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District

Unnao

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जैसे साहित्यकार और चन्द्रशेखर ‘आजाद’ जैसे स्वतंत्रता सेनानी जहां की मिट्टी में पले- बढ़े हों, उस जिले को किसी पहचान की आवश्यकता नहीं है. गंगा और सई नदी के मध्य स्थित उन्नाव ऐतिहासिक, पौराणिक व साहित्यिक दृष्टिकोण से काफी समृद्ध रहा है. उत्तर-प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण जिलों में से एक उन्नाव जिला लखनऊ मंडल के अंतर्गत आता है. लखनऊ-कानपुर के मध्य स्थित यह जिला कई प्रसिद्ध साहित्यकारों डॉ रामविलास शर्मा, प्रताप नारायण मिश्रा आदि व स्वतंत्रता सेनानियों राजा राव रा

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Reference data & background — source: Census 2011 & editorial notes, may be outdated

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जैसे साहित्यकार और चन्द्रशेखर ‘आजाद’ जैसे स्वतंत्रता सेनानी जहां की मिट्टी में पले- बढ़े हों, उस जिले को किसी पहचान की आवश्यकता नहीं है. गंगा और सई नदी के मध्य स्थित उन्नाव ऐतिहासिक, पौराणिक व साहित्यिक दृष्टिकोण से काफी समृद्ध रहा है.

उत्तर-प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण जिलों में से एक उन्नाव जिला लखनऊ मंडल के अंतर्गत आता है. लखनऊ-कानपुर के मध्य स्थित यह जिला कई प्रसिद्ध साहित्यकारों डॉ रामविलास शर्मा, प्रताप नारायण मिश्रा आदि व स्वतंत्रता सेनानियों राजा राव राम बक्श सिंह, देवी बक्श सिंह, कस्तूरी सिंह व भोपाल सिंह आदि की जन्मभूमि रहा है.

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य –

लोकप्रिय किंवदंती के अनुसार उन्नाव जिला त्रेतायुग से अस्तित्व में माना जाता रहा है, रामायण काल के अंतर्गत ऋषि परशुराम से जुड़ी हुई किवदंती के अनुसार वह जिले की हसनगंज तहसील के पारसनंदन गांव में रहते थे. सूर्यवंशी राजा दशरथ जिले के वन्य क्षेत्र में शिकार के लिए आया करते थे और पुरवा तहसील के एक स्थान पर उन्होंने  गलती से श्रवण कुमार को मार दिया था. श्रवण कुमार की स्मृति में बना सरवन ग्राम एक ऐतिहासिक और पौराणिक स्थान है, जो पुरवा तहसील में स्थित है. तहसील उन्नाव का परियर क्षेत्र महर्षि वाल्मीकि की "तपोभूमि" रही है, जहाँ माता सीता कुछ समय तक निर्वासित रहीं और लव-कुश को जन्म दिया.

उन्नाव की एक जिले के रूप में स्थापना आज से करीब 1200 वर्षों पूर्व हुई. इससे पहले यह क्षेत्र वनों से घिरा हुआ था, इसके बाद चौहान राजपूत व गोडो सिंह ने यहां एक शहर की स्थापना को मंजूरी दी, जिसे सवाय गोडो नाम से जाना जाने लगा. तत्पश्चात् यह जिला कन्नौज शासकों ने अपने अधीन कर लिया, किन्तु कुछ दिनों बाद जिले के राज्यपाल नियुक्त किये गए खांडे सिंह की उनके एक लेफ्टिनेंट उन्वंत सिंह द्वारा हत्या कर दी गई. इसके बाद उन्वंत सिंह ने इस जिले पर अपना आधिपत्य जमाते हुए अपने नाम पर ही जिले का नाम दिया तथा तभी से सवाय गोडो को ‘उन्नाव’ कहा जाने लगा.

यह भी कहा जाता है कि प्राचीन काल में इस जिले के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र कोसाला का हिस्सा था, जो कि अकबर के समय अवध प्रान्त में शामिल था. 1857– 1858 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद नागरिक प्रशासन को जिले के रूप स्थापित करते हुए उन्नाव नाम दिया गया. इसके बाद सन् 1869 में यह जिला अपने मौजूदा अस्तित्व में आया.  

जनसांख्यिकी –

2011 की जनगणना के आधार पर उन्नाव जिले की जनसंख्या 3,108,367 है, जिसके अंतर्गत शहरी जनसंख्या 2,61,730 है, जो कि कुल जनसंख्या की 8.4 प्रतिशत है. वहीं जिले का जनसंख्या घनत्व 682 वर्ग कि.मी. तथा लिंगानुपात 907 है. साथ ही जिले का बाल लिंगानुपात 920 है. शिक्षा की दिशा में विभिन्न सरकारों द्वारा ठोस कदम उठाए जाने के बावजूद अभी भी यह जिला इस क्षेत्र में काफी पिछड़ा है तथा उन्नाव की साक्षरता दर महज 66.37 प्रतिशत है, जिसमें कि पुरूष साक्षरता दर 75.05 प्रतिशत व महिला साक्षरता दर 56.76 प्रतिशत है.

भौगोलिक पृष्ठभूमि –

उन्नाव जिला 26 डिग्री 05’ व 27 डिग्री 02' उत्तरी अक्षांश और 80 डिग्री 03' व 81 डिग्री 03' पूर्वी देशांतर रेखा के मध्य स्थित है. प्राचीनकाल में वनों से घिरे इस जिले का वर्तमान क्षेत्रफल 4,558 वर्ग कि.मी. है. उन्नाव की भूमि समतल व सपाट है. आज भी जिले की करीब 17 हेक्टेयर भूमि वन क्षेत्र है.

प्रमुख नदियां -

उन्नाव जिले के प्रमुख जलस्त्रोतों की यदि बात करें तो यहां प्रमुख रूप से गंगा व सई नदी बहती है. साथ ही उन्नाव में गंगा नदी की कई सहायक नदियां कल्याणी, तिनाई, लोनी, मोरही इसमें आकर मिल जाती हैं. जिले का संपूर्ण ड्रेनेज सिस्टम इन्हीं नदियों द्वारा नियत्रित किया जाता है तथा इन नदियों का जल काफी दूषित होने के कारण इसके शुद्धिकरण के बाद ही इसे पेयजल व सिंचाई आदि कार्यों में उपयोग में लाया जाता है. इसके अलावा यहां अन्य जलस्त्रोतों के रूप में कई नहरें व तालाब भी हैं.

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जैसे साहित्यकार और
चन्द्रशेखर ‘आजाद’ जैसे स्वतंत्रता सेनानी जहां की मिट्

जलवायु –

उन्नाव में मुख्य रूप से मार्च से जून के मध्य गर्मियों का मौसम तथा नवबंर से फरवरी के मध्य सर्दियों का मौसम रहता है. साथ ही इस जिले में मानसून का आगमन सामान्यतया जुलाई माह में होता है. वहीं जिले की कुल वार्षिक वर्षा का स्तर 837.125 मि.मी. है. जिले में सर्वाधिक वर्षा जुलाई से सितबंर के बीच में होती है.

प्रशासनिक विभाजन –

लखनऊ मंडल के अंतर्गत आने वाले इस जिले को प्रशासनिक आधार पर 6 राजस्व-प्रभागों  उन्नाव, बांगरमऊ, हसनगंज, पुरवा, सफीपुर और बीघापुर में विभाजित किया गया. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले में 1795 गांव है. वहीं उन्नाव के 16 ब्लॉकों में असोहा, औरस, बांगरमऊ, बिछिया, बीघापुर, फतेहपुर चौरासी, गंज मुरादाबाद,, हसनगंज, हिलौली, मियागंज, नवाबगंज, पुरवा, सफीपुर, सिकंदरपुर करन, सिकंदरपुर सरोसी, सुमेरपुर तथा 18 नगर पालिका क्षेत्र हैं. इसके अलावा यह जिला सूबे की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है. जिले में एक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र व कुल 6 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र (उन्नाव, पुरवा, भगवन्तनगर, मोहान, सफीपुर और बांगरमऊ) हैं. वहीं यदि जिले में पुलिस प्रशासन की बात करें तो वर्तमान समय में उन्नाव में 18 पुलिस स्टेशन मौजूद हैं.

महत्वपूर्ण स्थान –

उन्नावों के महत्वपूर्ण स्थानों की यदि बात करें तो इस जिले से करीब 11 कि.मी. की दूरी पर स्थित बड़ारका हरबंस नामक गांव में जिसकी स्थापना 1643 ई. में राजा हरबंस ने की थी, द्वारा बनाया गया घर जिसमें 500 मीटर की ऊंचाई तक चूना ब्लॉक की दीवारें, गेट पर लाल पत्थर की बारीक सजावट, गीज़ और हाथी के जोड़े, नक्काशीदार स्तंभों पर कला का बेजोड़ प्रदर्शन आदि अद्भुत व दर्शनीय है.

इसके अलावा गंगा नदी के बाएं किनारे पर स्थित गांव बक्सर, जिसके बारे में मान्यता है कि 5000 साल पहले यहां भगवान श्री कृष्ण ने बाक नामक राक्षस का वध किया था, यहां कई प्राचीन मंदिर व उन पर शिल्पकला व चित्रकला के प्रमाण आज भी मौजूद हैं. कार्तिक पूर्णिमा के दिन इस गांव में काफी बड़ा मेला लगता है, जिसमें भाग लेने आस- पास के क्षेत्रों से लोग आते हैं.

वहीं उन्नाव स्थित शहीद चन्द्रशेखर आजाद पक्षी अभ्यारण्य भी काफी प्रसिद्ध और दर्शनीय है, जिसका पूर्व नाम नवाबगंज पक्षी अभ्यारण्य था. परन्तु उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2015 में स्वतंत्रता अधिनायक चंद्रशेखर आज़ाद की 109वीं जयंती के अवसर पर इसका नाम बदल दिया गया.

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जैसे साहित्यकार और
चन्द्रशेखर ‘आजाद’ जैसे स्वतंत्रता सेनानी जहां की मिट् 

स्वास्थ्य सुविधाएं –

उत्तर– प्रदेश के 160 जिला अस्पतालों में से 2 अस्पताल उन्नाव जिले में स्थित हैं. वहीं जिले में 41 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र व 12 कम्युनिटी स्वास्थ्य केन्द्र भी मौजूद हैं. इसके अलावा लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए जिले में कई प्राइवेट अस्पताल भी हैं.

शिक्षा सुविधाएं –

उन्नाव जिले के अंतर्गत बहुत से हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के साथ ही इंजीनियरिंग कॉलेज और प्रबंधन संस्थान भी हैं. जिले के इंजीनियरिंग कॉलेजों को एआईसीटीई द्वारा अनुमोदित एवं डॉ ए. पी. जे. अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा संबद्ध किया जाता है. जिले के अधिकांश स्कूल उत्तर प्रदेश बोर्ड से संबद्ध हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जो आईसीएसई-आईएससी और सीबीएसई द्वारा संबद्ध किये गए है. उन्नाव जिले के कुछ प्रमुख कॉलेज व महाविद्यालय इस प्रकार हैं –

1.     इंदिरा गांधी राजकीय महाविद्यालय

2.     राजकीय महाविद्यालय

3.     दयानन्द सुभाष नेशनल डिग्री कॉलेज

4.     श्री ठाकुर जी महाराज महाविद्यालय

5.     श्री नारायण गर्ल्स डिर्गी कॉलेज

6.     डॉ हरिवंश राय बच्चन महाविद्यालय

7.     बाबू जयशंकर गया प्रसाद महाविद्यालय

8.     रघुराज रामगोपाल डिग्री कॉलेज आदि.

REFRENCES :

1. https://unnao.nic.in/

2. http://cgwb.gov.in/District_Profile/UP/Unnao.pdf

3. https://unnao.nic.in/places-of-interest/

4. http://upnrhm.gov.in/site-files/dhap/districts/Unnao/Unnao__4_.pdf

5. http://uphed.gov.in/post/hi/unnao-district-list

6. https://www.jagran.com/uttar-pradesh/lucknow-city-bird-century-of-nawabganj-will-be-name-after-chandrashekhar-azad-12511316.html

7. http://censusindia.gov.in/2011census/dchb/0925_PART_B_DCHB_UNNAO.pdf

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