से कर सकते थे और यही वजह बनी कि वह राजनीतिक जीवन में बेहद सक्रिय हैं और निरंतर लोगों के लिए कार्य कर रहे हैं.
जय प्रकाश जी निगम पार्षद होने के नाते और पहले से भी अपने इलाके की समस्याओं को निपटाने के लिए हमेशा से जुटे रहते थे. उनकी दिनचर्या में शामिल है कि वह सुबह आठ बजे से बारह बजे तक दिन में आम लोगों की समस्या सुना करते हैं और उसके निपटारे के लिए कार्य करते हैैं.
सदर बाजार का इलाका रिहायशी इलाका होने के साथ-साथ कमर्शियल इलाका भी है इसलिए यह जरूरी है कि परस्पर इनमें तालमेल बना रहे और उसके लिए जय प्रकाश जी प्रयासरत रहते हैं. जय प्रकाश बताते हैं कि उनके इलाके में ट्रैफिक की, शिविर की, पानी, बिजली के तारों की, एनक्रोचमेंट इन सभी चीजों की बहुत समस्याएं हैं जिसके लिए लगातार काम करने की जरूरत है और इसीलिए वह समय समय पर संबंधित विभागों के जुड़े अफसरों के साथ इस पर बातचीत करते हैं और इसे सुलझाने में हमेशा लगे रहते हैं. वह बताते हैं कि त्यौहारों के दौरान यहां की ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा जाती है तो वैसे ही स्थिति में यह एक बहुत ही साधारण कार्य था कि उन्होंने अफसरों से बात कर के बीच में बैरिकेट लगवा दिया जिससे ट्रैफिक की स्थिति सामान्य हो गई. ऐसे ही जरा जरा से काम है जिसे हम अनदेखा नहीं कर सकते बल्कि लगातार इस पर काम करने की जरूरत है.

राजनीति में बखूबी अपनी पहचान बना चुके जय प्रकाश सिर्फ राजनीति में ही नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारियों को भी उतने ही मुस्तैदी से निभा रहे हैं. अपनी राजनीतिक व्यस्तता के बावजूद वह श्रीराम यूथ वेलफेयर एसोसिएशन के संस्थापक है और निरंतर उसके लिए भी वह कार्य कर रहे हैं. आप की राजनीतिक तत्परता और सामाजिक सोच वाकई लोगों के लिए एक मिसाल है.