संक्षिप्त परिचय -
प्रकृतिप्रेमियों के लिए हरिद्वार स्वर्ग जैसा सुन्दर है। माना जाता है कि यह उत्तराखण्ड के हरिद्वार जिले का एक पवित्र नगर तथा सनातन (हिन्दुओं) का प्रमुख तीर्थ स्थल भी है। जो कि नगर निगम बोर्ड द्वारा नियंत्रित एक बहुत प्राचीन नगरी है। हरिद्वार हिन्दुओं के सात पवित्र स्थलों में से एक है। लोगों का ऐसा विश्वास है कि यहाँ मरनेवाला प्राणी परमपद पाता है और स्नान से उसके जन्म-जन्मांतर का पाप कट जाता है और परलोक में हरिपद की प्राप्ति होती है।

सूत्रों के अनुसार, यह जिला भारतीय संस्कृति और सभ्यता का एक बहुरूप्रदर्शन प्रस्तुत करता है। यह चार धाम यात्रा के लिए प्रवेश द्वार भी है जिसमें उत्तराखंड के चार धाम है:- बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री सम्मिलित है। वहीं 3139 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गंगा नदी अपने स्रोत गोमुख (गंगोत्री हिमनद) से 253 किमी की यात्रा करके हरिद्वार में मैदानी क्षेत्र में प्रथम प्रवेश करती है, इसलिए हरिद्वार को 'गंगाद्वार' के नाम से भी जाना जाता है; जिसका अर्थ है वह स्थान जहाँ पर गंगाजी मैदानों में प्रवेश करती हैं। हरिद्वार का अर्थ "हरि ईश्वर का द्वार" होता है। इसलिए भगवान शिव के अनुयायी और भगवान विष्णु के उपासक इसे क्रमशः हरद्वार और हरिद्वार के नाम से भी पुकारते हैं। जिसका अर्थ है हर अर्थात् शिव (केदारनाथ) और हरि अर्थात् विष्णु (बद्रीनाथ) तक जाने का द्वार।
वर्तमान समय में यह जिला अपने धार्मिक महत्त्व के अतिरिक्त भी, उत्तराखंड राज्य के एक प्रमुख औद्योगिक केन्द्र के रूप में, तेज़ी से विकसित हो रहा है। तेज़ी से विकसित होता औद्योगिक एस्टेट, राज्य ढांचागत और औद्योगिक विकास निगम, (सिडकुल), भेल (भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) के साथ इसके अन्य सम्बंधित सहायक नगर इसके विकास के साक्ष्य हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि -
जिले के इतिहास की ओर दृष्टि डाले तो पश्चात्कालीन हिदू धार्मिक कथाओं के अनुसार, हरिद्वार वह स्थान है जहाँ अमृत की कुछ बूँदें भूल से घड़े से गिर गयीं जब धन्वन्तरी उस घड़े को समुद्र मंथन के बाद ले जा रहे थे। इस दौरान मान्यता है कि चार स्थानों पर अमृत की बूंदें गिरी थीं। वे स्थान हैं:- उज्जैन, हरिद्वार, नासिक और प्रयाग है। इन चारों स्थानों पर बारी-बारी से हर 12 वें वर्ष में महाकुम्भ का आयोजन होता है।
लोगो का यह भी मानना है कि हरिद्वार बहुत प्राचीन तीर्थ है। हरिद्वार का नाम भी उत्तर पौराणिक इतिहासिक काल में ही प्रचलित हुआ। इसके बाद महाभारत में इसे केवल 'गंगाद्वार' ही कहा गया है। जिसे पुराणों में इसे गंगाद्वार, मायाक्षेत्र, मायातीर्थ, सप्तस्रोत तथा कुब्जाम्रक के नाम से वर्णित किया गया है। वहीं प्राचीन काल में कपिलमुनि के नाम पर इसे 'कपिला' भी कहा जाता था। ऐसा कहा जाता है कि यहाँ कपिल मुनि का तपोवन था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भागीरथ, जो सूर्यवंशी राजा सगर के प्रपौत्र (श्रीराम के एक पूर्वज) थे, गंगाजी को सतयुग में वर्षों की तपस्या के पश्चात् अपने 60,0000 पूर्वजों के उद्धार और कपिल ऋषि के शाप से मुक्त करने के लिए के लिए पृथ्वी पर लाये। इस प्रकार भारत में गंगा का आगमन हुआ। जो कि हरिद्वार जिले में प्रवेश करते हुए, अन्य स्थानो तक भी अपना मार्ग बनाती है।
भौगौलिक परिदृश्य -
जिले की भौगोलिक स्थिति की बात करे तो 2360 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र से घिरा हरिद्वार भारत के उत्तराखंड राज्य के दक्षिण पश्चिमी भाग में स्थित है। इसके अक्षांश व देशांतर क्रमशः 21.96 डिग्री उत्तर व 78.16 डिग्री पूर्व हैं। हरिद्वार जिला समुद्र तल से 249.7 मी की ऊंचाई पर उत्तर व उत्तर- पूर्व में शिवालिक पहाडियों तथा दक्षिण में गंगा नदी के बीच स्थित है।
बता दें कि यह जिला उन शहरों में से एक है। जहाँ गंगा पहाडों से निकलकर मैदानों में प्रवेश करती है। यहां गंगा का पानी एकदम स्वच्छ व ठंडा होता है। गंगा नदी विच्छिन्न प्रवाहों जिन्हें जज़ीरा भी कहते हैं की श्रृंखला में बहती है। जिले में यह अधिकतर जंगलों से घिरे हैं। इसके अन्य छोटे प्रवाह हैं जिनमें रानीपुर राव, पथरी राव, रावी राव, हर्नोई राव, बेगम आदि नदियां शामिल हैं। वहीं जिले का अधिकांश भाग जंगलों से घिरा है।
जनसांख्यिकी -
2001 में भारत की जनगणना के अनुसार हरिद्वार जिले की जनसंख्या 2,95,213 थी। जिसमें पुरुष 54% व महिलाएं 46% हैं। वहीं हरिद्वार की औसत साक्षरता राष्ट्रीय औसत का 59.5% से अधिक 70% है ।जिले में पुरुषो की साक्षरता दर 75% एवं महिलाओं की साक्षरता दर 64% है। हरिद्वार में, 12% जनसंख्या 6 वर्ष की आयु से कम है।
प्रशासनिक विभाजन -
पूर्व काल की जानकारी के अनुसार, हरिद्वार जिले के पश्चिमी भाग में सहारनपुर, उत्तरी और पूर्वी भाग में देहरादून एवं इसके पूर्व में पौडी गढवाल जिला और दक्षिण में रुड़की, मुज़फ़्फ़रनगर और बिजनौर स्थित हैं। बता दे कि हरिद्वार जिला नवनिर्मित राज्य उत्तराखंड में सम्मिलित है। इससे पहले यह जिला सहारनपुर के डिवीजन कमिशनरी का एक भाग था। इसके बाद पूरे जिले को मिलाकर एक संसदीय क्षेत्र बनता बनाया गया। जिसमें विधानसभा की 9 सीटे शामिल हैं जिनमे से भगवानपुर, रुड़की, इकबालपुर, मंगलौर, लांधौर, लक्सर, बहादराबाद, हरिद्वार एवं लालडांग प्रमुख है। तत्पश्चात हरिद्वार जिला प्रशासनिक रूप से हरिद्वार, रुड़की और लक्सर तहसीलों में विभाजित है। इसके बाद यह 6 विकास खण्डों भगवानपुर, रुड़की, नारसन, भद्रबाद, लक्सर और खानपुर आदि में बटा हुआ है। जिनमें'हरीश रावत' हरिद्वार लोकसभा सीट से वर्तमान सांसद और 'मदन कौशिक' हरिद्वार नगर से उत्तराखंड विधानसभा सदस्य हैं।
पर्यटन स्थल -
ऐसा माना जाता है कि हरिद्वार के दर्शनीय स्थल सभी पर्यटकों को हरी की शरणों में ले जाते है जहाँ उन्हें असीम आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है। यहां आने वाले दर्शको के पर्यटन स्थल अग्रलिखित है -
1. हर की पौड़ी -
यह गंगा नदी के किनारे मंदिरों का एक दृश्य जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते है। गंगा की पवित्र लहरों के घाट जिसे हर की पौड़ी के नाम से जाना जाता है यहां पर हर संध्या को आरती की जाती है जो गंगा मैया को समर्पित है। यहां पुजारियों द्वारा हाथ में लिए बड़ें-बड़े दीयों से इस पावन स्थान की आरती की जाती है देखकर ऐसा लगता है जैसे प्रकृति ने स्थल को अपनी रोशनी से जगमगा दिया हो। महाआरती के समय यहां की मधुर आवाज़ पूरे घाट में गूँजती हुई सुनाई पड़ती है। इस आरती का गवाह बनने सिर्फ भारतीय पर्यटक ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटक भी भारी मात्रा में आते हैं।
2. चंडी देवी मंदिर -
हरिद्वार के दर्शनीय स्थल में से एक चंडी देवी मंदिर का दृश्य पर्यटकों का मनमोह लेता है। नील पर्वत पर बसा यह मंदिर चंडी देवी को समर्पित है। ऊँचाई पर बसा यह मंदिर सिर्फ पूजा-पाठ का केंद्र नहीं है बल्कि यात्रियों के बीच ट्रैकिंग के लिए भी लोकप्रिय है। खूबसूरत प्राकृतिक नज़ारे के साथ भक्ति का मेल अद्भुत है। हरिद्वार के पाँच तीर्थ स्थलों में ये भी एक है जहाँ भक्त अपनी मनोकामना पूरी करने की इच्छा सँजो के लाते है। पहाड़ के ऊपर मंदिर व चारों तरफ हरियाली कितनी शोभा बिखेरता नज़र आता है। यह सबसे प्रसिद्ध हरिद्वार के दर्शनीय स्थल में से है।
3. राजाजी नेशनल पार्क -
हरिद्वार में राजाजी टाइगर रिजर्व एक बाघ शिकार पार्क है। बता दे कि शिवालिक पर्वत श्रृंखला से गुज़रता यह नेशनल पार्क अपने अनोखे वनस्पति व वन्यजीवों के लिए मशहूर है। यह मुख्य तौर पर बाघ व हाथियों के वन्य जीवन के लिए लोकप्रिय हैं। यह वन साल, टीक, आदि जैसे अन्य पेड़ों से लदा हुआ है।
4. मनसा देवी का मंदिर -
हरिद्वार का एक और लोकप्रिय मंदिर जो शिवालिक पहाड़ियों के बिल्वा पर्वत पर स्थित है। मनसा देवी को शक्ति का स्वरूप माना जाता है जो भगवान शिव के मस्तिष्क की उपज है। माना जाता है कि मनसा देवी भक्तों की मनकामनाओं को पूरा कर देतीं है इसलिए यहाँ श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। हज़ारों हिंदुओं की भीड़ यहाँ हर साल लग रहती है। सब अपनी-अपनी इच्छा पूर्ति की कामना इस मंदिर में आकर करते हैं। यह सबसे मशहूर हरिद्वार के दर्शनीय स्थल में से एक है।
5. वैष्णो देवी मंदिर -
कश्मीर के वैष्णो देवी मंदिर के नक्शे कदमों पर चलता हुआ यह मंदिर भी उसी की छवि है। यह मंदिर ऊँचाई पर स्थित है इसलिए यह धार्मिक यात्रियों के साथ-ही-साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए भी उचित स्थान है क्योंकि यहाँ से आपको सौंदर्य ही सौंदर्य देखने को मिलता है। मंदिर में तीन प्रतिमाए हैं- लक्ष्मी, काली व सरस्वती की जिन्हें बेहद महीनता से उकेरा गया है। मंदिर अपनी वास्तुकला व गुफाओं के लिए चर्चित है। यह सबसे नामी हरिद्वार के दर्शनीय स्थल में से है।
6. शांति कुंज आश्रम -
हरिद्वार दर्शन का मतलब एक शांतिपूर्ण स्थान। शांति कुंज हरिद्वार में घूमने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक है। यह आश्रम एक आदर्श स्थान है जो जीवन में मूल्यों के बारे में शिक्षा प्रदान करता है। आश्रम में जीवन जीने की कला सिखाने वाले कार्यक्रम वहां के प्रमुख आकर्षणों में से एक हैं। यहां न केवल हिंदू बल्कि विभिन्न धर्मों के लोग जीवन के विभिन्न सत्यों के बारे में जानने के लिए आश्रम में आते हैं।
7. गौरी शंकर महादेव मंदिर -
गौरी शंकर महादेव मंदिर हरिद्वार में घूमने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक है क्योंकि यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसकी सेटिंग सुंदर है। इस मंदिर के बगल से गंगा बहती है और विशाल हिमालय की पृष्ठभूमि इसे और भी सुंदर बनाती है। हिमालय की पृष्ठभूमि और मंदिर की सुंदर सेटिंग एक जादुई आभा पैदा करती है। पर्यटक इस स्थान पर छुट्टियां बिताने के लिए आते है।
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