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पंजाब में गरीबों के हित के लिए नहीं राजनीतिक फायदे के लिए मुद्दा बना ‘अनाज घोटाला’ – एक पड़ताल

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पंजाब में  अनाज घोटाला

पंजाब में चुनावी माहौल अपने उफान पर है, आरोप-प्रत्यारोप का दौर अपने चरम पर। अनाज घोटाले को लेकर पंजाब सरकार को विपक्ष घेरने की भरसक कोशिश कर रही है। अनाज घोटाला एक अहम चुनावी मुद्दा बन गया है। करीब 12 हजार करोड़ रूपए के अनाज का हिसाब-किताब पंजाब सरकार के पास नहीं है। इससे लग रहा है कि कहीं न कहीं कुछ तो गड़बड़ी हुई होगी। ऐसे में यह सही है तो निश्चित तौर पर यह उस सभ्य समाज के लिए निंदनीय और शर्मिंदगी भरा है जहां एक बेबस सा मजबूर बच्चा हाथ फैलाए आपसे कुछ खिलाने की आग्रह करता है और आप दूसरी तरफ मुंह फेर लेते हो। जरा सोचिए जिस अनाज के एक निवाले के लिए देश में बहुत से लोग दर-दर भटकने को मजबूर हैं उसी देश में चंद लोग पैसा बनाने के लिए अनाज को जानबूझकर कर सड़ा देते हैं। यह काम वैसे लोग भी कर रहे हैं जिन्हें यह सुनिश्चित भी करना है कि कोई भूखा ना रहे। राजनीति अपने पतन की ओर है और राजनीतिज्ञ अपने अन्दर के इन्सान को मार चुके हैं. दुष्यंत कुमार के कविता की दो लाइन रखते हुए अच्छा तो नहीं लग रहा पर हकीकत यही है –
कल नुमाइश में मिला वो चीथड़े पहने हुए,
मैंने पूछा नाम तो बोला कि हिन्दुस्तान है

अनाज घोटाले में फंसी सरकार  

आरटीआई और कैग की रिपोर्ट पर यदि यकीन करे तो यह बड़ा घोटाला है। विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं। ऐसे में विपक्ष इस मुद्दे को जोर-सोर से उठा रहा है। ऐसे में अकाली सरकार के पास इसका जवाब देने के लिए तर्क कुछ कम ही पड़ रहे हैं।
इन दिनों पंजाब सरकार एक अजीब ही आरोप से दो चार हो रही है। आरोप है करीब 12 हजार करोड़ रूपए के अनाज की गड़बड़ी का। सरकार का तर्क है कि अनाज में कोई गड़बड़ी नहीं हुई। लेकिन कैग की रिपोर्ट और आरटीआई  की जानकारी इशारा कर रही है कि इस मामले में बड़ी गड़बड़ी हुई है। ऐसे में चुनाव को देखते हुए विपक्ष ने इस मामले को बड़ा मुद्दा बना लिया है। प्रदेश की सीमाओं को लांघकर यह मसला अब दिल्ली तक पहुंच गया है। दरअसल हुआ यह है कि पंजाब सरकार अलग अलग बैंकों से अनाज की खरीद के लिए कर्ज लेती है। इस पैसे से अनाज खरीदा जाता है। अनाज केंद्रीय पुल में भेजते ही बैंकों का पैसा वापस चला जाता है। अनाज खरीद का यहीं सिलसिला चलता रहता है। इस मामले में हुआ यह है कि अब करीब बीस हजार करोड़ के अनाज का अता-पता नहीं चल रहा है।
रिजर्व बैंक ने भी पंजाब सरकार से पिछले साल सवाल किया था कि इस रकम से खरीदे गए अनाज का ब्यौरा दिया जाए। रिजर्व बैंक ने पंजाब को कर्ज देने वाले बैंकों से जवाब तलब किया है। इसके साथ ही यह भी जानकारी मांगी है कि क्यां कोई अधिकारी मौके पर यह देखने के लिए गया था कि इस रकम का सही इस्तेमाल हो रहा है या नहीं। रिजर्व बैंक के मुंबई मुख्यालय में इस मामले पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई। लिकर किंग विजय माल्या के फरार होने के बाद ही रिजर्व बैंक को  पंजाब को दिए गए कर्ज का ख्याल आया था। अनाज की यह गड़बड़ी एक दो साल की नहीं बल्कि तीन साल से लगातार चली आ रही है।

कैग रिपोर्ट पहले ही अनाज खरीद में गड़बड़ी का संकेत कर चुकी है

2013-14 की कैग रिपोर्ट में पंजाब में अनाज खरीद पर सवाल उठाया गया था। पर क्योंकि अकाली सरकार थी और गड़बड़ी भी उनके समय में हुई थी। इसलिए इस मामलो को दबा दिया गया। विपक्ष खास तौर पर कांग्रेस ने जरूर इस पर हल्ला मचाया। तब किसी ने ज्यादा इस मामले को तुल नहीं दिया। मामला उस वक्त उभर कर सामने आया जब रिजर्व बैंक ने इस पर नोटिस लिया। इसके बाद विपक्ष भी मामले को लेकर सक्रिय हो गया। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कैप्टन अमरेंदर सिंह ने बताया कि पंजाब में अकाली सरकार ने अपने शासन काल में घोटाले ही किए है। अनाज घोटाला भी इसी कड़ी में एक है। उन्होंने बताया कि हम तो लगातार मांग कर रहे हैं कि इस मामले की जांच सीटिंग जज से कराई जाए। जिससे सच सामने आए। लेकिन उनकी इस मांग की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार आते ही इस मामले की जांच होगी।


आखिर है क्या यह गड़बड़ी

अनाज खरीद के लिए बैंक कर्ज देते हैं। इस रकम की गारंटी प्रदेश सरकार देती है। बाद में अनाज केंद्रीय पुल में भेज दिया जाता है। हिसाब किताब कर रकम वापस हो जाती है। यहीं सिलसिला चलता रहता है। पंजाब में हुआ क्या कि बैंकों से रकम तो ज्यादा उठाई गई, अनाज कम खरीदा गया। कम ही अनाज केंद्रीय पुल में भेजा गया। पहले साल इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। दूसरे साल भी यह गड़बड़ी हुई। जब एक बार गड़बड़ी होना शुरू हो गई तो 2013 तक आते-आते इसमें तेजी आ गई। तब कैग ने पहली बार इस पर सवाल उठाया। इसके बाद भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया। गड़बड़ी इसी तरह से चलती रही। जो इस साल आते आते 12 हजार करोड़ रूपए तक पहुंच चुकी है।

गड़बड़ी ऐसे हुई

  हुआ यह कि केंद्र से पैसा तो पूरा उठाया गया। अनाज कम खरीदा गया। बाकी का बचा पैसा केंद्र को वापस करने की बजाय इधर-उधर कर दिया गया। इस मामले में चौंकाने वाली बात तो यह रही कि किसी भी स्तर पर यह नहीं देखा गया कि अनाज उतना खरीदा भी गया जितनी रकम इसके बैंकों से उठाई गई थी। कैप्टन ने आरोप लगाया कि इस रकम का बड़ा हिस्सा तो सीधे सरकार के पास गया। जो बाकी बचा इसमें मनमाने तरीके से अनाज के उठान, लदान और आदि के ठेके चहेतों को दिए गए। उन्हें मनमाने तरीके से अनाप-शनाप पैसा दिया गया। इस तरह से सभी ने मिल कर इस रकम में से अपना-अपना हिस्सा जुटाया। विपक्ष के आरोपों के मुताबिक अनाज के फर्जी बिल तैयार किए गए। जिससे बैंक से आई रकम को जस्टिफाई किया जा सके।
4 खरीद एजेंसियों पंजाब वेयरहाउस, पंजाब एग्रो, पनसप व पनग्रेन ने ढुलाई के लिए जिन गाड़ियों के नंबर दिए थे, उनमें करीब 3200 गाड़ियां मिली ही नहीं। विपक्ष का आरोप है कि इससे साफ है कि फर्जी गाड़ियों के नाम पर बिल बनाए गए हैं।  


बाइक के नंबर पर दिखाई अनाज की ढुलाई

पंजाब में  अनाज घोटाला

कांग्रेस के सीनियर लीडर सुनील जाखड़ ने बताया कि पंजाब के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने अनाज की ढुलाई के लिए जो वाहनों के नंबर दिए वह बाइक और इसी तरह से दुपहियां वाहनों के नंबर है। जाखड़ ने दावा किया कि हमने मोटर साइकिलों को ढूंढ निकाला है। उनमें से एक मोटरसाइकिल पर इन दिनों सुनील जाखड़ घूम-घूम कर जनता के बीच में सरकार की इस गड़बड़ी का बता रहे हैं। जाखड़ ने बताया कि यह घोटाला कोई छोटा-मोटा नहीं है बल्कि पंजाब के गोदामों से अनाज गायब किया गया है। यह हमारा आरोप नहीं है बल्कि कैग का है। सीएम परकाश सिंह बादल यदि सच्चे हैं तो इसकी जांच सीबीआई से करवाएं। इसी घोटाले के कारण पिछले साल से केंद्र सरकार फसल खरीदने के लिए कैश क्रेडिट लिमिट बनाने में आनाकानी की थी। 
उन्होंने कहा, सरकार की इस लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ेगा। जाखड़ ने कहा, इस मोटर साइकिल को कांग्रेस अपनी हर रैली में ले जाकर लोगों को दिखाएगी कि किस तरह लोगों की खून-पसीने की कमाई को सरकार लूट रही है।

मामला सामने आ गया वरना बता देते अनाज खराब हो गया

अनाज माफिया बहुत ही सधे हुए तरीके से काम करता है। क्योंक मंडियों में अनाज खरीद का कामकाज आज भी वहीं बाबा आदम के टाइम का यानी की बही खातों में दर्ज होता है। ऐसे में अनाज की आवाजाही पर नजर रखी ही नहीं जा सकती। होता यह है कि बहुत सा आनाज को तो सिर्फ कागजों में ही खरीदा जाता है। इस अनाज की ढुलाई भी होती है और इसे स्टोर भी किया जाता है। अब होता यह है कि जो अनाज स्टोर किय गया, इसमें रात में पानी डाल दिया जाता है। यह सिलसिला काफी समय तक किया जाता है। जब तक कि आनाज काला न पड़ जाए। अनाज में पानी डालना इसलिए भी आसान रहता है क्योंकि केंद्रीय पुल के लिए जो अनाज मंगाया जाता है, उसकी रफ़्तार अपेक्षाकृत धीमी है। मसलन पिछले साल का गेहूं अभी भी केंद्रीय पुल में नहीं गया। पुल के लिए सबसे पहले वह अनाज मंगाया जाता है तो सबसे पूराना हो। यहीं वजह है कि माफिया को अपना काम करने का मौका मिल जाता है। वें उस भंडारा को खराब करने की कोशिश करते हैं जिसमें उन्होंने फर्जी ढंग से खरीद गया अनाज भी भंडार कर रखा है। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि मसलन स्टोर तो पांच सौ टन गेहूं किया गया, लेकिन यह भंडार दिखाया गया है एक हजार टन का। इसमें पानी डाल कर अनाज को खराब कर दिया जाता है। फिर इसे खराब डिक्लेयर करा दिया जाता है। इसके बाद अनाज को साफ किया जाता है। बस जैसे ही अनाज साफ किया जाता है जितना अनाज फर्जी बिल में होता है उसे खराब करार दे दिया जाता है। कई बार तो पूरे भंडार को ही खराब घोषित कर दिया जाता है। अब खराब अनाज के आरोप से माफिया इसलिए बच जाता है क्योंकि वह केंद्र पर ही आरोप लगा देता है कि अनाज समयपर उठा नहीं। इसलिए खराब हो गया।

सारे आरोप गलत है: सुखबीरबादल

इधर पंजाब के डिप्टी चीफ मिनिस्टर सुखबीर बादल ने बताया कि सारे आरोप गलत है। विपक्ष के पास क्योंकि कोई मुद्दा तो है नहीं इसलिए इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि हुआ यह कि कुछ अनाज को खराब हो गया था। इसके साथ ही लंबे समय से पंजाब के अनाज का आडिट भी नहीं हुआ था। आडिट होगा तो सब साफ हो जाएगा।

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