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District

Kaimur

संक्षिप्त परिचय - कैमूर जिला भारत के 38 जिलों में से एक है। जिसका प्रशासनिक मुख्यालय, भभुआ में है। प्राचीनतम काल में 1991 से पहले यह रोहतास जिले का हिस्सा था। वैदिक तथा पुराणों के अनुसार, कैमूर की संस्कृति में, कोल ने कोल संस्कृति और कोल कैमूर साम्राज्य की स्थापना की थी। पौराणिक काल में, इस संस्कृति का विकास कोल वंशी कनक के पौत्र क्टतवर्य के पुत्र सहस्त्रार्जुन ने किया। जिसका संरक्षक असुर संस्कृति के रूप में परिवर्तन असुर राज मुण्ड द्वारा किया

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Who's building Kaimur

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Leaders & listed citizens (1)

Reference data & background — source: Census 2011 & editorial notes, may be outdated
संक्षिप्त परिचय -
 
कैमूर जिला भारत के 38 जिलों में से एक है। जिसका प्रशासनिक मुख्यालय, भभुआ में है। प्राचीनतम काल में 1991 से पहले यह रोहतास जिले का हिस्सा था। वैदिक तथा पुराणों के अनुसार, कैमूर की संस्कृति में, कोल ने कोल संस्कृति और कोल कैमूर साम्राज्य की स्थापना की थी। पौराणिक काल में, इस संस्कृति का विकास कोल वंशी कनक के पौत्र क्टतवर्य के पुत्र सहस्त्रार्जुन ने किया। जिसका संरक्षक असुर संस्कृति के रूप में परिवर्तन असुर राज मुण्ड द्वारा किया जाता था। कालान्तर में लोगों का मानना है कि बिहार राज्य में युद्ध संग्रामो के बाद शांति की स्थापना माता मुंडेश्वरी मंदिर के उदय से हुई।
 
 वर्तमान में यह राज्य पश्चिम में उत्तर प्रदेश, पूर्व दिशा में पश्चिम बंगाल एवं दक्षिण में झारखंड से जबकि उत्तर दिशा में नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़ा हुआ है। वहीं इस नगरी को बौद्ध तथा भिक्षुओं के ठहरने के स्थान के लिए "बौद्ध एवं मठों की नगरी" भी कहा जाता है। मठों के विहार करने के कारण इस सम्पूर्ण इलाके को "विहार" कहा जाने लगा। जो कालांतर में "बिहार" के नाम से प्रचलित हुआ। 
    
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि -
  
 कैमूर का इतिहास काफी प्राचीन और रूचिकर है। ऐतिहासिक दृष्टि से यह स्थान अति महत्वपूर्ण माना जाता है। जानकारी के अनुसार, पूर्व काल में यह जिला छठी शताब्दी ई.पू. से पांचवी शताब्दी ई. पूर्व तक शक्तिशाली मगध साम्राज्‍य का हिस्सा था। इसके बाद सातवीं शताब्दी में, कैमूर कन्नौज के शासक हर्षवर्द्धन के अधीन आ गया। लोगो की मान्यता है कि सी. मार्क एक  इतिहासकार थे। जो इस क्षेत्र पर शासन करने वाले प्रथम शासक पाल वंश के थे। उसके बाद चन्दौली का यहां शासन रहा और बारहवीं शताब्दी में ताराचंदी ने कैमूर जिले पर राज किया। अत: यह क्षेत्र कई शासक वंशो के अधीन रहा। 
 
बताते चलें कि इस राज्य के पूर्व ऐतिहासिक दिनों में जिले का पठार क्षेत्र ऐसे आदिवासियों का निवास था, जिनके मुख्य प्रतिनिधि अब भार, चेरोस और सैवर्स हैं। कुछ किंवदंतियों का कहना हैं कि खरवार रोहतास के पहाड़ी इलाकों में मूल बसने वाले थे। वहीं बिहार उत्तर प्रदेश के चन्दौली एवं मिर्जापुर जिले के पूर्व में यह रोहतास जिले का अंग रहा ।
  
भौगोलिक स्थिति -  
 
भौगोलिक दृष्टि से, कैमूर का भभुआ जिला लगभग 340447 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करता है  जिसे दो भागों में विभाजित किया गया हैं। (i) पहाड़ी क्षेत्र और (ii) मैदानी क्षेत्र  इस पहाड़ी क्षेत्र में कैमूर पठार शामिल है। वहीं पश्चिमी तरफ का मैदानी क्षेत्र कर्मनाशा और दुर्गावती नदियों से घिरा हुआ है।
 
 कैमूर की प्रसिद्ध कुदरा नदी इसके पूर्वी किनारे पर स्थित है। वहीं इस जिले को उत्तर में बिहार राज्य का बक्सर जिला और उत्तर प्रदेश राज्य का ग़ाज़ीपुर जिला इसे जोड़ता था। दक्षिण में झारखंड राज्य का गढ़वा जिला है और पश्चिम में उत्तर प्रदेश राज्य का चंदौली और मीरजापुर जिला है। इस जिले का शाहाबाद के इतिहास से गहरा संबंध है, जो इसका मूल जिला भी था। बता दे कि शाहाबाद के पुराने जिले में चार उपमंडल थे जिनमें से भभुआ एक था। वर्तमान में कैमूर प्रखंड का जिला इसी भभुआ उपखण्ड से मिलकर बना है।
  
जलवायु एवं मिट्टी -
 
कैमूर जिले की जलवायु काफी हद तक चरम है था जनवरी के समय अधिक ठंड का मौसम होता है वहीं इस जिले में ज्यादातर जलवायु शुष्क रहती है। भूभाग की सूचना के हिसाब से बलथर मिट्टी, जो कैमूर से राजमहल पहाड़ियों तक फैली हुई है और लाल-पीले रंग के साथ लौह समृद्ध है, छोटा नागपुर पठार और गंगा के मैदान के बीच संक्रमण क्षेत्र में भी उत्पादकता के लिए जानी जाती है। यहां की प्रमुख फैसले बाल सुंदरी, सहरसा और चंपारण क्षारीय फसलें हैं, जिनमें मक्का और तंबाकू भी शामिल हैं।
 
प्रशासनिक विभाजन -
 
बनावट के हिसाब से बिहार का कैमूर जिला दो अनुमंडल में बटा हुआ है। जिसमें मोहनिया और भभुआ प्रमुख है। जिसके साथ ही यहां ग्यारह सामुदायिक विकास ब्लॉक है एवं जिले की प्रशासनिक व्यवस्था प्रमंडल, जिला, प्रखंड, नगर निगम, नगरपालिका नगर परिषद, नगर पंचाह्यगो में बटी हुई है। जिसमें 1700 गांव सम्मिलित है l जो राज्य 9 प्रमंडल, 38 जिला, 534  प्रखंड ब्लॉक सहित 12 नगर निगम, 49 नगर परिषद और 80 नगर पंचायत में विभाजित है।
 
जनसांख्यिकी -
 
2011 की जनगणना के अनुसार, कैमूर जिले की जनसंख्या 1,626,384 है, जो लगभग अमेरिकी राष्ट्र के बराबर है। जिस कारण से इसे भारत में कुल 640 में से 307वीं रैंकिंग मिली है। बता दे कि जिले का जनसंख्या घनत्व, 488 निवासी प्रति वर्ग किलोमीटर 1,260/वर्ग मील है। वहीं 2001 से लेकर 2011 के दशक में इसकी जनसंख्या वृद्धि दर 27.54% हुई थी। कैमूर में लिंगानुपात प्रति 1000 पुरुषों पर 919 महिलाओं का है, एवं इसकी साक्षरता दर 71.01% है। वहीं 4.03% जनसंख्या शहरी क्षेत्रों में रहती है। यहां अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति क्रमशः जनसंख्या का 22.69% और 3.57% हैं।
  
 पर्यटन स्थल -
 
प्राचीन स्थल, शहर और सरंचनाओं को देखते हुए, इतिहास में दिलचस्पी रखने वाला यह राज्य किसी खजाने से कम नहीं! इस कारण प्राकृतिक खूबसूरती से सराबोर बिहार के कैमूर राज्य में प्रमुख दर्शनीय स्थल अग्रलिखित है - 
 
1. कैमूर श्रृंखला -
 
  भ्रमण की द्रष्टि से कैमूर की पहाड़ी श्रृंखला से लोगो के लिए एक पर्यटन स्थल है। ये लगभग 483 कि.मी में फैली ये पहाड़ियां विंध्य रेंज के पूर्वी भाग का हिस्सा हैं। कैमूर श्रृंखला मध्यप्रदेश के जलबलपुर से लेकर बिहार के सासाराम तक फैली हुई हैं। घने जंगलों और हरियाली से भरी ये पहाड़ियां प्रकृति के अद्भुत दृश्य प्रदर्शित करती हैं। कैमूर की पहाड़ियां कई प्राकृतिक आकर्षणों का घर भी हैं।
 
2. करकट जलप्रपात -
  
सुंदरता की द्रष्टि से कैमूर की पहाड़ियों कई खूबसूरत जलप्रपातों का घर भी मानी जाती है। पर्यटक यहां बोटिंग, स्विमिंग, फिशिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का आनंद उठाने आते है। वहीं यह जलप्रपात कैमूर वन्यजीव अभयारण्य के पास स्थित है। करकर जलप्रपात चारों तरफ से प्राकृतिक खूबसूरती से भरा हुआ है। इसके अलावा यहां का प्राकृतिक माहौल आत्मिक और मानसिक शांति का अनोखा अनुभव प्रदान करता है।
 
3. तेलहार कुंड -
 
 बता दे कि यह एक जलप्रपात है, जो कैमूर जिले के भभुआ-औधोरा मार्ग पर स्थित है। वहीं यह जलप्रपात यहां के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। जहां खासकर मानसून के दौरान यहां की खूबसूरत देखने लायक होती है। यहां का आसपास का प्राकृतिक माहौल सैलानियों का काफी ज्यादा प्रभावित करता है। तेलहार कुंड दुर्गावती नदी के काफी निकट स्थित है। इस जलप्रपात के पास एकमां मुंडेश्वरी का एक पुराना मंदिर भी स्थित है।
 
4. कैमूर वन्यजीव अभयारण्य - 
 
उपरोक्त स्थलों के अलावा यहां की प्रसिद्ध कैमूर वन्यजीव अभयारण्य दर्शको के लिए बहुत ही खूबसूरत स्थान माना जाता है। यह अभयारण्य भभुआ नगर के पास स्थित है, जहां विभिन्न वनस्पतियों और कई जीव-जन्तुओं की प्रजातियों को देख सकते हैं। यह अभयारण्य लगभग 1342 वर्ग कि.मी में फैला है। जंगली जीवों में यहां बंगाल टाइगर, जंगली सूअर, स्लोथ भालू, सांभर, हिरण, चितल, नीलगाय आदि को यहां पर सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा यहां कई पक्षी प्रजातियों को भी पर्यटक देखने के लिए आते है।
 
5. अधौरा -
 
यह भभुआ से 58 किलोमीटर की दूरी पर कैमूर पठार पर समुद्र तल से 2000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। पहाड़ियाँ और आसपास के जंगल इसे एक आदर्श पर्यटन स्थल बनाते हैं।
  
6. बैद्यनाथ मंदिर -
 
बैद्यनाथ गांव रामगढ़ ब्लॉक मुख्यालय से 9 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। प्रतिहार राजवंश द्वारा निर्मित एक शिव मंदिर यहाँ स्थित है। यहां ऐतिहासिक महत्व के सिक्के और कीमती सामान मिले हैं।
 
7. भभुआ -
 
भभुआ कैमूर जिले का मुख्यालय है। यह नगरपालिका शहर जीटी रोड से 14 किमी दक्षिण में स्थित है, जो ग्रैंड कॉर्ड रेलवे लाइन पर भभुआ रोड रेलवे स्टेशन से पहुंचने वाली सड़क से जुड़ा है।
 
8. भगवानपुर -
  
भगवानपुर भभुआ से 11 किलोमीटर दक्षिण में कैमूर पहाड़ियों के पास स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि यह कुमार चंद्रसेन सरन सिंह की शक्ति का केंद्र था, जिन्होंने पारस से अपने वंश का दावा किया था। इसे शेरशाह ने राजा शालिवाहन से जब्त कर लिया था, लेकिन बाद में अकबर के शासनकाल के दौरान उसके उत्तराधिकारी को इसे बहाल कर दिया गया।
  
9. अधौरा प्रखंड का चोरघटिया एवं दुरौली गांव -
 
चोरघटिया गांव सुंदर दृश्यों के बीच झरने के साथ एक उत्कृष्ट सौंदर्य स्थल है। वहीं दुरौली गाँव, जो कि रामगढ से 8 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है, में चेरो द्वारा निर्मित दो पुराने मंदिर हैं।
  
10. मुंडेश्वरी मंदिर -
    
गांव में प्रसिद्ध मुंडेश्वरी मंदिर है, जो लगभग 600 फीट की ऊंचाई पर एक पहाड़ी की चोटी पर बना है। यहां पाए गए पुरातात्विक महत्व के शिलालेखों से पता चलता है कि मंदिर इतना पुराना है वहीं इसका निर्माण वर्ष 635 ई. के आसपास हुआ था।
Reference -
   
  
    

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