Anil Sharma
Bazardiha(Varanasi--221109)नाम – अनिल शर्मा पद – पार्षद प्रतिनिधि , वार्ड-14, नवाबगंज, वाराणसी नवप्रवर्तक कोड-71184021 परिचय –अनिल शर्मा वाराणसी के रहने वाले हैं और लंबे अरसे से राजनीति में सक्रिय तौर पर अपनी भूमिका निभा रहे हैं। बचपन से ही उन्हें राजनीति में बेहद ही दिलचस्पी
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नाम – अनिल शर्मा
पद – पार्षद प्रतिनिधि , वार्ड-14, नवाबगंज, वाराणसी
नवप्रवर्तक कोड-71184021
परिचय –
अनिल शर्मा वाराणसी के रहने वाले हैं और लंबे अरसे से राजनीति में सक्रिय तौर पर अपनी भूमिका निभा रहे हैं। बचपन से ही उन्हें राजनीति में बेहद ही दिलचस्पी थी और शायद यही वजह रही कि उन्होंने बेहद कम उम्र से ही राजनीति करनी शुरू कर दी थी।
अनिल शर्मा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से सोशियोलॉजी में स्नातक तक की पढ़ाई की है। उन्होंने इसके बाद भी कभी नौकरी की नहीं सोची और अपने इलाके में जनता के मिले प्यार की वजह से उन्होंने राजनीति को ही अपन ना कर्मभूमि बना लिया।
राजनीतिक पदार्पण-
शुरुआत में यह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और वर्षों तक भाजपा के लिए कई मोर्चों पर संघर्ष किया। कई आंदोलनों में इनकी भागीदारी रही राम जन्मभूमि से लेकर कई सारे ऐसे आंदोलन रहे जो कि भाजपा के नेतृत्व में चलाए गए, उसमें इन्होंने अपनी बेहतरीन भूमिका निभाई। किंतु काफी अरसे बाद इनका भारतीय जनता पार्टी से मोह भंग होने लगा. दरअसल भाजपा के लिए जब इन्होंने काफी लंबे अरसे तक कार्य किया और इन्होंने जब सभासद का टिकट मांगा तो इन्हें नहीं दिया गया. ऐसे में इन्हें लगा कि जो जमीनी कार्यकर्ता होते हैं और जो वास्तव में पार्टी के लिए लड़ाई लड़ते हैं उसको पार्टी जब नजरअंदाज कर सकती है तो ऐसे में इनका भविष्य इस पार्टी में नहीं है।
अनिल शर्मा ने तब भारतीय जनता पार्टी को छोड़ दिया और सभासद के लिए खुद ही निर्दलीय चुनावी मैदान में उतार आये। लेकिन जो कल तक के उनके भाजपा के साथी थे उन्होंने ही मिलकर उन्हें हरवा दिया। लेकिन इस हार ने उनके लिए हार नहीं बल्कि आगे की जीत की संकल्पना को तैयार किया। उन्होंने पूरी हिम्मत से आगामी सभासद चुनाव की तैयारी शुरू कर दी और यह तब का वक्त था और यह आज का वक्त है कि उन्होंने लगातार तीन बार चुनाव जीता और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
इस बार के हुए चुनाव में महिला सीट होने की वजह से उन्होंने अपनी पत्नी सीता देवी को चुनावी मैदान में उतारा और लोकल विधायक की पूरी कोशिशों के बावजूद उन्हें फिर से जीत प्राप्त हुई और वह 14 वोटों से फिर से अपनी पत्नी को पार्षद बनाने में सफल हुए।
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