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District

Budaun

 संक्षिप्त परिचय – गंगा नदी के तट पर बसा ऐतिहासिक जिला बदायूं उत्तर- प्रदेश का महत्वपूर्ण जिला है. जिले का प्राचीन नाम वोदामयूता है. वहीं प्राचीन शिलालेखों में जिले का वेदामूथ नाम से भी वर्णन मिलता है. यह जिला बरेली मंडल के अंतर्गत आता है, जो कि क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से काफी विस्तृत है. सबसे बड़े जिलों की श्रृंखला में बदायूं का प्रदेश में 45वां स्थान है. अपने प्राचीन इतिहास व धार्मिक स्थलों के कारण यह जिला सूबे में विशेष स्थान रखता है. बदायूं को सूफी संतों, वलियों व

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Reference data & background — source: Census 2011 & editorial notes, may be outdated

 संक्षिप्त परिचय –

गंगा नदी के तट पर बसा ऐतिहासिक जिला बदायूं उत्तर- प्रदेश का महत्वपूर्ण जिला है. जिले का प्राचीन नाम वोदामयूता है. वहीं प्राचीन शिलालेखों में जिले का वेदामूथ नाम से भी वर्णन मिलता है. यह जिला बरेली मंडल के अंतर्गत आता है, जो कि क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से काफी विस्तृत है. सबसे बड़े जिलों की श्रृंखला में बदायूं का प्रदेश में 45वां स्थान है. अपने प्राचीन इतिहास व धार्मिक स्थलों के कारण यह जिला सूबे में विशेष स्थान रखता है. बदायूं को सूफी संतों, वलियों व पीरों की धरती भी कहा जाता है. वहीं अजमेर शरीफ़ जाने वाला हर श्रृद्धालु अपनी यात्रा के दौरान पहले बदायूं में नवाज़ पढ़ता है, उसके बाद ही दरगाह की ओर प्रस्थान करता है.

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि –

प्राचीन इतिहास के आधार पर जिले की मीमांसा की जाए तो यह जिला 11वीं शताब्दी के समय का प्रतीत होता है. जिले को लेकर कई किवदन्तियां प्रचलित है. कुछ के आधार पर इस जिले को 10वीं शताब्दी में राजा बुद्ध ने बसाया था, तो वहीं कई जगह बदायूं का पांचाल देश की राजधानी के रूप में उल्लेख है. यह भी कहा जाता है कि इस जिले की स्थापना 1175 ई. में अजयपाल ने की थी. साथ ही कुछ अन्य इतिहासकारों के अनुसार जिले को राजा लखनपाल ने बसाया था.

वहीं 1196 ईं. में इस जिले पर मुस्लिम शासक कुतुब-उद-दीन ऐबक ने कब्जा कर इसे अपने साम्राज्य में मिला लिया था. 1210- 1214 ईसवी के मध्य सुल्तान इल्तुतमिश के शासनकाल में यह जिला दिल्ली सल्तनत की राजधानी भी रहा है. आधुनिक इतिहास के आधार पर बदायूं एक स्वतंत्र क्षेत्र था तथा स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जुलाई, 1949 को इस जिले को गणतंत्र भारत में शामिल किया गया और इसे भारतीय जिले का दर्जा दिया गया. जिसके बाद बदायूं अपने वास्तविक अस्तित्व में आया. इसके अलावा भी इस जिले के धार्मिक स्थलों को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं.

भौगोलिक परिदृश्य –

रूहेलखंड के अंतर्गत आने वाला बदायूं जिला 28°25’ - 29°10’ उत्तरी अक्षांश तथा 78°54 - 69°20 पूर्वी देशांतर के मध्य स्थित है. जिले का क्षेत्रफल 4234.21 वर्ग कि.मी. है. यह जिला समुद्र तल से उत्तर में 192 मी. व दक्षिण में 166.4 मी. की ऊंचाई पर बसा हुआ है. वहीं प्रदेश में जिले की भौगोलिक स्थिति की बात करें तो बदायूं पूर्व में शाहजहांपुर, फर्रूखाबाद, पश्चिम में बुलंदशहर, उत्तर में मुरादाबाद, बरेली, रामपुर तथा दक्षिण में अलीगढ़ जिलों से घिरा हुआ है.

 संक्षिप्त परिचय –
गंगा नदी के तट पर बसा ऐतिहासिक जिला बदायूं उत्तर- प्रदेश का महत्वपूर्ण जिला
है. ज

यहां का ज्यादातर भूभाग समतल है. वहीं यहां के कुल 520039 हेक्टेयर क्षेत्र का 6899 हे. भाग वन भूमि के रूप में चिन्हित है. जिले में प्रमुख रूप से गंगा नदी प्रवाहित होती है. अतः यहां की कृषि भूमि काफी उपजाऊ है. यहां मुख्यतः दोमट व मटियार मिट्टी पाई जाती है. वहीं जिले में सामान्यतः गेहूं, धान, तम्बाकू, मक्का आदि की खेती होती है. गंगा नदी के तट पर बसा होने के कारण जिले के गांवों में तरबूज, खरबूज, ककड़ी आदि की भी बड़ी मात्रा में खेती की जाती है.

प्रशासनिक विभाजन –

सहूलियत के हिसाब से प्रशासनिक आधार पर जिले को विभिन्न स्तरों पर विभाजित किया गया है. जिले में कुल 6 तहसीलें (बदायूं, दातागंज, सहसवान, बिसौली, बिल्सी, गुन्नौर) व 15 ब्लॉक हैं. जिनके अंतर्गत कुल 1474 गांव आते हैं.

राजनीतिक आधार पर बदायूं लोकसभा क्षेत्र को 6 विधानसभाओं में बांटा गया है, जिनके अंतर्गत 164 पंचायत समितियां व 6 नगर पालिकाएं शामिल हैं. जिले की 6 विधानसभा सीटें बदायूं सदर, बिल्सी, दातागंज, शेखूपुर, सहसवान व बिसौली सामिल है. सन् 2012 से पहले जिले में 7 वि.स क्षेत्र थे, जिसमें से सातवां क्षेत्र गुन्नौर वर्तमान में संभल जिले का हिस्सा है. 

जनसांख्यिकी –

बदायूं की कुल आबादी 31,29,000 (2011 की जनगणना के आधार पर) है. जिले  का जनसंख्या घनत्व 712 वर्ग कि.मी. है, जो कि अन्य कई जिलों की अपेक्षा काफी कम है. यहां की जनसंख्या उ.प्र. की कुल जनसंख्या का महज़ 1.84 प्रतिशत ही है. साथ ही जिले की जनसंख्या बढ़ोतरी दर 19.95% है, जिसमें पिछले वर्षों की तुलना में काफी गिरावट आई है. वर्ष 2001 में यहां की जनसंख्या बढ़ोतरी दर 25.37% थी.

वहीं यहां के स्त्री- पुरूष अनुपात की बात करें तो जिले का लिंगानुपात 871 है तथा जिले में पुरूष व महिलाओं की जनसंख्या क्रमशः 16,71,000 व 14,58,000 है. वहीं यहां का बाललिंगानुपात 899 है. इसके अलावा बदायूं साक्षरता के मामले में अभी काफी पिछड़ा है. जिले की साक्षरता दर मात्र 51.29% ही है. जिसके अंतर्गत पुरूष साक्षरता दर 60.98% व महिला साक्षरता दर 40.09% है. हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इस प्रतिशत में काफी सुधार हुआ है. 2001 की जनगणना के आधार पर जिले की साक्षरता दर 38.17% थी.

जलवायु –

बदायूं की जलवायु उत्तर- भारत के अन्य जिलों की भांति ही है. यह एक तराई क्षेत्र है, जिस कारण यहां की जलवायु साधारणतया सुखद रहती है. जिले में गर्मी का मौसम मार्च के अन्त से शुरू हो जाता है तथा इस मौसम में यहां का औसत तापमान 44 डिग्री सेंटिग्रेड तक रहता है. वहीं जिले में मानसून जून के अन्त में अथवा जुलाई के आगमन के साथ ही दस्तक देता है तथा सितम्बर तक रहता है. यहां औसत वर्षा 861 मि.मी. तक होती है. मानसून की अधिकतम वर्षा जुलाई- अगस्त माह में होती है. वहीं यहां सुखद शीत ऋतु का आगमन अक्टूबर के अंत में होने लगता है. दिसम्बर और फरवरी में जिले में सबसे ज्यादा सर्दी पड़ती है तथा इस मौसम में जिले का तापमान 2 डिग्री सेंटिग्रेड तक पहुंच जाता है.

पर्यटन स्थल –

यह जिला हिन्दू – मुस्लिम दोनों ही धर्मों की प्राचीन विरासतों को संजाए है. जिले में सभी धर्मों के ऐतिहासिक व दर्शनीय स्थल मौजूद हैं, जो कि इस प्रकार है –

 संक्षिप्त परिचय –
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1.     गौरी शंकर मंदिर –

जिले के उसावां क्षेत्र के समीप स्थित यह मंदिर भगवान शंकर व माता पार्वती को समर्पित है. मंदिर की स्थापना 2001 में राम शरण रस्तोगी द्वारा करायी गई थी. मंदिर की विशेषता है यहां स्थापित रसलिंग (शिवलिंग), जो कि पूरे देश में अद्वितीय है. माना जाता है कि इस रसलिंग का निर्माण स्वर्ण और पारे से हुआ है, इस कारण इसे महाशिवलिंग भी कहा जाता है.

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2.     नगला मंदिर –

जिले में स्थित यह मंदिर अत्यन्त प्राचीन व मान्यता प्राप्त मंदिर है. इस मंदिर में मां काली की प्रतिमा विराजमान है, जिसे शक्तिपीठ के रूप में भी जाना जाता है. यह मंदिर क्षेत्र में आस्था और श्रद्धा केन्द्र है, जहां नवरात्रों में सैकड़ों की संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ती है. यह मंदिर करीब 800 वर्ष पुराना है तथा मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी के आस- पास हुआ था.

3.     जामा मस्जिद बदायूं –

बदायूं स्थित जामा मस्जिद देशभर की मस्जिदों में अहम स्थान रखती है, वहीं यह जिले का प्रमुख मुस्लिम धार्मिक स्थल है. इस मस्जिद की नींव मुगल बादशाह इल्तुतमिश ने 1210 में रखी थी तथा उसके पुत्र रूकुनुद्दीन ने मस्जिद का निर्माण कार्य पूर्ण कराया. जामा मस्जिद अपनी अद्भुत शिल्प व स्थापत्य कला के लिए जानी जाती है. वहीं मस्जिद की दीवारों पर फारसी व अफगान शैली के उदाहरण भी दिखाई देते हैं.

 संक्षिप्त परिचय –
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4.     मख्बरा –

यह स्थल जिले के शेखपुरा वि.स. क्षेत्र में स्थित है. यहां शाहजहां की पत्नी मुमताज महल की बहन परवर बानों का मख्बरा बना हुआ है.

5.     बदायूं किला / रोजा –

रोजा के नाम के प्रसिद्ध बदायूं स्थित यह किला जिले के प्रमुख आकर्षण केन्द्रों में से एक है. यह एक मुगलकालीन इमारत है, जहां इखलास खां का मकबरा बना हुआ है. जिसका निर्माण उनकी बेगम ने सन् 1690 में कराया था.

इसके अलावा बदायूं में अन्य कई छोटे- बड़े, प्राचीन- आधुनिक मंदिर व मस्जिद स्थित हैं, जो कि जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में शुमार हैं.

REFRENCES -

 https://budaun.nic.in/hi/

http://dcmsme.gov.in/dips/2016-17/21_DIPS_Budaun.pdf

https://www.census2011.co.in/census/district/520-budaun.html

 

 

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