Bilaspur
विस्तृत वर्णन – छत्तीसगढ़ राज्य के सबसे बड़े जिलों में से एक ‘बिलासपुर’ इस राज्य की “न्यायधानी” के रूप में जाना जाता है, क्योंकि यहां छतीसगढ़ राज्य का उच्च न्यायालय स्थित है. यह जिला प्रशासनिक दृष्टि से छत्तीसगढ़ का दूसरा सबसे बड़ा जिला है. लगभग 400 वर्ष पूर्व बसे इस जिले का नाम एक मत्स्य महिला ‘बिलासा’ के नाम पर पड़ा. बिलासपुर 21.47° से 23.8° उत्तर अक्षांश और 81.14° से 83.15° पूर्व देशान्तर के बीच स्थित है. यह जिला छत्तीसगढ़ राज्य का प्रशासनिक मुख्यालय
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Reference data & background — source: Census 2011 & editorial notes, may be outdated
विस्तृत वर्णन –
छत्तीसगढ़ राज्य के सबसे बड़े जिलों में से एक ‘बिलासपुर’ इस राज्य की “न्यायधानी” के रूप में जाना जाता है, क्योंकि यहां छतीसगढ़ राज्य का उच्च न्यायालय स्थित है. यह जिला प्रशासनिक दृष्टि से छत्तीसगढ़ का दूसरा सबसे बड़ा जिला है. लगभग 400 वर्ष पूर्व बसे इस जिले का नाम एक मत्स्य महिला ‘बिलासा’ के नाम पर पड़ा. बिलासपुर 21.47° से 23.8° उत्तर अक्षांश और 81.14° से 83.15° पूर्व देशान्तर के बीच स्थित है.
यह जिला छत्तीसगढ़ राज्य का प्रशासनिक मुख्यालय भी है. वहीं बिलासपुर उच्च न्यायालय को एशिया महाद्वीप का सबसे बड़े उच्च न्यायालय के रूप में जाना जाता है. छत्तीसगढ़ राज्य का उच्च न्यायालय भी इस जिले के बोदरी गांव में स्थित है. रायपुर-भिलाई-दुर्ग ट्राई-सिटी मेट्रो क्षेत्र के बाद यह राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर है. यह जिला हथकरघा उद्योग से निर्मित कोसे की साड़ियों व दूबराज चावल के लिए प्रसिद्ध है. चावल की गुणवत्ता के लिए प्रख्यात इस जिले को ‘धान का कटोरा’ नाम से भी जानते हैं. प्राकृतिक आपदाओं का शिकार होता आया बिलासपुर सांस्कृतिक दृष्टिकोंण से भी काफी समृद्ध है.
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य -
लगभग 400 वर्ष पुराना बिलासपुर जिला ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण अहमियत रखता है. शुरूआत में इसे रतनपुर के कल्चुरि राजवंश द्वारा नियंत्रित किया जाता था, किन्तु सन् 1741 में मराठा साम्राज्य के शासनकाल में बिलासपुर मूल अस्तित्व में आया. इसका नाम ‘बिलासपुर’ 17वीं शताब्दी में ही मत्स्य महिला ‘बिलासा’ के नाम पर पड़ा. उस समय तक इस पर मराठों का आधिपत्य था. इसके बाद 1854 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने इसका अधिग्रहण कर लिया. जिले के रूप में बिलासपुर का गठन सन् 1861 में किया गया तथा 1867 में बिलासपुर नगरपालिका का गठन हुआ.
जनसांख्यिकी –
2011 की जनगणना के आधार पर बिलासपुर की कुल जनसंख्या 19,61,922 है, जिसके अंतर्गत शहरी जनसंख्या 31.3% है. इसके अलावा जिले में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या क्रमशः 13.8% व 19.6% है. बिलासपुर का लिंगानुपात 970 तथा बाल लिंगानुपात 956 है.
प्रशासनिक विभाजन –
प्रशासनिक दृष्टिकोण से बिलासपुर छत्तीसगढ़
का एक
महत्वपूर्ण जिला है, जो कि बिलासपुर संभाग के अंतर्गत आता है. यह जिला पचपन
वार्डों और सात विधानसभा क्षेत्रों (मरवाही वि.स., कोटा वि.स., तखतपुर वि.स.,
बिल्हा वि.स., बिलासपुर वि.स., बेलतरा वि.स., मस्तुरी वि.स.) में विभाजित है.
छत्तीसगढ़ का उच्च न्यायालय भी इसी जिले में स्थित है. इसके अलावा बिलासपुर के
अंतर्गत 645 ग्राम पंचायतें शामिल हैं. जिले के कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार हैं –
1. सांसद –
लखन लाल साहू
2.
मुख्य न्यायधीश -
थोट्टाथील भास्करन नायर राधाकृष्णन
3. कलेक्टर
और डीएम – पी. दयानंद
4. पुलिस
अधीक्षक – आरिफ एच. शेख
5. कमिश्नर – सौमिल रंजन चौबे
6. मुख्य
कार्यपालन अधिकारी – फरिहा आलम सिद्दीकी
शिक्षा एवं चिकित्सकीय सुविधाएं -
शिक्षा के दृष्टिकोण से जिले में तीन
विश्वविद्यालय अटल बिहारी बाजपेयी वि.वि., गुरू घासीदास वि.वि. एवं पं. सुंदर लाल
शर्मा(मुक्त) विश्वविद्यालय हैं. वहीं जिला अस्पताल, बिलासपुर, राज्य मानिक
स्वास्थ्य चिकित्सालय, सिम्स अस्पताल जिले के कुछ प्रमुख अस्पताल हैं. इसके अलावा
सुरक्षा की नज़र से जिले में प्रमुख रूप से 6 पुलिस थानें ( अजाक थाना, कोटा,
कोटी, गौरेला, चकरभाठा व तखतपुर पुलिस थाना) हैं.
भौगोलिक पृष्ठभूमि –
अरपा नदी के किनारे पर बसा जिला बिलासपुर जिला एक समतल क्षेत्र है
तथा यह समुद्र तट से करीब 285 मीटर ऊंचाई पर स्थित है.
छत्तीसगढ़ राज्य के ऊत्तरी भाग में स्थित बिलासपुर जिला 21.47°
से
23.8° उत्तर
अक्षांश और 81.14° से 83.15° पूर्व देशान्तर के बीच स्थित है. यह जिला उत्तर में कोरिया
जिला, मध्य
प्रदेश के अनुपपुर जिला, पश्चिम में मुंगेली और कबीरधाम
जिला, दक्षिण में
बलौदाबाजार- भाटापारा जिला और पूर्व में कोरबा और जांजगीर-चांपा जिला से घिरा हुआ
है. एक समतल क्षेत्र होने के कारण यहां मुख्य रूप से कनहार, मतासी, डोरसा और भट्टा
(मिट्टियों के प्रकार) मिट्टी पायी जाती है. यह जिला कृषि, औद्योगिक व आर्थिक
विकास के दृष्टिकोण से देश की आर्थिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान रखता है.
ड्रेनेज सिस्टम –
बिलासपुर जिले की प्रमुख व सबसे बड़ी नदी अरपा है,
जो कि करीब 100 किमी लम्बी है. यह जिले की सबसे बड़ी नदी है और इसे सलिला के नाम
से भी जाना जाता है. इस नदी का उद्गम पेण्ड्रा के पास अमरपुर गांव से होता है, जो
कि थोड़ी दूर जाकर छतौना गांव में एक नाले से मिल जाती है तथा यहां से थोड़ा आगे खोंड्री
खोंगसरा में यह नदी दो और नालों से मिलती है.
बिल्हा के पास शिवनाथ नदी में मिलने तक अरपा नदी
काफी दूषित हो जाती है. नदी को दूषित होने से बचाने के लिए 2009 में क्षेत्र के
लोगों द्वारा ‘अरपा बचाओ’ अभियान शुरू
किया गया, हालांकि अनौपाचारिक रूप से 1992 से ही यह अभियान शुरू हो गया था. इसके
बाद 2011 में अरपा विकास प्राधिकरण का गठन भी हुआ. लीलागर और मनियारी नदी भी
बिलासपुर की प्रमुख नदियों के रूप में जानी जाती हैं.
भूगर्भीय संरचना के आधार पर इस क्षेत्र का ड्रेनेज सिस्टम वर्षा की मात्रा, भूमि और ढलान पर निर्भर करता है. अरपा नदी मुख्य रूप से उत्तर से दक्षिण की ओर बहती है, जो कि वर्षा ऋतु के अलावा दूसरे मौसमों में सूख जाती है. 100 किमी लम्बी यह नदी जिले के मध्य में पश्चिम से पूर्व की ओर बहने लगती है. जिससे पता चलता है कि बिलासपुर जिले के पूर्वी क्षेत्र की ऊंचाई पश्चिमी क्षेत्र की ऊंचाई से कम है.
जलवायु और वर्षा –
बिलासपुर जिले की जलवायु उत्तर-भारत के अन्य क्षेत्रों के समान ही होती है. इस जिले में उप-उष्णकटिबंधीय, अर्धशुष्क, महाद्वीपीय और मानसून जलवायु पायी जाती है. इस प्रकार यहाँ ग्रीष्मकाल, शीतकाल और बरसात का मौसम होता है. बिलासपुर की जलवायु कृषि के दृष्टिकोण से आदर्श है तथा यहां गेहूं, चावल, गन्ना और कपास की फसल काफी अच्छी होती है.
बिलासपुर में बरसात का मौसम जुलाई से सितंबर तक
होता है तथा यहां की वार्षिक वर्षा लगभग 58 सेंटीमीटर है. यहां बरसात का मौसम
सीमित होता है जो कि स्वस्थ औद्योगिक विकास के लिए काफी उपयुक्त है. इस अवधि के
दौरान कुल वर्षा का लगभग 80 प्रतिशत प्राप्त
होता है. जुलाई से सितंबर के दौरान यहां जिले की कुल वर्षा की लगभग 80 प्रतिशत
वर्षा होती है. यहाँ वर्षा का वितरण असमान रूप से होता है.
प्रमुख पर्यटन स्थल –
अपनी सांस्कृतिक व धार्मिक विरासतों को सहेजने वाले बिलासपुर जिले के प्रमुख पर्यटक स्थल इस प्रकार हैं –
1. महामाया मंदिर, रतनपुर
महामाया मंदिर का निर्माण 12वीं- 13वीं शताब्दी में हुआ था, जो कि
रतनपुर के कल्चुरी राजाओं की कुलदेवी महामाया का प्रसिद्ध मंदिर है. यह प्राचीन
मंदिर बिलासपुर-अंबिकापुर (व्हाया– कटघोरा) रोड पर 25 किमी की दूरी पर स्थित प्राचीन ऐतिहासिक स्थल रतनपुर में तालाब के
किनारे स्थित है. इस मंदिर की विशेषता इसका कलात्मक मंडप तथा प्रवेश द्वार है.
2. प्राचीन शिव मंदिर, किरारी गोढ़ी
लगभग 11वीं- 12वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर कल्चुरी कालीन
प्रसिद्ध शिव मंदिर है. बिलासपुर से लगभग 30 किमी दूर स्थित किरारी गोढ़ी गांव में
स्थित यह शिव मंदिर ऐतिहासिक विरासतों व धार्मिक विश्वासों के मद्देनजर दर्शनीय
है.
3. देवरानी – जेठानी मंदिर, अमेरीकांपा
देवरानी मंदिर
भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर का मुख पूर्व दिशा की ओर है. इस मंदिर
में रूद्रशिव के नाम से संबोधित की जाने वाली एक प्रतिमा सर्वाधिक महत्वपूर्ण है.
यह विशाल एकाश्माक द्विभूजी प्रतिमा समभंगमुद्रा में खड़ी है, जिसकी ऊंचाई 2.70 मीटर है.
जेठानी मंदिर
दक्षिणाभिमुखी यह मंदिर भी भगवान शिव को समर्पित है. यह मंदिर
स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण है.
बिलासपुर स्थित लुतरा शरीफ, बाबा सैय्यद इंसान अली शाह की दरगाह है. लगभग सभी धर्मों के लोग यहां आते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दरगाह पर मत्था टेकने वाले की मनोकामना जरूर पूरी होती है.
5. कानन पेंडारी, मुंगेली रोड –
यह बिलासपुर का सुप्रसिद्ध चिड़ियाघर है, जो कि बिलासपुर से 10 किमी दूर मुंगेली रोड पर स्थित है.
6. ऊर्जा पार्क, राजकिशोर नगर –
क्रेडा की ओर से संचालित ऊर्जा पार्क (ऊर्जा शिक्षा उद्यान) भी जिले में पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रखता है.
पुरातत्व -
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन बिलासपुर जिले के इन ऐतिहासिक
भवनों का संरक्षण व रख-रखाव किया जा रहा है.
·
चर्च बड़ा गिरजा – 100 वर्ष से अधिक पुराना
·
गोलबाजार – निर्मित वर्ष 1937
·
बिलासपुर रेलवे बिल्डिंग का मुख्य
द्वार – निर्मित
वर्ष 1890
·
नार्थ ईस्ट इंस्टिट्यूट भवन – निर्मित वर्ष 1912
·
नार्थ वेस्ट इंस्टिट्यूट भवन(बंग्ला
यार्ड)– 100 वर्ष से
अधिक पुराना
·
राघवेन्द्र राव सभा भवन – निर्मित वर्ष 1946
·
कंपनी गार्डन – निर्मित वर्ष 1900
·
लाल बहादुर शास्त्री विद्यालय – निर्मित वर्ष 1862
·
व्यंकटेश मंदिर सदर बाजार – निर्मित वर्ष 1941
रेलवे जंक्शन –
बिलासपुर
रेलवे स्टेशन का निर्माण सन् 1889 में ब्रिटिश शासनकाल में हुआ था. इस रेलवे
स्टेशन पर बना प्लेटफार्म 802 मीटर है, जो कि खडगपुर और गोरखपुर के बाद तीसरे सबसे
लम्बे रेलवे प्लेटफार्म के रूप में जाना जाता है. बिलासपुर जंक्शन में कुल 9
प्लेटफार्म हैं, जिसमें कि 8 प्लेटफार्म स्थायी हैं. यहां 116 ट्रेनें रूकती हैं
और 30 ट्रेनें यहां से अपना सफ़र शुरू करती हैं. रेलवे स्टेशन पर पार्किंग,
सीसीटीवी, रेस्त्रां, प्रतीक्षा-गृह और वाईफाई आदि सुविधाएं उपलब्ध हैं.
बिलासपुर
जंक्शन का स्टेशन कोड बीएसपी है. यहां से बिलासपुर एयरपोर्ट 12.5 किमी की दूरी तथा
बस स्टैंड स्टेशन के बाहर ही है.
संदर्भ –
https://erail.in/hi/info/bilaspur-railway-station-BSP/21134
https://indiarailinfo.com/station/news/news-bilaspur-junction-bsp/182
https://naidunia.jagran.com/chhattisgarh/bilaspur-arpa-riwar-news-1278909
http://shodhganga.inflibnet.ac.in/bitstream/10603/76726/10/10_chapter%201.pdf
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