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District

Buxar

संक्षिप्त विवरण – बिहार के प्रमुख जिलों में से एक बक्सर प्रदेश का अत्यंत प्राचीन व ऐतिहासिक दृष्टिकोंण से महत्वपूर्ण जिला है. यह बिहार की राजधानी पटना से 125 किमी की दूरी पर है. यह जिला उत्तर- प्रदेश के बलिया जिले के दक्षिण में रोहतास जिले एवं पश्चिम में उत्तर गाजीपुर जिले एवं पूर्व में भोजपुर जिले से घिरा हुआ है. प्राचीनकाल में इस जिले को “सिद्धाश्रम”, “करूष”, “वेदगर्भापुरी”, “तपोवन”, “चैत्रथ “, “व्याघ्रसर”, “बक्सर” आदि नामों से जाना जाता था. <

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संक्षिप्त विवरण –

बिहार के प्रमुख जिलों में से एक बक्सर प्रदेश का अत्यंत प्राचीन व ऐतिहासिक दृष्टिकोंण से महत्वपूर्ण जिला है. यह बिहार की राजधानी पटना से 125 किमी की दूरी पर है. यह जिला उत्तर- प्रदेश के बलिया जिले के दक्षिण में रोहतास जिले एवं पश्चिम में उत्तर गाजीपुर जिले एवं पूर्व में भोजपुर जिले से घिरा हुआ है. प्राचीनकाल में इस जिले को “सिद्धाश्रम”, “करूष”, “वेदगर्भापुरी”, “तपोवन”, “चैत्रथ “, “व्याघ्रसर”, “बक्सर” आदि नामों से जाना जाता था.

कई प्राचीन किवदन्तियों व मान्यताओं का गवाह रहा बक्सर सन् 17 मार्च 1991 में अपने मूल अस्तित्व में आया. इससे पहले यह भोजपुर जिले का उपखंड था.  इस जिले में 2 अनुमंडल एवं 11 प्रखंड है. बक्सर जिले के अंतर्गत बक्सर सदर और पुराने भोजपुर जिला के अंतर्गत डुमराव अनुमंडल में आता है. इस जिले का मुख्यालय बक्सर शहर के अंतर्गत स्थित है, जो कि बक्सर के मुख्य शहर के रूप में भी जाना जाता है.

इतिहास –

बक्सर जिला महज़ ऐतिहासिक ही नहीं बल्कि पौराणिक, सांस्कृतिक व आध्यात्मिक दृष्टिकोंण से भी अहम स्थान रखता है. प्राचीन पुराणों में भी देवी- देवताओं के युद्धक्षेत्र के रूप में इसका वर्णन रहा है. वहीं इस जिले का आधुनिक इतिहास कई मुगल शासकों के शासन व युद्ध का गवाह है. साथ ही पुरातत्व विभाग को इस जिले के हड़प्पा व मोहनजोदड़ो की संस्कृति से संबंध होने के प्रमाण भी मिले हैं.

इस जिले का इतिहास रामायण से भी प्राचीन है. बक्सर में ही विश्वामित्र का आश्रम स्थित है व मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान राम व लक्ष्मण ने अपनी शिक्षा- दीक्षा प्राप्त की थी व यहीं श्री राम ने राक्षसी ताड़का का संहार किया था. ऋषि दुर्वासा के अभिशाप से ग्रसित ऋषि वेदशीरा के बाघ के चेहरे को पूर्वावस्था में लाने के लिए इसी स्थान पर एक पवित्र कुंड में स्नान कराया गया था, जिसके बाद इसे व्याघ्रसर कहा जाने लगा.

संक्षिप्त विवरण –
बिहार के प्रमुख जिलों में से एक बक्सर प्रदेश का अत्यंत प्राचीन व ऐतिहासिक दृष्टिको

वहीं मुगलकालीन इतिहास की बात करें तो सन् 1539 में मुगल शासक हुमायूं और शेर शाह के बीच लड़ा गया प्रसिद्ध चोसा का युद्ध बक्सर में ही हुआ था. इसके अलावा अवध के नवाब शुजा-उद-दौलह व मुगल सम्राट शाह आलम के मध्य व 1764 में ब्रिटिश व मीर कासिम के मध्य भी बक्सर में ही युद्ध हुआ था.

पर्यटन स्थल –

बक्सर जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल इस प्रकार हैं –

बिहारी जी का मंदिर –

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बिहार के प्रमुख जिलों में से एक बक्सर प्रदेश का अत्यंत प्राचीन व ऐतिहासिक दृष्टिको

भगवान कृष्ण का यह प्राचीन मंदिर बक्सर से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित है. इसका निर्माण 1825 में महाराजा जयप्रकाश सिंह ने करवाया था.

 कतकौली का मैदान –

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बिहार के प्रमुख जिलों में से एक बक्सर प्रदेश का अत्यंत प्राचीन व ऐतिहासिक दृष्टिको

बक्सर आने वाले पर्यटकों के लिए यह मैदान खासा आकर्षण का केन्द्र है. इसी मैंदान में अवध के नवाब शुजा-उद-दौलह व मुगल सम्राट शाह आलम तथा ईस्ट इंडिया कंपनी और बंगाल के नवाब मीर कासिम के मध्य युद्ध लड़ा गया था, जिसे बक्सर की लड़ाई के नाम से जानते हैं.

चौसा का मैदान –

इसी मैदान में 26 जून 1539 को हुमायूं व शेरशाह सूरी के बीच युद्ध लड़ा गया था. यह मैदान भी पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है.

भौगोलिक पृष्ठभूमि –

बक्सर जिला उत्तर में गंगा नदी एवं दक्षिण में उत्तर मध्य रेलवे के मध्य में स्थित है. यह जिला 25 डिग्री 18’- 25 डिग्री 45’ उत्तरी अंक्षाश और  84 डिग्री 20’- 84 डिग्री 40’  पूर्वी देशांतर रेखा के मध्य स्थित है. जिले का क्षेत्रफल 1624 वर्ग किलोमीटर है. यह समुद्र तल से 55 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है तथा यहां का भूमि क्षेत्र मुख्यतः समतल व मैदानी है.

यह जिला उत्तर व उत्तर- पश्चिम में गंगा नदी तथा पश्चिम व दक्षिण- पश्चिम में कर्मनासा नदी से घिरा हुआ है. बक्सर में गेहूं उत्पादन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. वहीं यदि वनों के लिहाज़ से कभी काफी समृद्ध माने जाने वाले बक्सर में आज कटाई के कारण बहुत कम वन बचे हैं. यहां प्रमुख रूप से आम, शीशम व बांस आदि से घिरे बन पाये जाते हैं. वहीं बक्सर में किसी भी प्रकार के खनिज नहीं पाये जाते हैं.

जलवायु –

उत्तर- भारत का जिला होने के कारण बक्सर की जलवायु सामान्य है. यहां मार्च से मई के मध्य ग्रीष्म ऋतु, जून से सितबंर तक मानसून व अक्टूबर से फरवरी तक शीत ऋतु रहती है. जिले में अधिकतम वर्षा जुलाई- अगस्त में होती है, साथ ही जनवरी का माह यहां सबसे ठंडा होता है तथा इस माह में कभी- कभी तापमान 4 डिग्री सेल्सियस तक भी पहुंच जाता है.

 ड्रेनेज सिस्टम –

बक्सर जिले का प्रमुख जल स्त्रोत सोन व गंगा नदी हैं. इसके अलावा यहां कई कुएं, तालाब व नहरें भी स्थित हैं. जिनके माध्यम में मुख्य रूप से सिंचाई हेतु जल की आपूर्ति की जाती है. वहीं जिले के लोगों ने अपनी सुविधा के लिए व वर्षा के जल को एतत्रित करके उसका सिंचाई में उपयोग करने के लिए कई कृत्रिम स्त्रोत (नाले आदि) भी बनाएं हैं.

जनसांख्यिकी –

2011 की जनगणना अनुसार, बक्सर जिले की कुल जनसंख्या 17,06,352 है, जिसके अंतर्गत पुरूषों व महिलाओं की संख्या क्रमशः 8,87,977 (52.65%) व 8,18,375 (47.35%) है. यहां का जनसंख्या घनत्व 63 वर्ग/ किमी है. वहीं जिले की साक्षरता दर 70.04 प्रतिशत है, जिसमें कि पुरूष साक्षरता दर 80.72 प्रतिशत व महिला साक्षरता दर 58.63 प्रतिशत है.

प्रशासनिक विभाजन –

 बक्सर जिले में 2 नगर परिषद, 2 अनुमंडल व 11 प्रखंड हैं. जिले के 11 प्रखंडों में से 7 प्रखंड डुमरांव अनुमंडल में एवं चार प्रखंड सदर अनुमंडल में है. वहीं बक्सर एवं डुमराव अनुमंडलो में एक- एक शहर है. साथ ही इसमें 142 पंचायतें और 1142 गांव स्थित हैं. वहीं राजनीतिक आधार पर जिले के विभाजन की बात करें तो बक्सर लोकसभा क्षेत्र बक्सर, कैमूर, रोहतास विधानसभा क्षेत्रों को जोड़कर हुआ है. बक्सर में 4 विधानसभा क्षेत्र बक्सर, ब्रह्रमपुर, डुमराव व राजपुर है, किन्तु इसके संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत रामगढ़ व दिनारा भी शामिल हैं.

नागरिक सुविधाएं –

बक्सर में नागरिक सुविधाओं के संदर्भ में बात करें तो स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज़ से 13 अस्पताल है. साथ ही शिक्षा की उपलब्धता महर्षि विश्वामित्र विश्वविद्यालय स्थित है. वही मुनीम चौक बक्सर में जिले का पुराना डाकघर स्थित है. इसके अलावा जिले में 6 बैंकें व सुरक्षा के दृष्टिकोंण से 16 पुलिस स्टेशन भी मौजूद हैं. वहीं औद्योगिक विकास की बात करें तो बक्सर में साबुन, लकड़ी व चमड़े का उद्योग तेजी से फल- फूल रहा है.

2025 का सबसे चर्चित नाम: पूर्व आईपीएस आनंद मिश्रा

पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा आज बिहार की राजनीति में एक तेजी से उभरते हुए और अत्यंत चर्चित चेहरे के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने अपने पुलिस सेवा काल में जिस ईमानदारी, सख़्त प्रशासनिक कार्यशैली और कर्तव्यनिष्ठा का प्रदर्शन किया, उसने उन्हें न केवल बिहार बल्कि देशभर में एक सशक्त और निष्पक्ष अधिकारी के रूप में स्थापित किया। अपराध और अपराधियों के खिलाफ उनकी जीरो टॉलरेंस नीति, आम जनता के प्रति सहज और संवेदनशील व्यवहार, तथा कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने में उनकी सक्रिय भूमिका ने लोगों पर गहरा प्रभाव छोड़ा। राजनीति में कदम रखने के बाद आनंद मिश्रा की लोकप्रियता और भी बढ़ी है, विशेषकर बिहार के युवाओं और पढ़े-लिखे वर्ग में वे एक नई उम्मीद के रूप में देखे जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनकी मजबूत उपस्थिति, साफ-सुथरी छवि और विकास-केन्द्रित विचारधारा ने उन्हें आम लोगों के काफी करीब ला दिया है। 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में वे सबसे अधिक चर्चा वाले चेहरों में शामिल हैं, और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि वे चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो अपनी ईमानदारी और जनता के समर्थन के बल पर एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं। हालांकि, अभी तक किसी आधिकारिक रूप से उनकी "चुनाव जीत" की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन उनकी बढ़ती लोकप्रियता, जनसंपर्क अभियान और जनता की अपेक्षाएँ यह संकेत देती हैं कि वे बिहार की राजनीति में लंबी और प्रभावशाली पारी खेल सकते हैं। उनकी छवि एक ऐसे नेता की है जो भ्रष्टाचार-मुक्त शासन, विकास, सुरक्षा और सशक्त प्रशासन की बात करता है, और यही कारण है कि आनंद मिश्रा बिहार के हजारों लोगों के लिए प्रेरणा और भरोसे का नाम बनते जा रहे हैं।

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बक्सर में बाढ़ और पर्यावरणीय चुनौतियाँ

बक्सर में बाढ़ और पर्यावरणीय चुनौतियाँ हर वर्ष स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी समस्या बनकर सामने आती हैं। गंगा और उससे जुड़ी सहायक नदियाँ मानसून के दौरान उफान पर आ जाती हैं, जिसके कारण निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों का जीवन-यापन बुरी तरह प्रभावित होता है। बाढ़ से खेतों में लगी फसलें नष्ट हो जाती हैं, पशुधन को खतरा बढ़ जाता है और कई गांवों का सड़क संपर्क टूट जाता है। इसके अतिरिक्त, अनियंत्रित शहरीकरण, नदी तटों पर अतिक्रमण, और जल निकासी प्रणाली की कमजोर स्थिति समस्या को और गंभीर बना देती है। पर्यावरणीय दृष्टि से भी बक्सर कई चुनौतियों का सामना कर रहा है—वायु प्रदूषण, प्लास्टिक कचरे का बढ़ता उपयोग, पेड़ों की कटाई और जल स्रोतों का लगातार दूषित होना क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा पैदा कर रहा है। बरसात के बाद गंगा की बदलती धारा के कारण कटाव की समस्या बढ़ जाती है, जिससे कई परिवारों को बार-बार विस्थापन झेलना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते नदी प्रबंधन, जल संरक्षण, तटबंधों की मजबूती और पर्यावरण संरक्षण पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में बक्सर में बाढ़ और पर्यावरणीय संकट और भी विकराल रूप ले सकते हैं। इसलिए प्रशासन और स्थानीय समुदाय, दोनों को मिलकर सतत विकास की दिशा में काम करना होगा, ताकि बक्सर का प्राकृतिक संतुलन और मानव जीवन सुरक्षित रह सके।

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REFRENCES -

https://buxar.nic.in/

 http://censusindia.gov.in/2011census/dchb/1030_PART_B_DCHB_BUXAR.pdf

http://cgwb.gov.in/District_Profile/Bihar/Buxar.pdf

https://data.gov.in/resources/town-amenities-buxar-district-bihar-2011

 https://www.telegraphindia.com/states/bihar/the-new-battles-of-buxar/cid/1327625#.W

 

 

 

 

 

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