Banslal Katiyar
Kashipur(Kanpur Dehat-Rura-209303)नाम : बंसलाल कटियार पद : प्रदेश उपाध्यक्ष (लोकतन्त्र रक्षक सेना), कानपुर देहात नवप्रवर्तक कोड : 71183181 जीवन परिचय - बंसलाल कटियार का जन्म 1946 के जुलाई माह में हुआ था. उन्होंने राजनीति शास्त्र से एमए की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद वे राजनीति में आ
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नाम : बंसलाल कटियार
पद : प्रदेश उपाध्यक्ष (लोकतन्त्र रक्षक सेना), कानपुर देहात
नवप्रवर्तक कोड :
जीवन परिचय -
बंसलाल कटियार का जन्म 1946 के जुलाई माह में हुआ था. उन्होंने राजनीति शास्त्र से एमए की पढ़ाई पूरी की.
इसके बाद वे राजनीति में आए. 1989 से लेकर 1992 तक कानपुर देहात से भारतीय
जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष रहने वाले बंसलाल जी अपने कार्य को सर्वोपरि रखते
हैं. उन्होंने 1991 में भारत के
वर्तमान राष्ट्रपति माननीय रामनाथ कोविंद को भारतीय जनता पार्टी का हिस्सा
बनाया था. बंसलाल जी ने 1989 में अकबरपुर से
सांसद देवेंद्र सिंह (भोले) को भी भारतीय जनता पार्टी में लाने का कार्य किया था.
राजनीतिक परिवेश, कार्य एवं उपलब्धियां -
वर्ष 1967 में बंसलाल जी
राजनीति में आए. राजनीति में पदार्पण होने
के बाद उन्होंने प्रगति पथ पर कार्य शुरू किया. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में वे मंत्री पद पर
कार्यरत रहे. लगातार समाज के बीच रहने और जनहित कार्यों के कारण बंसलाल जी गोरक्षा
आन्दोलन, दिल्ली में करीब 50 लोगों के साथ शामिल हुए. 1975 की इमरजेन्सी के दौरान
भी वे 3 महीने जेल में रहे. जनहित एवं सामाजिक कार्यों के कारण सन् 2000 में बंसलाल
जी लोक संघ सेनानी की उपाधि से सम्मानित हुए, इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में किसी
भी स्थान पर सहयोगी के साथ जाने की सुविधा भी दी गई. इसके बाद बंसलाल जी जनसंघ
मंडल में मंत्री बनाए गये.
बंसलाल जी ने 1984 में
कानपुर देहात से लोकसभा की सात सीटों पर चुनाव लड़ा. 1977 में यह जिला सहकारी
ग्रामीम बैंक के डायरेक्टर चुने गये. इसके बाद बंसलाल जी जिला सहकारी संघ के
अध्यक्ष भी निर्वाचित हुए. पुखराया में बंसलाल जी क्रय-विक्रय संस्था के अध्यक्ष हैं.
1989 में बंसलाल जी भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष चुने गये.
1993 में उनको राजपुर
विधानसभा से टिकट मिला, इस चुनाव में 5000 वोटों की कमी से उन्हें हार झेलनी पड़ी. इसके बाद बंसलाल जी ने 1996 में चुनाव लड़ा, जिसमें विपक्ष को 800 वोट अधिक मिले और उन्हें हार
का सामना करना पड़ा. परन्तु इन सभी से बंसलाल जी कभी रुके नहीं और ना ही
उन्होंने अपना मनोबल कभी गिरने दिया. वे क्रांति परिषद में भी सदस्य रहे तथा
प्रदेश कोऑपरेटिव के संयोजक भी रहें. वे 2002-2004 तक पार्टी अध्यक्ष रहे. बंसलाल जी उत्तर
प्रदेश ग्राम विकास व खाद्य भोग के सरकारी विभाग के नामित सदस्य है. वर्तमान में
वे लोकतन्त्र रक्षक सेना में प्रदेश उपाध्यक्ष हैं.
क्षेत्रीय कार्य -
बंसलाल जी ने सम्राट पुल,
नल कूपों, विद्यालयों में कमरे बनवाने जैसे कार्य किये. समाजिक कार्य एवं क्षेत्रीय
विकास कार्यों में बंसलाल जी ने अपने क्षेत्र में सड़कें बनवाने का कार्य
किया, जिससे लोगों को आने-जाने में आराम एवं सुविधा प्राप्त हुई. गांव के किसानों
को 5-6 ट्यूबवेल दिलाये जिससे उन्हें सिंचाई एवं जल के अन्य कार्यों में काफी
सहूलियत मिली.
मंत्री राजनाथ सिंह के सहयोग से अपने क्षेत्रीय लक्ष्य को पूर्ण किया. बंसलाल जी ने लोगों की समस्या को खत्म करने के लिए कई आन्दोलन किये और उसमें सफलता भी पाई. अपने प्रयास से उन्होंने लोगों को बेनाही पुल की व्यवस्था दिलाई.
राजनीति में आने का कारण -
जब बंसलाल जी पढ़ाई करते थे,
उस वक्त जल्द ही नौकरी मिल जाया करती थी, लेकिन वे समाज की लीक से हट कर कार्य
करना चाहते थे. वे राजनीति में आकर समाजिक एवं जनहित कार्य करना चाहते थे.
वर्ष 1967 में हुई मीटिंग में पं. दीन दयाल उपाध्याय ने संचालन किया था, उस समय उनके
विचारों से सहमत व जनसंघ में नाना जी देशमुख के विचारों से प्रभावित होकर बंसलाल
जी ने राजनीति में आने का फैसला किया.
भविष्य की परियोजनाएं -
भविष्य में उच्च पद पर
पहुंचकर यदि मौका मिला तो बंसलाल जी शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना चाहते हैं, इसी
के साथ में क्षेत्र में एक अच्छे अस्पताल को खुलवाना चाहते हैं. जनसाधारण के
पर्याप्त विकास के लिए वे कुटीर उद्योगों की उचित व्यवस्था करना चाहते हैं.
भारत के मुद्दों पर विचार -
बंसलाल जी के अनुसार युवाओं में चरित्र की उचित भूमिका होनी चाहिए. उन्हें चरित्र निर्माण की शिक्षा और सीख देनी चाहिए, साथ ही नैतिक शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन होने चाहिए. उनका मानना है कि लोगों में राष्ट्र भक्ति, चरित्र निमार्ण जैसे कार्यों की उचित भूमिका होनी चाहिए. लोगों और सरकार में राष्ट्र की सुरक्षा को लेकर गंभीरता दिखाई देनी चाहिए. सैनिकों को उचित शस्त्रों के साथ कार्य करने के अवसर मिलने चाहिए, जिसकी नैतिक जिम्मेदारी सरकार की बनती है. अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धा में अपने राष्ट्र को ऊपर लाने का संभव प्रयास होना चाहिए.
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