संक्षिप्त परिचय -
पौड़ी गढ़वाल जिला वृत्ताकार रूप में है, यह भारतीय राज्य उत्तराखण्ड का एक जिला है। जिसका मुख्यालय पौड़ी है। जो कि 5,440 वर्ग किलोमीटर के भौगोलिक दायरे में बसा है वहीं इसके उत्तर में चमोली, रुद्रप्रयाग और टिहरी गढ़वाल है, दक्षिण में उधमसिंह नगर, पूर्व में अल्मोरा और नैनीताल और पश्चिम में देहरादून एवं हरिद्वार स्थित है। हिमालय की पर्वत श्रृंखलाएं इसकी सुन्दरता में और भी चार चाँद लगाती है। इस जिले में बड़े-बड़े जंगल पहाड़ इसकी सुन्दरता को बहुत ही मनमोहक बनाते हैं। जिसमें हरिद्वार, देहरादून, टिहरी गढ़वाल, रूद्वप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा और नैनीताल सम्मिलित है। यहां स्थित हिमालय, नदियां, जंगल और ऊंचे-ऊंचे शिखर यहां की खूबसूरती की पहचान है। पौड़ी समुद्र तल से लगभग 1814 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। पौड़ी का हिमालय शिखर बर्फ से ढका हुआ है।
ऐतिहासिक पृष्ठ्भूमि -
जिले के इतिहास की बात करे तो सदियों से गढ़वाल हिमालय में मानव सभ्यता का विकास शेष भारतीय उप-महाद्वीपों के समानांतर रहा है। कत्युरी पहला ऐतिहासिक राजवंश था, जिसने एकीकृत उत्तराखंड पर शासन किया और शिलालेख और मंदिरों के रूप में कुछ महत्वपूर्ण अभिलेख छोड़ दिए | कत्युरी के पतन के बाद की अवधि में, यह माना जाता है कि गढ़वाल क्षेत्र 64 (चौसठ) से अधिक रियासतों में विखंडित हो गया था और मुख्य रियासतों में से चंद्रपुरगढ़ एक रियासत बन गया। जिस पर कनकपाल के वंशजो थे।
इसके बाद 15 वीं शताब्दी के अंत में अजयपाल ने चंदपुरगढ़ पर सिंहासन किया और कई रियासतों को उनके सरदारों के साथ एकजुट करके एक ही राज्य में समायोजित कर लिया और इस राज्य को गढ़वाल के नाम से जाना जाने लगा। इसके बाद उन्होंने 1506 से पहले अपनी राजधानी चांदपुर से देवलगढ़ और बाद में 1506 से 1519 ईसवी के दौरान श्रीनगर स्थानांतरित कर दी थी। इसके बाद राजा अजयपाल और उनके उत्तराधिकारियों ने लगभग तीन सौ साल तक गढ़वाल पर शासन किया। 1804 के अंत में गोरखा वंशी पूरे गढ़वाल के स्वामी बन गए और बारह साल तक क्षेत्र पर शासन किया।
भौगोलिक स्थिति -
इसकी भौगोलिक स्थिति पर बात करे तो पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड राज्य का एक प्रमुख जिला है, यह 5230 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और 29० 45′ से 30०15′ अक्षांश और 78024′ से 79०23′ ई देशांतर के बीच स्थित है। पौड़ी गढ़वाल जिले का मुख्यालय है और यह 1650 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। और इसकी जनसंख्या 24,743 है । यह देवदार के जंगल और चोटी के उत्तरी ढलान पर स्थित है, जो बर्फ-पहने पहाडी श्रृंखलाओं के समान प्रतीत होता है।
प्रशासनिक विभाजन -
जिले में प्रशासनिक मुख्यालय पौड़ी नगर में स्थित हैं। प्रशासनिक कार्यों के अनुसार, जिले को 6 उपखण्डों में बांटा गया है, जो आगे 12 तहसीलों और 1 उप-तहसील में विभाजित हैं। ये हैं- पौड़ी उपखण्ड (पौड़ी, चौबट्टाखाल), श्रीनगर उपखण्ड (श्रीनगर), लैंसडौन उपखण्ड (लैंसडौन, सतपुली, जाखनीखाल, रिखनीखाल उप-तहसील), कोटद्वार उपखण्ड (कोटद्वार, यमकेश्वर), थलीसैण उपखण्ड (थलीसैंण, चाकीसैण, बीरोंखाल) और धूमाकोट उपखण्ड (धूमाकोट)। इसके अतिरिक्त, जिले को 15 विकासखंडों में भी बांटा गया है जिनमे पौड़ी, कोट, कल्जीखाल, खिर्सू, पाबौ, थलीसैंण, बीरोंखाल, नैनिडांडा, एकेश्वर, पोखड़ा, रिखनीखाल, जयहरीखाल, द्वारीखाल, दुगड्डा और यमकेश्वर प्रमुख है। वहीं जिले में एक संसदीय क्षेत्र, और 6 उत्तराखण्ड विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र भी हैं, जिनमें यमकेश्वर, पौड़ी, श्रीनगर, चौबट्टाखाल, लैंसडौन और कोटद्वार मुख्य रूप से शामिल हैं।
जनसांख्यिकी -
उत्तराखंड में पौडी गढ़वाल जिले में 9 तहसील या उप-जिले और 16 सामुदायिक विकास खंड हैं । पौडी गढ़वाल जिले की कुल जनसंख्या 687,271 है जिसमें पुरुष जनसंख्या 326,829 और महिला जनसंख्या 360,442 है। इसमें महिला एवं पुरुष की साक्षरता दर 82.02% है। यहां एसटी जनसंख्या 2,215 है। जिले में कुल परिवार 161,778 है।
पर्यटन स्थल - इस जिले के दर्शनीय स्थल निम्नलिखित है -
1. कंडोलिया मंदिर -
यह शिव मंदिर पौड़ी से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कंडोलिया देवता का यह मंदिर वहां के भूमि देवता के रूप में पूजे जाते हैं। इस मंदिर के समीप ही खूबसूरत पार्क और खेल परिसर भी स्थित है। इससे कुछ मिनट की दूरी पर ही एशिया का सबसे ऊचा स्टेडियम रांसी भी है। गर्मियों के दौरान कंडोलिया पार्क में पर्यटकों की भारी मात्रा में भीड़ देखी जा सकती है। यहां आने वाले पर्यटक अपने परिवार के साथ यहां का पूरा-पूरा मजा उठाते हैं। इस पार्क के एक तरफ खुबसूरत पौड़ी शहर देखा जा सकता हैं। कन्डोलिया मन्दिर से सर्दियों में हिमालय बहुत सुंदर दिखाई देता है। हिमालय की बन्दर पूछ, केदारनाथ, चौखम्बा, नीलकन्ठ, त्रिशूल आदि चोटियों के यहाँ से बहुत खूबसूरत दर्शन होते हैं।
2. बिंसर महादेव का मंदिर -
बिंसर महादेव मंदिर 2480 मी. ऊंचाई पर स्थित है। यह पौड़ी से 114 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह जगह अपनी प्राकृतिक सौन्दर्यता के लिए जानी जाती है। यह मंदिर भगवान हरगौरी, गणेश और महिषासुरमंदिनी के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इस मंदिर को लेकर यह माना जाता है कि यह मंदिर महाराजा पृथ्वी ने अपने पिता बिन्दु की याद में बनवाया था। इस मंदिर को बिंदेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
3. ताराकुंड -
ताराकुंड समुद्र तल से 2,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। ताराकुंड बहुत ही खूबसूरत एवं आकर्षित जगह है। जो पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर अधिक खींचती है। ताराकुंड अधिक ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां से आस-पास का नजारा काफी मनमोहक लगता है। एक छोटी सी झील और बहुत पुराना मंदिर इस जगह को और अधिक सुंदर बनाता है।
4. कण्वाश्रम -
कण्वाश्रम मालिनी नदी के किनारे स्थित है। कोटद्वार से इस स्थान की दूरी 14 किलोमीटर है। यहां स्थित कण्व ऋषि आश्रम बहुत ही महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक जगह है। ऐसा माना जाता है कि सागा विश्वमित्रा ने यहां पर तपस्या की थी। भगवानों के देवता इंद्र उनकी तपस्या देखकर अत्यंत चिंतित होगए और उन्होंने उनकी तपस्या भंग करने के लिए मेनका को भेजा। मेनका विश्वामित्र की तपस्या को भंग करने में सफल भी रही। इसके बाद मेनका ने कन्या के रूप में जन्म लिया और पुन: स्वर्ग आ गई। बाद में वहीं कन्या शकुन्तला के नाम से जाने जानी लगी। और उनका विवाह हस्तिनापुर के महाराजा से हो गया। शकुन्लता ने कुछ समय बाद एक पुत्र को जन्म दिया। जिसका नाम भारत रखा गया। भारत के राजा बनने के बाद ही हमारे देश का नाम भारत' रखा गया।
5. चरक डांड -
आयुर्वेद के जनक महर्षि चरक की जन्मस्थली चरक डांडा , कोटद्वार से मात्र 25 किलोमीटर दूर खूबसूरत वादियों के बीच हैं। वे कुषाण राज्य के राजवैद्य थे। इनके द्वारा रचित चरक संहिता एक प्रसिद्ध आयुर्वेद ग्रन्थ है। इसमें रोगनाशक एवं रोगनिरोधक दवाओं का उल्लेख है तथा सोना, चाँदी, लोहा, पारा आदि धातुओं के भस्म एवं उनके उपयोग का वर्णन मिलता है। यह स्थान बेहद खूबसूरत हसीन वादियों की भूमि है जो एक बार यहां आए यहां आता है यही का ही होकर रह जाता है।
6. दूधातोली -
दूधातोली 31,00मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह स्थान जंगल से घिरा हुआ है। यहां तक पंहुचने के लिए थलीसैन से होते हुए पीठसैण पंहुच कर पंहुचा जा सकता है। यह स्थान हिमालय के चारों ओर से घिरा हुआ है। यहां का नजारा बहुत ही आकर्षक है जो यहां आने वाले पर्यटकों को सदैव ही अपनी ओर आकर्षित करता है।
यह क्षेत्र प्रसिद्ध शक्ति पीठ माता दुर्गा को समर्पित है। इस स्थान की दूरी पौड़ी कोटद्वार सड़क मार्ग 33 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान भी प्रमुख धार्मिक स्थानों में से एक है। हर साल भक्तगण भारी संख्या में माता के दर्शनों के लिए यहां आते हैं। पौड़ी कोटद्वार सड़क मार्ग से पौड़ी स्थित ज्वालपा देवी मंदिर की दूरी 34 किलोमीटर है। हर साल नवरात्रों के अवसर पर यहां ज्वालपा देवी विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। यहां पर एक संस्कृत विद्यालय भी है, जहां दूर-दूर से आने वाले विद्यार्थी शिक्षा-दीक्षा ग्रहण करते हैं।
Reference -