K.C. Pandey
Kashipur(Kanpur Dehat-Rura-209303)नाम - के. सी. पांडे पद - अपर आयुक्त (रिटायर्ड), कानपुर देहात व संस्थापक ज्ञान क्लब , कानपुर, उत्तर प्रदेशनवप्रवर्तक कोड - 71182966 परिचय कृष्ण चन्द्र पांडे एक पूर्व पी.सी.एस. अधिकारी व समाज सेवक हैं जिन्होंने सरकारी नौकरी के बावजूद जन कल्याण के
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नाम - के. सी. पांडे
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पद - अपर आयुक्त (रिटायर्ड), कानपुर देहात व संस्थापक ज्ञान क्लब , कानपुर, उत्तर प्रदेश
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नवप्रवर्तक कोड - 71182966
परिचय
कृष्ण चन्द्र पांडे एक पूर्व पी.सी.एस. अधिकारी व समाज सेवक हैं जिन्होंने सरकारी नौकरी के बावजूद जन कल्याण के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान दिया है. उन्हें लोग के.सी. पांडे के नाम से भी जानते हैं. वह एक क्रांतिकारी परिवार से सम्बन्ध रखते हैं तथा उनके पिता एक जाने-माने स्वतंत्रता सेनानी थे. जब वह महज उन्नीस वर्ष के थे तब उनके पिता का देहांत हो गया था जिस कारण उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गयी. साधनों की कमी के बावजूद उन्होंने पी.सी.एस. की तैयारी की तथा अपने कठिन परिश्रम की बदौलत उन्होंने 1975 में पी.सी.एस की परीक्षा में सफलता प्राप्त की.
सामाजिक कार्य
सरकारी नौकरी में रहते हुए भी वह व्यक्तिगत रूप से सदैव लोगों के भलाई के लिए कार्य करते रहे हैं. सरकारी नौकरी में रहते हुए, अपनी पहली तैनाती से ही के.सी. पांडे ने अपने पैतृक गांव जुरिया, कानपुर देहात में असहाय लोगों को वस्त्र वितरण कर लोगों की मदद करना प्रारंभ कर दिया था. जिसके कुछ वर्षों बाद उन्होंने अपने गांव में ‘अज्ञानता निवारण’ व ‘निर्धनता निवारण’ जैसे कई कार्यक्रमों का आयोजन किया. अज्ञानता निवारण के अंतर्गत उन्होंने गांव व आस-पास के क्षेत्रों में दैनिक समाचार पत्रों का नि:शुल्क वितरण करवाया तथा करेंट अफेयर्स पर आधारित प्रतियोगताओं का आयोजन करा विजेताओं को पुरस्कार देना प्रारम्भ करवाया. इस योजना के अलावा गांवों के ऐसे परिवारों जो कि भुखमरी की कगार पर थे, उन्होंने उन्हें दुधारू बकरियां प्रदान की गयीं जिससे उन परिवारों की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया. इन सभी सामाजिक कार्यों हेतु वह अपनी आय का दस प्रतिशत धन खर्च करते हैं.
सेवानिवृति के बाद का सफर
के.सी. पांडे आज भले ही अपनी सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त हो चुके हैं मगर अपने सामाजिक काम में वह और भी ज्यादा बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने लगे हैं. अपनी सेवानिवृति के बाद वह कानपुर में बस गए और वहीं से उन्होंने अपने सामाजिक कार्यों को विस्तार प्रदान किया तथा दो जिलों ( कानपुर नगर व कानपुर देहात ) के विभिन्न तहसील मुख्यालयों में ‘ज्ञान क्लब’ स्थापित किये. इन क्लबों का उद्देश्य विद्यार्थियों की कैरियर काउंसलिंग करना, उनमें सामान्य ज्ञान के प्रति रूचि जागृत करना तथा उन्हें प्रतियोगिताओं के योग्य बनाना आदि है. इसके लिए उन्होंने अपने मोबाइल फोन नम्बर को ‘विद्यार्थी हेल्पलाइन’ बनाकर विद्यार्थियों की कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास किया. जानने योग्य है कि विभिन्न ज्ञान क्लबों में संचालित गतिविधियों के परिणामस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों से लगभग आधा दर्जन विद्यार्थी सरकारी नौकरियों में चयनित हो चुके हैं.
समाज को जोड़ने का प्रयास
इसके अलावा समाज में व्याप्त भेदभाव को दूर करने के प्रयास में उनके द्वारा दो गांव/कस्बों में समरसता सहभोज का आयोजन किया गया जिनमें विभिन्न जातियों के लोगों ने एक साथ बैठ कर भोजन किया. इसके अलावा जनसाधारण में जागरूकता फैलाने के प्रयास से उन्होंने ‘सूचना का अधिकार’ सम्बंधित कई प्रशिक्षण कैम्पों का आयोजन कराया. के.सी. पांडे का लक्ष्य एक बेहतर समाज का निर्माण करना है जिसके लिए वह लगातार प्रयास करते रहते हैं. समाज का कल्याण करने के लिए लगातार चिंतन करने तथा विभिन्न कार्य करने में ही वह अपना समय व्यतीत करना पसंद करते हैं.
सामाजिक जागरूकता के लिए काम
के.सी. पांडे द्वारा अच्छी शिक्षा और लोगों को ज्ञान देने हेतु ज्ञान क्लब की शुरुआत तो की ही गयी है. लेकिन इसके अलावा वह इस क्लब के माध्यम से सामाजिक जागरूकता के लिए ट्रेंनिग भी करवाते हैं. सामाजिक जागरूकता के इस ट्रेंनिग में ग्राम प्रधानों को सूचना के अधिकार की शिक्षा भी दिलवाई गयी है, जिससे वह सूचना के अधिकार का महत्व व प्रयोग समझ पाएं और कर पाएं.
भविष्य के कार्य
कानपुर देहात में कृष्ण जी का संगठन योग और व्यायाम को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है. वहीं इस संगठन द्वारा वह प्रदूषण दूर करने की शिक्षा भी समाज तक पहुंचाना चाहते हैं जिससे कि लोग स्वयं जागरूक हो पाएं. प्रदूषण के रोकथाम के लिए कृष्ण जी का संगठन नवीन तरीकों को अपनाकर कार्य करना चाहता है.
सामाजिक परिवर्तन
सामाजिक परिवर्तन की दृष्टि से कृष्ण जी के अनुसार लोगों को अपनी सोच को बदलना होगा. शहर के खान-पान एवं स्वास्थ के बारे में जागरूक होना होगा. गांवों में श्रम अधिक होता है उसी हिसाब से भोजन भी खाया जाता है. परंतु शहर में आकर जीवन शैली बदल जाती है और लोगों को उसी हिसाब से भोजन करना चाहिए, इस बात को समझाने और बताने की बेहद आवश्यकता है.
उनका मानना है कि वीआईपी सोच के विस्तार को रोकना होगा. इस बात को वह पूर्णता मानते हैं कि वीआईपी सोच भी समाज की प्रगति को बहुत हद तक रोक रही है.
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