Brajesh Katheriya Kishni
Madhukarpur(Mainpuri-Bhongaon-206302)नाम- बृजेश कठेरिया पद- विधायक(सपा), किशनी(मैनपुरी), उत्तर प्रदेशनवप्रर्वतक कोड- 71189441परिचयबृजेश कठेरिया भारतीय राजनीति के सक्रिय नेता हैं और उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में स्थित किशनी विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान विधायक हैं। वे समाजवादी पार्टी (स
Biography & background — self/editorially authored, may be outdated
नाम- बृजेश कठेरिया
पद- विधायक(सपा), किशनी(मैनपुरी),
उत्तर प्रदेश
नवप्रर्वतक कोड- 71189441

परिचय
बृजेश कठेरिया भारतीय राजनीति के सक्रिय नेता हैं और उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में स्थित किशनी विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान विधायक हैं। वे समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता हैं और अपने क्षेत्र में लंबे समय से साइकिल का झंडा बुलंद करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। किशनी विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और यह सपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है 1993 से लगातार यहां सपा के प्रतिनिधि विधानसभा पहुँचे हैं।
प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा
बृजेश कठेरिया का जन्म 20 जुलाई 1968 को उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में हुआ था। वे अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं। उनके पिता का नाम जगदीश सिंह कठेरिया है। शिक्षा की दृष्टि से उन्होंने स्नातक की
डिग्री प्राप्त की और साथ ही इंजीनियरिंग डिप्लोमा भी किया था,
जिससे वे तकनीकी और प्रबंधन-सीख दोनों क्षेत्रों से परिचित रहे।
प्रोफ़ेशनल
रूप से वे किसान और सामाजिक कार्यकर्ता हैं —
चुनावी घोषणा-पत्रों में उन्होंने कृषि और समाजसेवा को अपने जीवन-मूल्य बताया है। पारिवारिक जीवन में उनके जीवन-साथी का नाम नीता कुमारी है और उनके दो पुत्र और दो पुत्रियाँ हैं।
राजनीतिक करियर की शुरुआत
बृजेश कठेरिया का राजनीतिक सफ़र किशनी विधानसभा के स्थानीय राजनीति से शुरू हुआ। समाजवादी पार्टी की विचारधारा और सामाजिक न्याय के संदेश ने उन्हें सपा से जुड़ने में प्रेरित किया। किशनी सीट पर सपा की मजबूत पकड़ हमेशा से रही है; वहां से रामेश्वर दयाल वाल्मीकि, संध्या कठेरिया आदि सहित सपा उम्मीदवारों ने लगातार विजय प्राप्त की है।

विधानसभा चुनाव एवं जीत का रिकॉर्ड
2012 विधानसभा चुनाव
पहली बार बृजेश कठेरिया 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर किशनी से मैदान में उतरे और जीत दर्ज की। यह उनके राजनीतिक कैरियर का पहला महत्वपूर्ण चुनावी विजय था।
2017 विधानसभा चुनाव
2017
में भी सपा ने उन्हें अपनी पैदाइशी सीट किशनी से प्रत्याशी बनाया। बृजेश ने बीजेपी के सुनील कुमार जाटव को लगभग 16,000 मतों से हराकर दूसरी बार विधानसभा सदस्य के रूप में विजय प्राप्त की।
2022 विधानसभा चुनाव
2022 के चुनावों में बृजेश कठेरिया ने तीसरी बार लगातार विजय हासिल की और किशनी विधानसभा का प्रतिनिधित्व जारी रखा। इस प्रकार वे तीन-बार विधायक रह चुके हैं — जो दिखाता है कि उनके प्रति जनता का भरोसा मजबूत है और सपा की कड़ी पकड़ किशनी पर बरकरार है।
विधायी भूमिका एवं ज़िम्मेदारियाँ
एक विधायक के रूप में बृजेश कठेरिया की प्रमुख जिम्मेदारियाँ हैं:
विधानसभा में सदस्यीय भागीदारी: वार्षिक सत्रों में प्रश्न, प्रस्ताव और संदर्भ समिति में सक्रिय भागीदारी करना ज़रूरी है।
स्थानीय समस्याओं पर आवाज़ उठाना: ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों के मुद्दे –
जैसे सड़क, नालों की सफ़ाई, सरकारी सुविधाओं की अनुपलब्धता आदि –
सदन या प्रशासन के सामने उठाना।
सरकारी योजनाओं का लाभ: केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को लागू करवाना और उनका असर जनता तक पहुंचाना।
स्थानीय प्रशासन से समन्वय: एसडीएम, तहसील और विभागीय अधिकारियों के साथ मिलकर क्षेत्र के विकास की गति बढ़ाना।

स्थानीय विकास कार्य एवं पहलें
बृजेश कठेरिया के कार्यकाल के दौरान किशनी विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए कई पहलें और जन-उन्मुख गतिविधियाँ की गईं —
जिनमें से कुछ प्रमुख हैं:
आधारभूत संरचना गतिविधियाँ
सड़कों की मरम्मत और रख-रखाव की मांग लगातार उठाई गई,
जैसे निरीक्षण भवन के रख-रखाव और नालों की सफ़ाई पर उन्होंने स्थानीय प्रशासन से सुधार की माँग की।
समाजिक एवं निष्पक्ष प्रतिनिधित्व
अवैध कब्जों के प्रति कठोर रुख रखते हुए उन्होंने समर्थकों के साथ धरना भी दिया, ताकि सरकारी ज़मीन को स्वामित्व-हीन अवैध कब्ज़ों से वापस लिया जा सके।
ऐसी गतिविधियाँ स्थानीय जनता के लिए सक्रिय प्रतिनिधित्व की तरफ़ उनके रुख़ को दर्शाती हैं, और साथ ही विधान सभा सदस्य होने के नाते प्रशासन के साथ तालमेल को भी उजागर करती हैं।

राजनीतिक छवि और जनता-संपर्क
बृजेश कठेरिया को किशनी क्षेत्र में जनवाद, सामाजिक न्याय और सक्रियता के नेता के तौर पर देखा जाता है। सपा की विचारधारा और यादव-अन्य पिछड़ा समुदाय के समर्थन से वे लंबे समय से क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

आलोचनाएँ एवं विवाद
जैसे किसी भी लोकतांत्रिक नेता के साथ होता है,
बृजेश कठेरिया पर भी कुछ सार्वजनिक आलोचनाएँ और विवाद सामने आए हैं:
दिव्यांग के आरोप
कुछ स्थानीय मामलों में एक दिव्यांग व्यक्ति ने भूख हड़ताल करते हुए उन पर धमकी देने और अवैध कब्ज़ा हटाने के मामले में असमंजस की बात कही; हालांकि विधायक का कहना था कि वे कब्ज़ हटवाना चाहते थे।
आचार संहिता उल्लंघन एफआईआर
एक रिपोर्ट में उनकी वायरल ऑडियो के आधार पर आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज हुआ था,
जिसमें कथित रूप से कुछ संदिग्ध निर्देशों को लेकर जांच की गई।
ये मामले दर्शाते हैं कि नियमित राजनीतिक जीवन के साथ विवाद और आलोचना भी जुड़ी रहती है,
लेकिन उनके कार्यकाल का बड़ा हिस्सा विकास कार्यों और जनसमस्याओं के समाधान पर केंद्रित रहा है।
निष्कर्ष – समग्र राजनीतिक आकलन
बृजेश कठेरिया एक ऐसे नेता हैं जिन्होंने किशनी विधानसभा में लगातार तीन बार विजय हासिल करके अपनी पहचान बनाई है।
सपा के मजबूत गढ़ किशनी में उन्होंने जनहित, सामाजिक न्याय और स्थानीय मुद्दों पर सक्रिय समर्थन की छवि बनाई है। हालांकि आलोचनाएँ भी सामने आई हैं, लेकिन उनके विधान सभा में लगातार चुने जाने से यह स्पष्ट होता है कि जनता की अपेक्षाएँ और प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन उन्होंने स्थापित किया है।
उनकी राजनीतिक यात्रा विधानसभा सदस्यता से आगे बढ़ते हुए क्षेत्रीय राजनीति में सपा की पकड़ को मजबूत करने वाली रही है,
और आने वाले राजनैतिक वर्षों में उनका रोल समाजवादी विचारधारा के तहत जनहित को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण बना रहेगा।
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