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District

Mainpuri

मैनपुरी डिस्ट्रिक्ट आगरा मंडल के अंतर्गत आता है. मैनपुरी अपनी ठेठ बोली के कारण उत्तर प्रदेश में काफी मशहूर है. कला और शिल्प उत्पाद जैसे लकड़ी की मूर्तियां, कांच की माला, क्लासिक जरी के काम, रेशम की साड़ी, मिट्टी के बर्तन, कालीन के लिए प्रसिद्ध ये जिला अपने भारतीयता के लिए जाना जाता है. ऐतिहासिक परिदृश्य- मैनपुरी, कन्नौज मंडल के मुख्य जिलों में से एक है. राज्य के पतन के बाद इसे रियासतों में विभाजित किया गया था, जिनमें से राफरी और भोंगांव प्रमुख रहे। 1194 में राफरी को मु

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Reference data & background — source: Census 2011 & editorial notes, may be outdated

मैनपुरी डिस्ट्रिक्ट आगरा मंडल के अंतर्गत आता है. मैनपुरी अपनी ठेठ बोली के कारण उत्तर प्रदेश में काफी मशहूर है. कला और शिल्प उत्पाद जैसे लकड़ी की मूर्तियां, कांच की माला, क्लासिक जरी के काम, रेशम की साड़ी, मिट्टी के बर्तन, कालीन के लिए प्रसिद्ध ये जिला अपने भारतीयता के लिए जाना जाता है.

ऐतिहासिक परिदृश्य-

मैनपुरी, कन्नौज मंडल के मुख्य जिलों में से एक है. राज्य के पतन के बाद इसे रियासतों में विभाजित किया गया था, जिनमें से राफरी और भोंगांव प्रमुख रहे। 1194 में राफरी को मुस्लिम गवर्नर का गढ़त बनवा दिया गया. मैनपुरी 18 वीं शताब्दी के अंत में बेहतर स्वरूप पा चुका था. इसके बाद अवध प्रांत का हिस्सा बन गया.

बाद में मैनपुरी जिला अंग्रेजों को सौंप दिया गया था. वर्ष 1801 में मैनपुरी शहर इटावा जिले का मुख्यालय बन गया. सन् 1585 में मैनपुरी में तैनात रेजिमेंट ने विद्रोह किया और कस्बे पर हमला किया था.

प्रशासनिक ढ़ाचा-

मैनपुरी जिले में 6 तहसील शामिल हैं, जिनका नाम मैनपुरी, भोंगांव, करहल, किशनी, कुरावली और घिरोर है. यह उत्तर दिशा में एटा जिले, पूर्व में फर्रुखाबाद और कन्नौज, दक्षिण दिशा से जिला इटावा और पश्चिम की ओर से फिरोजाबाद और एटा जिले से घिरा है. यह उत्तरी अक्षांश 260 53' से 270 31' और पूर्वी अक्षांश 780 27' से 790 26' के बीच स्थित है.

जनसंख्या एवं साक्षरता दर-

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार मैनपुरी जिले की कुल जनसंख्या 1,847,194 है, जिसमें से पुरुषों की संख्या 9,93,000 औऱ महिलाओं की संख्या 8,75,000 है. यह जनसंख्या 2001 के मुकाबले 2011में 15.69% अधिक है. मैनपुरी में हर 1000 पुरुषों पर लिंगानुपात 876 है. जिले की साक्षरता दर देखें तो कुल दर 78.26% है.

जलवायु-

उत्तर प्रदेश के इस शहर में मौसम सभी प्रकार से अपने रूप दिखाता है. यहां तपती गर्मी के अलावा कड़ाके की ठंड और बारिश का सुहावना मौसम भी देखा जाता है.

यहां दोमट, मोटियार आदि प्रकार की मिट्टी पायी जाती हैं. क्षेत्र में मौसम के अनुसार विभिन्न प्रकार की फसलों का पैदावार होती है.

भाषा-

मैनपुरी में बहु भाषा बोलने वाले लोग रहते हैं. वर्ष 1971 तक मैनपुरी में लगभग दो दर्जन भाषाएं मौजूद थीं. रिपोर्ट्स की मानें तो वर्तमान में लगभग 97% लोग हिंदी बोलते हैं, 2% लोग उर्दू बोलते हैं और शेष 1% अन्य भाषाओं जैसे बंगाली, सिंधी, पंजाबी, अंग्रेजी और कई अन्य बोलते हैं. हिंदी बोली ब्रजभाषा, भदौरी; बुंदेली भाषाएं भी क्षेत्र में बोली जाती है.

संस्कृति एवं विरासत-

प्रारंभ से ही मैनपुरी पर मुगलों, मराठों, अफगानों और नवाबों द्वारा विभिन्न समय पर यहां शासन किया गया था. उनमें से मुगल और नवाबों ने अपने शासन के दौरान संगीत, नृत्य, वास्तुकला, कला और शिल्प को प्रभावित किया. जिससे आज भी शहर को जाना जा रहा है. हिंदू, मुस्लिम, जैन, बौद्ध, ईसाई और सिख सभी धर्मों के लोग यहां एक साथ रहते हैं. मैनपुरी के त्योहार इस शहर को जीवंतता प्रदान करते हैं. जो बहु-जाति और बहु-धर्म लोगों के बीच एकता पैदा करते हैं.

वैदिक धर्म, अनुष्ठानों के अलावा यहां का प्रसिद्ध मेला मार्च या अप्रैल में शीतला देवी मंदिर में आयोजित किया जाता है. नौ दुर्गा या नवरात्री देवी के नौ रूपों की उपासना के लिए देश भर में प्रसिद्ध है. इन नौ दिनों के दौरान कई स्थानीय लोग भी उपवास रखते हैं और पुरुष अपनी दाढ़ी या मूंछ भी नहीं काटते हैं.

मैनपुरी के अधिकांश कला और शिल्प रूप मुगल डिजाइनों को दर्शाते हैं. हिंदुस्तानी, ग़ज़ल और कव्वाली यहां के पारंपरिक संगीत हैं. लोक गीत रसिया जो भगवान कृष्ण और राधा के दिव्य प्रेम को दर्शाता है, मैनपुरी में भी लोकप्रिय है. शास्त्रीय नृत्य रूप कथक और लोक नृत्य चारुकाला शहर और इसकी राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है. मैनपुरी में त्योहारों के मौसम के दौरान भगवान राम के जीवन का वर्णन करने वाली रामलीला का मंचन किया जाता है.

पर्यटन-

जिला मुख्यालय होने के कारण ये मेले बड़ी संख्या में पर्यटकों और पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. मैनपुरी में दशहरा और रामलीला जैसे त्यौहारों का मंचन किया जाता है. ग्राम बिधूना, मैनपुरी में सबसे बड़े स्नान मेले का आयोजन कार्तिक पूर्णिमा को होता है. इसके अलावा क्षेत्र में कई मंदिर एवं धार्मिक स्थल हैं.

महाराजा तेज सिंह फोर्ट-

चौहान राजवंश के कई शासकों ने मैनपुरी पर शासन किया है. महाराजा तेज सिंह चौहान को यहां का लोकप्रिय शासक माना जाता है, क्योंकि वे भारत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ रहे और उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई। महाराजा तेज सिंह चौहान चौहान वंश के अंतिम शासक थे. उनका यह भव्य किला उनकी गौरव गाथा गाता है. 

समन अभयारण्य-

वर्ष 1990 में क्षेत्र में सॉर्स क्रेन के लिए अधिसूचित किया गया था. यह लगभग 5.25 वर्ग किमी में फैला  है. अभयारण्य में चित्रित सारस, काली गर्दन वाले सारस, खुले-बिल वाले सारस और ऊनी गर्दन वाले सारस शामिल हैं.

Reference-

https://mainpuri.nic.in/

http://cgwb.gov.in/District_Profile/UP/Mainpuri.pdf

http://www.nicra-icar.in/nicrarevised/images/statewiseplans/Uttar%20Pradesh/UP61-Mainpuri-28.07.14.pdf

https://www.districtsofindia.com/uttarpradesh/mainpuri/agriculture/index.aspx

https://www.jagran.com/uttar-pradesh/mainpuri-rain-after-dust-storm-19374032.html

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