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निर्मल हिंडन समिति का गठन

निर्मल हिंडन समिति का गठन

Dulhera(Meerut-Meerut-250110)

हिंडन नदी को साफ बनाने के लिए मेरठ मंडल के कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार ने निर्मल हिंडन समिति का गठन किया है . इस समिति का उद्देश्य हिंडन को उसक...

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 विष

 विषैली हुई जीवनदायी नदियां- 

आज हमारे देश की नदियां इतनी गंदी हो चुकी है कि इसके प्रदूषित पानी से लोगों को तरह-तरह की बीमारियां हो रही हैं. औद्योगिक कचरे के साथ-साथ मानव द्वारा छोड़े गए कचरे के कारण आज देश भर की नदियां मरने के कगार पर हैं. जो नदियां जीवनदायी हुआ करती थी आज वही विषैली होकर मनुष्यों के, पशुओं के प्राण हरने को आमदा है. नदियों के इस विनाशकारी रूप के जिम्मेदार हम ही हैं. कल कल करती धाराएं आज नाले के रूप में तब्दील हो चूकी हैं. नदियों के उद्गम स्थान का पानी और उन्हीं नदियों के शहरों में घुसते ही उनके पानी में जिस तरह का बदलाव आता है वह मनुष्य के विकृत सोच को दर्शाने के लिए काफी है. 
 
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शहरों में आते ही नदियां हो जाती हैं जहरीली 

यमुना की सहायक नदी हिंडन की भी यही वस्तुस्थिति है. शिवालिक रेंज से निकलने वाली हिंडन की कल कल धारा शहरों में आते ही जहरीली और बेहद दूषित हो जाती है. ऐसे में हाल ही में मेरठ डिवीजन के कमिश्नर बने डॉ. प्रभात कुमार ने हिंडन को निर्मल बनाने का बीड़ा उठाया है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी इस अभियान में पूर्ण समर्थन है.
 
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निर्मल हिंडन अभियान

डॉ. प्रभात कुमार ने हिंडन को निर्मल बनाने के इस पहल में अपने साथ कई लोगों को साथ में जोड़ा है. हिंडन 7 जिले दो डिवीजन से होकर गुजरती है. मेरठ के लगभग सारे अधिकारी, सहारनपुर के कमिश्नर, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, एनजीओ, प्रकृति प्रेमी, पर्यावरणविद, विभिन्न ओपिनियन लीडर्स के साथ बातचीत कर हिंडन को पुनर्जीवित करने का प्रयास डॉ. प्रभात कुमार द्वारा किया जा रहा है. निर्मल हिंडन के इस अभियान में मेरठ मंडल के कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार के साथ पूरी टीम 5 अगस्त 2017 को अपनी पहली यात्रा के तहत शिवालिक रेंज में पहुंची और हिंडन के उद्गम स्थान तक पहुंच इसके पानी की स्वछता को देख अचरज में पड़ गई.
 
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दूसरी नदियों के लिए उदाहरण बनेगी हिंडन

355 किलोमीटर की लंबी हिंडन नदी, जिसका कैचमेंट एरिया 7000 स्क्वायर किलोमीटर से भी ज्यादा है को निर्मल बनाने की पहल वाकई एक युद्ध की भांति है. हिंडन अंत में जाकर यमुना में मिल जाती है. हिंडन नदी कई जिलों से होकर गुजरती है, बीच में घनी आबादी, कई सौ फैक्ट्रियां, शहरी कचरा, प्रदूषण और जहरीला होता पानी इसकी पहचान बन चुकी है. मगर एक बार अगर इसे निर्मल बनाने की कोशिश सफल हो जाती है तो इससे न सिर्फ यमुना के पानी में सुधार होगा बल्कि यह दूसरी नदियों के लिए भी उदाहरण बन सकेगी.
 
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 शिवालिक में हिंडन नदी है, तो शहरों में हिंडन नाला

डॉ. प्रभात कुमार को मेरठ मंडल के कमिश्नर के साथ साथ ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे, औद्योगिक विकास प्राधिकरण गौतमबुद्ध नगर का अतिरिक्त प्रभार संभालने की भी जिम्मेदारी भी दी गई है. ऐसे में जब वह एक्सप्रेस वे से गुजरा करते थे तब उन्हें हिंडन का यह हाल देख काफी बुरा महसूस होता था. ऐसे में उन्होंने ठाना की हिंडन को फिर से उसके वास्तविक स्वरुप में लाया जाये. डॉ. प्रभात कुमार कहते हैं कि मेरठ, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में बहने वाली हिंडन और शिवालिक रेंज से निकलने वाली हिंडन में बहुत फर्क है, वह कहते हैं शिवालिक में हिंडन नदी है, तो वहीं इन शहरों में हिंडन नाला. डॉ. प्रभात कुमार ने हिंडन के पुनरुद्धार के लिए सबको साथ लेकर चलने का काम किया है.  उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि वह 'आई' के कॉन्सेप्ट के साथ नहीं बल्कि 'वी' के कॉन्सेप्ट के साथ आगे बढ़ रहे हैं और बढ़ते रहेंगे.
 
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निर्मल हिंडन के लिए समिति का गठन

डॉ. प्रभात कुमार हिंडन को निर्मल बनाने के लिए उसे उसके पुराने स्वरूप में लाने के लिए कितने संकल्पित है इसका पता इसी से चल जाता है कि 5 अगस्त को हुए हिंडन की पहली यात्रा के कुछ ही दिनों बाद उन्होंने 9 सितंबर को इसके लिए एक कमेटी का गठन कर दिया. कार्यालय आयुक्त, मेरठ मंडल के ज्ञापन के अनुसार: 
 
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'निर्मल हिंडन' एवं उसकी सहायक नदियों के उद्गम तथा हिंडन तक मिलने के बारे में अध्ययन के लिए निम्नांकित समिति गठित की जाती है- 
1. श्री रमन कांत, नीर फाउंडेशन, मेरठ
2. श्री उमर सैफ, निवासी शामली
3. डा. एस.के. उपाध्याय, निवासी सहारनपुर
4. श्री राजीव उपाध्याय यायावर, इतिहासविद, सहारनपुर
5. श्री पी.के. शर्मा, पांवधोई समिति,  निवासी सहारनपुर 
6. सिंचाई विभाग के संबंधित अवर अभियंता
7. वन विभाग के संबंधित एस.डी.ओ.
यह समिति हिंडन के उद्गम स्थलों का चिन्हांकन तथा उनसे निकलने वाला पानी कहां-कहां हिंडन में मिलता है, उसका चिन्हांकन करते हुए इन संभावनाओं पर विचार करेगी कि हिंडन के उद्गम से निकलने वाले पानी को किस प्रकार से अक्षूण रहते हुए हिंडन तक पहुंचाया जाए. 
यह समिति अपने प्रशिक्षण के दौरान सर्वे ऑफ इंडिया के मानचित्रों का भी अवलोकन करेगी और हिंडन में किन-किन स्रोतों से पानी लाया जा सकता है, इस पर भी विचार करते हुए अपनी आख्या यथाशीघ्र अधोहस्ताक्षरी के समक्ष प्रस्तुत करेगी.
 
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उम्मीद है कि डॉ. प्रभात कुमार की यह कोशिश सफल हो पाएगी और निर्मल हिंडन दूसरी नदियों के लिए एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत कर पाएगी.

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